जेल में बंदियों को सिखाए तनाव से निपटने के तरीके:डूंगरपुर मेडिकल कॉलेज में आत्महत्या रोकथाम को लेकर जागरूकता अभियान

जेल में बंदियों को सिखाए तनाव से निपटने के तरीके:डूंगरपुर मेडिकल कॉलेज में आत्महत्या रोकथाम को लेकर जागरूकता अभियान

डूंगरपुर में सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल का मनोरोग विभाग सितंबर को राष्ट्रीय आत्महत्या रोकथाम जागरूकता माह के रूप में मना रहा है। अभियान के तहत बुधवार को मनोरोग विभाग की टीम जिला कारागृह पहुंची और बंदियों को तनाव से निपटने, मानसिक स्वास्थ्य बेहतर रखने और मनोवैज्ञानिक तरीकों से परेशानियों का सामना करने के बारे में जानकारी दी। सह प्राचार्य एवं मनोरोग विभागाध्यक्ष डॉ. भाग्यश्री गरासिया, एनसीडी काउंसलर बृजमोहन और नर्सिंग ऑफिसर पुष्पेन्द्र शेत ने बंदियों से संवाद किया। टीम ने मानसिक तनाव के दौरान सकारात्मक तरीके अपनाने और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद लेने के महत्व के बारे में बताया। 10 सितंबर को विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस मनोरोग विभाग की ओर से 10 सितंबर को विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर आम लोगों को मानसिक स्वास्थ्य और आत्महत्या रोकथाम के प्रति जागरूक करने के लिए कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। अभियान का उद्देश्य आत्महत्या से जुड़े सामाजिक कलंक और चुप्पी को खत्म करना है। साथ ही लोगों को मानसिक परेशानियों के बारे में खुलकर बात करने और समय पर मदद लेने के लिए प्रेरित किया जाएगा। मेडिकल छात्रों को बताए जाएंगे चेतावनी संकेत विभाग की ओर से 11 सितंबर को मेडिकल छात्रों के लिए विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसमें छात्रों को तनाव सहनशीलता, आत्महत्या से जुड़े चेतावनी संकेत, रोकथाम, उपचार और काउंसलिंग के बारे में जानकारी दी जाएगी। कार्यक्रम के जरिए भविष्य के चिकित्सकों को मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को समझने और जरूरतमंदों की मदद करने के लिए तैयार किया जाएगा। रोजाना 3 से 5 मरीज पहुंच रहे अस्पताल मनोरोग विभाग के अनुसार अस्पताल में रोजाना औसतन 3 से 5 मरीज मानसिक स्वास्थ्य जांच और इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें 15 से 60 वर्ष तक के महिला-पुरुष शामिल हैं। गंभीर मरीजों को जरूरत के अनुसार भर्ती कर विशेष उपचार दिया जा रहा है। कीटामाइन इन्फ्यूजन थेरेपी भी दी जा रही विभाग के अनुसार अब तक 25 मरीजों को कीटामाइन इन्फ्यूजन थेरेपी दी जा चुकी है। वहीं, 10 मरीजों को भी यह थेरेपी दी गई है। विभाग ने मानसिक परेशानी या तनाव की स्थिति में समस्या को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर डॉक्टर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करने की अपील की है।

​ 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *