मप्र में अगले साल नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव एक साथ कराने की तैयारी है। पंचायत चुनाव भी ईवीएम से ही कराने की योजना है। दोनों चुनाव एक साथ एक चरण में कराए जाते हैं, तो 1.53 लाख ईवीएम की जरूरत पड़ेगी, जबकि आयोग के पास केवल 66 हजार ईवीएम ही हैं। 87 हजार ईवीएम की खरीदी में करीब 300 करोड़ का खर्च आ रहा है। जबकि ये दूसरे राज्यों से किराये पर ले ली जाएं तो महज 20 करोड़ रुपए में काम हो जाएगा। राज्य निर्वाचन आयुक्त मनोज श्रीवास्तव का कहना है, हम दोनों विकल्प पर विचार कर रहे हैं। पसोपेश… राज्य निर्वाचन आयोग दोनों विकल्पों पर विचार कर रहा, किराये पर लेना ज्यादा अनुकूल वीवीपैट के बिना घट जाती है कीमत… निकाय चुनावों में कई बार वीवीपेट का उपयोग नहीं किया जाता। केवल बैलेट यूनिट और कंट्रोल यूनिट से ही मतदान कराया जाता है। ऐसे में लागत 17,803 प्रति मशीन होगी। सार्वजनिक उपक्रम भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड या इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया से ये मशीनें खरीदने पर परिवहन, पैकेजिंग, पार्ट्स, सॉफ्टवेयर और टैक्स जुड़कर एक मशीन का औसत खर्च ₹27,000 से ₹28,000 के आसपास बैठता है। इस लिहाज से आयोग द्वारा करीब 250 करोड़ रुपए के बजट का अनुमान तैयार किया गया है। स्थिति : आयोग ने प्रस्ताव भेजा
आयोग ने राज्य सरकार को आगामी शीतकालीन सत्र में बजट प्रावधान के लिए प्रस्ताव भेज दिया है, लेकिन अगले साल स्थानीय निकायों के चुनाव होना है। इसलिए खरीद करने में समय लग सकता है। आयोग नई व्यवस्था लागू करने से पहले मशीनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना चाहता है, ताकि चुनाव प्रक्रिया बिना किसी बाधा के संपन्न कराई जा सके।

