मशरूम प्लांट लगाने का सपना दिखाकर 21 लाख रुपये की ठगी करने के आरोपित आशुतोष मंगलम को सरैया पुलिस ने बुधवार को गिरफ्तार कर लिया। आरोप है कि 2024 में रेवा की महिला से प्लांट और उपकरण के नाम पर 17.15 लाख रुपये कंपनी के खाते में ट्रांसफर कराने के साथ 3.85 लाख रुपये और नकद लिए गए, लेकिन प्लांट नहीं लगाया। रकम लौटाने का दबाव बढ़ा तो 19 लाख के चार चेक थमा दिए, जो बैंक में जमा होते ही बाउंस हो गए। मामले में आशुतोष के साथ शिवानी कुमारी और उमेश चौधरी भी नामजद हैं। बता दें कि आशुतोष मंगलम की कंपनी यक्ष ग्रेविटी एग्रो एंड एनर्जी एजेंसी पर जीविका दीदियों को कर्जदार बनाने का आरोप है। लोन लेकर कंपनी के खाते में ट्रांसफर किए 17.15 लाख मामले में रेवा निवासी विश्वनाथ सिंह की पत्नी प्रीति कुमारी ने सरैया थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उन्होंने पुलिस को बताया कि आशुतोष मंगलम और शिवानी कुमारी उनके घर पहुंचे थे। दोनों ने मशरूम हाट/प्लांट लगाने का प्रस्ताव रखा। प्रस्ताव पर सहमत होने के बाद प्रीति ने मशरूम उत्पादन और उपकरण के लिए 17 दिसंबर 2024 को सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया से लोन लेकर 17.15 लाख रुपये शिवानी कुमारी की कंपनी के खाते में ट्रांसफर किए। इसके अलावा एसबीआई खाते से 3.85 लाख रुपये और कुछ नकद भी दिए। रकम लेने के बाद भी आरोपितों ने मशरूम प्लांट का निर्माण कार्य शुरू नहीं किया। काफी समय बीतने के बाद प्रीति ने अपनी रकम वापस मांगनी शुरू की। लगातार दबाव बनाने पर शिवानी कुमारी ने सेंट्रल बैंक के चार चेक दिए। 19 लाख के चार चेक दिए, खाते में नहीं थी पर्याप्त राशि प्रीति ने 5 दिसंबर 2025 को 19 लाख रुपये के भुगतान के लिए चारों चेक सरैया स्थित सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की शाखा में जमा किए। बैंक ने खाते में पर्याप्त राशि नहीं होने की जानकारी देते हुए सभी चेक बाउंस कर दिए। इसके बाद भी रकम वापस नहीं की गई। प्रीति ने अधिवक्ता के माध्यम से 19 दिसंबर 2025 को वकालतन नोटिस भेजकर रुपये लौटाने की मांग की। नोटिस के बावजूद भुगतान नहीं होने पर उन्होंने सरैया थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई। पीड़िता ने आरोप लगाया कि आरोपितों ने कंपनी के नाम पर मशरूम प्लांट लगाने का भरोसा देकर साजिश के तहत उनसे रुपये लिए और धोखाधड़ी की।
बैंक ट्रांजेक्शन के साक्ष्य मिले, जांच में गिरफ्तारी प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। पुलिस के अनुसार, जांच में महिला के खाते से रुपये ट्रांसफर किए जाने के साक्ष्य मिले। इसके बाद बुधवार को काजी मोहम्मदपुर थाना क्षेत्र के दामूचक निवासी आशुतोष मंगलम को गिरफ्तार कर लिया गया। सरैया थानेदार देवेंद्र कुमार ने बताया कि आशुतोष मंगलम को गिरफ्तार किया गया है। उसे गुरुवार को न्यायिक हिरासत में भेजा जाएगा। मामले में नामजद शिवानी कुमारी और उमेश चौधरी की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
जीविका दीदियों के नाम पर भी करोड़ों के कर्ज का आरोप यह वही आशुतोष मंगलम हैं, जिनकी एजेंसी पर जीविका दीदियों ने मशरूम क्लस्टर के नाम पर कर्ज को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। जीविका दीदियों का आरोप है कि 110 महिलाओं में प्रत्येक के नाम पर करीब 3.30 लाख रुपए का कर्ज लिया गया, जो कुल मिलाकर करीब 3.63 करोड़ रुपए होता है। आरोप है कि क्लस्टर का अपेक्षित लाभ नहीं मिला और ब्याज समेत प्रत्येक दीदी के नाम पर कर्ज अब बढ़कर करीब 5.5 लाख रुपए तक पहुंच गया है। इसी मामले में एसडीओ पूर्वी के न्यायालय में सुनवाई चल रही है। दूसरी सुनवाई में दीदियों ने आशुतोष मंगलम की एजेंसी से जुड़े 20 बिंदुओं पर सवाल उठाए हैं और न्यायालय ने उनसे लिखित जवाब मांगा है। मंगलम ने अपने पक्ष में बैंक से भुगतान में कथित देरी और अनियमितता को परियोजना प्रभावित होने की वजह बताया है। मामले की अगली सुनवाई 16 सितंबर को होगी। मशरूम प्लांट लगाने का सपना दिखाकर 21 लाख रुपये की ठगी करने के आरोपित आशुतोष मंगलम को सरैया पुलिस ने बुधवार को गिरफ्तार कर लिया। आरोप है कि 2024 में रेवा की महिला से प्लांट और उपकरण के नाम पर 17.15 लाख रुपये कंपनी के खाते में ट्रांसफर कराने के साथ 3.85 लाख रुपये और नकद लिए गए, लेकिन प्लांट नहीं लगाया। रकम लौटाने का दबाव बढ़ा तो 19 लाख के चार चेक थमा दिए, जो बैंक में जमा होते ही बाउंस हो गए। मामले में आशुतोष के साथ शिवानी कुमारी और उमेश चौधरी भी नामजद हैं। बता दें कि आशुतोष मंगलम की कंपनी यक्ष ग्रेविटी एग्रो एंड एनर्जी एजेंसी पर जीविका दीदियों को कर्जदार बनाने का आरोप है। लोन लेकर कंपनी के खाते में ट्रांसफर किए 17.15 लाख मामले में रेवा निवासी विश्वनाथ सिंह की पत्नी प्रीति कुमारी ने सरैया थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उन्होंने पुलिस को बताया कि आशुतोष मंगलम और शिवानी कुमारी उनके घर पहुंचे थे। दोनों ने मशरूम हाट/प्लांट लगाने का प्रस्ताव रखा। प्रस्ताव पर सहमत होने के बाद प्रीति ने मशरूम उत्पादन और उपकरण के लिए 17 दिसंबर 2024 को सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया से लोन लेकर 17.15 लाख रुपये शिवानी कुमारी की कंपनी के खाते में ट्रांसफर किए। इसके अलावा एसबीआई खाते से 3.85 लाख रुपये और कुछ नकद भी दिए। रकम लेने के बाद भी आरोपितों ने मशरूम प्लांट का निर्माण कार्य शुरू नहीं किया। काफी समय बीतने के बाद प्रीति ने अपनी रकम वापस मांगनी शुरू की। लगातार दबाव बनाने पर शिवानी कुमारी ने सेंट्रल बैंक के चार चेक दिए। 19 लाख के चार चेक दिए, खाते में नहीं थी पर्याप्त राशि प्रीति ने 5 दिसंबर 2025 को 19 लाख रुपये के भुगतान के लिए चारों चेक सरैया स्थित सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की शाखा में जमा किए। बैंक ने खाते में पर्याप्त राशि नहीं होने की जानकारी देते हुए सभी चेक बाउंस कर दिए। इसके बाद भी रकम वापस नहीं की गई। प्रीति ने अधिवक्ता के माध्यम से 19 दिसंबर 2025 को वकालतन नोटिस भेजकर रुपये लौटाने की मांग की। नोटिस के बावजूद भुगतान नहीं होने पर उन्होंने सरैया थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई। पीड़िता ने आरोप लगाया कि आरोपितों ने कंपनी के नाम पर मशरूम प्लांट लगाने का भरोसा देकर साजिश के तहत उनसे रुपये लिए और धोखाधड़ी की।
बैंक ट्रांजेक्शन के साक्ष्य मिले, जांच में गिरफ्तारी प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। पुलिस के अनुसार, जांच में महिला के खाते से रुपये ट्रांसफर किए जाने के साक्ष्य मिले। इसके बाद बुधवार को काजी मोहम्मदपुर थाना क्षेत्र के दामूचक निवासी आशुतोष मंगलम को गिरफ्तार कर लिया गया। सरैया थानेदार देवेंद्र कुमार ने बताया कि आशुतोष मंगलम को गिरफ्तार किया गया है। उसे गुरुवार को न्यायिक हिरासत में भेजा जाएगा। मामले में नामजद शिवानी कुमारी और उमेश चौधरी की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
जीविका दीदियों के नाम पर भी करोड़ों के कर्ज का आरोप यह वही आशुतोष मंगलम हैं, जिनकी एजेंसी पर जीविका दीदियों ने मशरूम क्लस्टर के नाम पर कर्ज को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। जीविका दीदियों का आरोप है कि 110 महिलाओं में प्रत्येक के नाम पर करीब 3.30 लाख रुपए का कर्ज लिया गया, जो कुल मिलाकर करीब 3.63 करोड़ रुपए होता है। आरोप है कि क्लस्टर का अपेक्षित लाभ नहीं मिला और ब्याज समेत प्रत्येक दीदी के नाम पर कर्ज अब बढ़कर करीब 5.5 लाख रुपए तक पहुंच गया है। इसी मामले में एसडीओ पूर्वी के न्यायालय में सुनवाई चल रही है। दूसरी सुनवाई में दीदियों ने आशुतोष मंगलम की एजेंसी से जुड़े 20 बिंदुओं पर सवाल उठाए हैं और न्यायालय ने उनसे लिखित जवाब मांगा है। मंगलम ने अपने पक्ष में बैंक से भुगतान में कथित देरी और अनियमितता को परियोजना प्रभावित होने की वजह बताया है। मामले की अगली सुनवाई 16 सितंबर को होगी।

