भोटेकोशी बाढ़ में लापता अपनों की पहचान होगी DNA से! विदेश में रह रहे परिजनों के लिए नेपाल सरकार की नई गाइडलाइन

भोटेकोशी बाढ़ में लापता अपनों की पहचान होगी DNA से! विदेश में रह रहे परिजनों के लिए नेपाल सरकार की नई गाइडलाइन

नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) ने भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ में लापता हुए लोगों की पहचान के लिए एक महत्वपूर्ण नोटिस जारी किया है। यह नोटिस खासतौर पर उन परिवारों के लिए है जो विदेशों में रह रहे हैं और जिनके किसी सगे-संबंधी का बाढ़ में कोई पता नहीं चल पाया है। प्राधिकरण ने ऐसे परिवारों से डीएनए सैंपल जमा कराने की अपील की है, ताकि लापता व्यक्तियों की वैज्ञानिक तरीके से पहचान की जा सके।

किन रिश्तेदारों का सैंपल मान्य होगा

NDRRMA के अनुसार, विदेश में रहने वाले परिजन अपने देश की किसी सरकारी या मान्यता प्राप्त निजी फॉरेंसिक लैब में जाकर डीएनए टेस्ट करवा सकते हैं। इसमें प्राथमिकता क्रम तय किया गया हैं सबसे पहले लापता व्यक्ति के माता-पिता, बेटा या बेटी का सैंपल लिया जाएगा, उसके बाद सगे भाई-बहन (जिनके माता-पिता एक ही हों) का। यदि ये रिश्तेदार उपलब्ध न हों, तो परिवार के किसी अन्य रक्त-संबंधी का सैंपल स्वीकार किया जाएगा। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि पति-पत्नी, गोद लिए गए सदस्य, सौतेले रिश्तेदार या ससुराल पक्ष के लोगों का डीएनए तुलना के लिए मान्य नहीं होगा, क्योंकि उनका आनुवंशिक संबंध सीधा नहीं होता।

किन दस्तावेजों की जरूरत होगी

रिश्ते के आधार पर लैब को Autosomal STR, Y-STR या X-STR प्रोफाइल तैयार करनी होगी। साथ ही परिवारों को सैंपल देने वाले व्यक्ति के पासपोर्ट या राष्ट्रीय पहचान पत्र जैसी फोटो पहचान की प्रति और एक सहमति पत्र भी जमा करना होगा, जिसमें डीएनए प्रोफाइल के इस्तेमाल की अनुमति और लापता व्यक्ति से रिश्ते का ब्योरा दिया गया हो।

लैब की आधिकारिक लेटरहेड पर तैयार डीएनए रिपोर्ट, जिसमें मार्कर टेबल और इलेक्ट्रोफेरोग्राम शामिल हों, PDF, XML या CMF फॉर्मेट में नेपाल पुलिस की आधिकारिक ईमेल आईडी dnacodis@nepalpolice.gov.np पर भेजनी होगी।

डेटा पूरी तरह गोपनीय रहेगा

नेपाल प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि परिवारों से लिया गया यह डेटा पूरी तरह गोपनीय रखा जाएगा और इसका इस्तेमाल केवल लापता व्यक्तियों के शवों की पहचान के लिए ही किया जाएगा, इसे किसी अन्य उद्देश्य के लिए संग्रहीत या इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।
गौरतलब है कि पिछले महीने आई इन भीषण बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं में नेपाल में सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं, जिनमें आम नागरिकों के अलावा नेपाली सेना, पुलिस और सरकारी कर्मचारी भी शामिल हैं। ऐसे में डीएनए टेस्ट की यह पहल पहचान प्रक्रिया को तेज करने में अहम भूमिका निभा सकती है।

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