लालू परिवार की मुश्किलें बढ़ गई हैं। IRCTC मनी लॉन्ड्रिंग मामले में लालू, तेजस्वी, राबड़ी समेत 9 लोगों के खिलाफ आरोप तय हो गए हैं। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में आज इस मामले में सुनवाई हुई थी। जिसके बाद आरोप तय किए गए हैं। इस मामले ED 16 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। इसमें कोर्ट ने सुनवाई के बाद 7 लोगों को आरोप से मुक्त कर दिया है। अब इस मामले में 3 अक्टूबर को अगली सुनवाई होगी। इससे पहले 29 अगस्त को इस मामले में सुनवाई हुई थी। आरोप तय करने पर फैसला टल गया था। कोर्ट ने कहा- राबड़ी और तेजस्वी के पास अपराध की आय होने का मजबूत संदेह कोर्ट ने आदेश सुनाते हुए कहा कि राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के पास अपराध से अर्जित आय (proceeds of crime) होने और पद के दुरुपयोग का मजबूत संदेह है। दोनों पटना की उस जमीन का लाभ उठा रहे हैं, जिसे कथित तौर पर 2005 से 2014 के बीच, जब लालू प्रसाद यादव केंद्रीय रेल मंत्री थे, उनके कहने पर उनके पक्ष में हस्तांतरित किया गया था। निचली अदालत के आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी लालू परिवार ने निचली अदालत के अक्टूबर 2025 के उस आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप तय किए गए थे। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने इस याचिका का विरोध करते हुए अदालत में कहा कि उनके पास मामले से जुड़े पर्याप्त और पुख्ता सबूत मौजूद हैं। CBI का दावा है कि जांच के दौरान कई अहम दस्तावेज और साक्ष्य सामने आए हैं, जो आरोपों को मजबूत करते हैं। ED ने दाखिल की है चार्जशीट इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने लालू प्रसाद यादव परिवार समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। इसमें पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव समेत कई लोगों को आरोपी बनाया गया है। यह मामला उस समय का है जब लालू प्रसाद यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे। आरोप है कि उनके कार्यकाल के दौरान IRCTC के तहत आने वाले रांची और पुरी स्थित दो होटलों के टेंडर में अनियमितताएं की गईं। जांच एजेंसियों के अनुसार, इन होटलों और उनसे जुड़ी जमीनों को निजी कंपनियों को नियमों की अनदेखी करते हुए पट्टे पर दिया गया। इस प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव था और इससे कुछ निजी कंपनियों को अनचित लाभ पहुंचाया गया। 16 आरोपी और कंपनियां मामले में शामिल इस मामले में M/s Lara Projects LLP, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, लालू प्रसाद यादव, सरला गुप्ता, प्रेम चंद गुप्ता, गौरव गुप्ता, नाथ मल ककरानिया, राहुल यादव, विजय त्रिपाठी, देवकी नंदन तुलस्यान, M/s Sujata Hotels, विनय कोचर, विजय कोचर, राजीव कुमार रेलन और M/s Abhishek Finance Private Limited आरोपी हैं। इनमें से कोर्ट ने 7 लोगों को आरोपों से मुक्त कर दिया है। कोर्ट ने कहा था- लालू यादव की जानकारी में रची गई साजिश राउज एवेन्यू कोर्ट ने 13 अक्टूबर को अपने आदेश में कहा था कि इस पूरे टेंडर घोटाले की साजिश लालू यादव की जानकारी में रची गई। अदालत के अनुसार, टेंडर प्रक्रिया में उनका हस्तक्षेप था और इससे उनके परिवार को आर्थिक फायदा हुआ। कोर्ट ने इसी आधार पर लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव को आरोपी मानते हुए उनके खिलाफ मुकदमा चलाने का निर्णय लिया था। लालू परिवार ने आरोपों को बताया निराधार दूसरी ओर, लालू प्रसाद यादव ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि यह मामला राजनीतिक साजिश के तहत उन्हें और उनके परिवार को फंसाने के लिए बनाया गया है। उन्होंने अदालत में भी अपनी बेगुनाही का दावा किया है। लालू परिवार की मुश्किलें बढ़ गई हैं। IRCTC मनी लॉन्ड्रिंग मामले में लालू, तेजस्वी, राबड़ी समेत 9 लोगों के खिलाफ आरोप तय हो गए हैं। