कुतलुपुर गांव में बाढ़ पीड़ितों को नहीं मिल रही राहत:मुंगेर में वृद्ध महिला मिली भूखी, स्कूल डूबे; सामुदायिक रसोई चलाने की मांग

कुतलुपुर गांव में बाढ़ पीड़ितों को नहीं मिल रही राहत:मुंगेर में वृद्ध महिला मिली भूखी, स्कूल डूबे; सामुदायिक रसोई चलाने की मांग

मुंगेर में गंगा का जलस्तर घटने लगा है, लेकिन बाढ़ प्रभावित छह प्रखंडों की 38 पंचायतों में लोगों की परेशानी अब भी बनी हुई है। बुधवार शाम मुंगेर में गंगा का जलस्तर 38.89 मीटर दर्ज किया गया। यह खतरे के निशान 39.33 मीटर से करीब 56 सेंटीमीटर नीचे है। गुरुवार को भी जलस्तर में कमी आने की संभावना है। हालांकि, बाढ़ का पानी अब भी कई गांवों को घेरे हुए है और लोगों का जनजीवन सामान्य नहीं हो पाया है। बाढ़ का असर गांव के बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ा है। कुतलुपुर के उच्च विद्यालय और मध्य विद्यालय बाढ़ के पानी में डूबे हुए हैं। स्कूलों में पानी जमा होने के कारण बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ा है। बुजुर्गों-महिलाओं को हो रही परेशानी ग्रामीणों का कहना है कि आने-जाने की सही व्यवस्था न होने से मरीजों, बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है। बुधवार को गांव की एक महिला मरीज को चारपाई पर लेटाकर इलाज के लिए ले जाना पड़ा। बाढ़ प्रभावित इलाकों में प्रशासन की ओर से अलग-अलग स्थानों पर सामुदायिक रसोई चलाई जा रही है। पीड़ित परिवारों के बीच पॉलीथिन शीट भी बांटी जा रही है। हालांकि, कुतलुपुर के ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें इन सुविधाओं का पूरा फायदा नहीं मिल पा रहा है।

ग्रामीणों की मांग है कि बाढ़ की स्थिति को देखते हुए सभी वार्डों में अलग-अलग सामुदायिक रसोई शुरू की जाए। उधर, इलाहाबाद में गंगा का जलस्तर दोबारा बढ़ने के बाद मुंगेर में भी अगले एक सप्ताह के दौरान जलस्तर में फिर वृद्धि की आशंका है। इससे पहले से बाढ़ की मार झेल रहे लोगों की चिंता बढ़ गई है। सदर सीओ अंजली ने बताया कि बुधवार की शाम से कुतलुपुर गांव में सामुदायिक रसोई शुरू कर दी गई है। ग्रामीण सभी अलग-अलग वार्डों में रसोई चलाने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन की टीम बाढ़ पीड़ितों की सेवा और राहत कार्य में लगी हुई है। मुंगेर में गंगा का जलस्तर घटने लगा है, लेकिन बाढ़ प्रभावित छह प्रखंडों की 38 पंचायतों में लोगों की परेशानी अब भी बनी हुई है। बुधवार शाम मुंगेर में गंगा का जलस्तर 38.89 मीटर दर्ज किया गया। यह खतरे के निशान 39.33 मीटर से करीब 56 सेंटीमीटर नीचे है। गुरुवार को भी जलस्तर में कमी आने की संभावना है। हालांकि, बाढ़ का पानी अब भी कई गांवों को घेरे हुए है और लोगों का जनजीवन सामान्य नहीं हो पाया है। बाढ़ का असर गांव के बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ा है। कुतलुपुर के उच्च विद्यालय और मध्य विद्यालय बाढ़ के पानी में डूबे हुए हैं। स्कूलों में पानी जमा होने के कारण बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ा है। बुजुर्गों-महिलाओं को हो रही परेशानी ग्रामीणों का कहना है कि आने-जाने की सही व्यवस्था न होने से मरीजों, बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है। बुधवार को गांव की एक महिला मरीज को चारपाई पर लेटाकर इलाज के लिए ले जाना पड़ा। बाढ़ प्रभावित इलाकों में प्रशासन की ओर से अलग-अलग स्थानों पर सामुदायिक रसोई चलाई जा रही है। पीड़ित परिवारों के बीच पॉलीथिन शीट भी बांटी जा रही है। हालांकि, कुतलुपुर के ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें इन सुविधाओं का पूरा फायदा नहीं मिल पा रहा है।

ग्रामीणों की मांग है कि बाढ़ की स्थिति को देखते हुए सभी वार्डों में अलग-अलग सामुदायिक रसोई शुरू की जाए। उधर, इलाहाबाद में गंगा का जलस्तर दोबारा बढ़ने के बाद मुंगेर में भी अगले एक सप्ताह के दौरान जलस्तर में फिर वृद्धि की आशंका है। इससे पहले से बाढ़ की मार झेल रहे लोगों की चिंता बढ़ गई है। सदर सीओ अंजली ने बताया कि बुधवार की शाम से कुतलुपुर गांव में सामुदायिक रसोई शुरू कर दी गई है। ग्रामीण सभी अलग-अलग वार्डों में रसोई चलाने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन की टीम बाढ़ पीड़ितों की सेवा और राहत कार्य में लगी हुई है।  

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