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में आज इस मामले में सुनवाई हुई थी। जिसके बाद आरोप तय किए गए हैं। इस मामले ED 16 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। इसमें कोर्ट ने सुनवाई के बाद 7 लोगों को आरोप से मुक्त कर दिया है। अब इस मामले में 3 अक्टूबर को अगली सुनवाई होगी। इससे पहले 29 अगस्त को इस मामले में सुनवाई हुई थी। आरोप तय करने पर फैसला टल गया था। कोर्ट ने कहा- राबड़ी और तेजस्वी के पास अपराध की आय होने का मजबूत संदेह कोर्ट ने आदेश सुनाते हुए कहा कि राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के पास अपराध से अर्जित आय (proceeds of crime) होने और पद के दुरुपयोग का मजबूत संदेह है। दोनों पटना की उस जमीन का लाभ उठा रहे हैं, जिसे कथित तौर पर 2005 से 2014 के बीच, जब लालू प्रसाद यादव केंद्रीय रेल मंत्री थे, उनके कहने पर उनके पक्ष में हस्तांतरित किया गया था। निचली अदालत के आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी लालू परिवार ने निचली अदालत के अक्टूबर 2025 के उस आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप तय किए गए थे। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने इस याचिका का विरोध करते हुए अदालत में कहा कि उनके पास मामले से जुड़े पर्याप्त और पुख्ता सबूत मौजूद हैं। CBI का दावा है कि जांच के दौरान कई अहम दस्तावेज और साक्ष्य सामने आए हैं, जो आरोपों को मजबूत करते हैं। ED ने दाखिल की है चार्जशीट इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने लालू प्रसाद यादव परिवार समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। इसमें पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव समेत कई लोगों को आरोपी बनाया गया है। यह मामला उस समय का है जब लालू प्रसाद यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे। आरोप है कि उनके कार्यकाल के दौरान IRCTC के तहत आने वाले रांची और पुरी स्थित दो होटलों के टेंडर में अनियमितताएं की गईं। जांच एजेंसियों के अनुसार, इन होटलों और उनसे जुड़ी जमीनों को निजी कंपनियों को नियमों की अनदेखी करते हुए पट्टे पर दिया गया। इस प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव था और इससे कुछ निजी कंपनियों को अनचित लाभ पहुंचाया गया। 16 आरोपी और कंपनियां मामले में शामिल इस मामले में M/s Lara Projects LLP, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, लालू प्रसाद यादव, सरला गुप्ता, प्रेम चंद गुप्ता, गौरव गुप्ता, नाथ मल ककरानिया, राहुल यादव, विजय त्रिपाठी, देवकी नंदन तुलस्यान, M/s Sujata Hotels, विनय कोचर, विजय कोचर, राजीव कुमार रेलन और M/s Abhishek Finance Private Limited आरोपी हैं। इनमें से कोर्ट ने 7 लोगों को आरोपों से मुक्त कर दिया है। कोर्ट ने कहा था- लालू यादव की जानकारी में रची गई साजिश राउज एवेन्यू कोर्ट ने 13 अक्टूबर को अपने आदेश में कहा था कि इस पूरे टेंडर घोटाले की साजिश लालू यादव की जानकारी में रची गई। अदालत के अनुसार, टेंडर प्रक्रिया में उनका हस्तक्षेप था और इससे उनके परिवार को आर्थिक फायदा हुआ। कोर्ट ने इसी आधार पर लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव को आरोपी मानते हुए उनके खिलाफ मुकदमा चलाने का निर्णय लिया था। लालू परिवार ने आरोपों को बताया निराधार दूसरी ओर, लालू प्रसाद यादव ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि यह मामला राजनीतिक साजिश के तहत उन्हें और उनके परिवार को फंसाने के लिए बनाया गया है। उन्होंने अदालत में भी अपनी बेगुनाही का दावा किया है।

