सरकारी स्कूल में बारिश में छत से टपकता है पानी:जमुई में जर्जर दीवारों के बीच 4 कमरों में पढ़ते हैं 260 बच्चे

सरकारी स्कूल में बारिश में छत से टपकता है पानी:जमुई में जर्जर दीवारों के बीच 4 कमरों में पढ़ते हैं 260 बच्चे

जमुई के खैरा प्रखंड में उत्क्रमित मध्य विद्यालय जोगाझींगोय की हालत खराब है। यहां सरकारी स्कूलों में बेहतर शिक्षा और सुरक्षित माहौल के दावों पर सवाल उठते हैं। स्कूल की बिल्डिंग पुरानी हो चुकी है और बारिश में छत टपकती है। यहां गांधी और भगत सिंह के नाम पर कक्षाएं चलती हैं, लेकिन बच्चों की पढ़ाई में दिक्कत आ रही है। स्कूल की छत से पानी गिरता है और प्लास्टर झड़ता रहता है। इससे हर समय हादसे का डर बना रहता है। पुरानी दीवारें और कमजोर भवन बच्चों की सुरक्षा के लिए खतरा बने हुए हैं। इस स्कूल में कक्षा 1 से 8 तक करीब 260 बच्चे पढ़ते हैं। इनमें से लगभग 80 प्रतिशत बच्चे रोज स्कूल आते हैं। इतनी बड़ी संख्या में बच्चों की पढ़ाई सिर्फ चार कमरों में चल रही है। स्कूल से जुड़ी तस्वीरें देखिए…. बच्चों की सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता – हेडमास्टर बारिश के दिनों में दो कमरों की छत से पानी टपकने लगता है। ऐसे में शिक्षकों को छोटे बच्चों को पुरानी छत और कमजोर दीवारों के नीचे पढ़ाने में चिंता होती है। आठ कक्षाओं के लिए चार कमरे होने से कई बार दो कक्षाओं के बच्चों को एक ही कमरे में बैठाना पड़ता है। प्रधानाध्यापक श्याम सुंदर पांडेय ने बताया, ‘हमारे स्कूल में 260 बच्चे और आठ शिक्षक हैं, लेकिन कमरे सिर्फ चार हैं। बच्चों की सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता है। 2 अलग-अलग क्लास के बच्चों की एक साथ पढ़ाई बारिश होते ही छत टपकने लगती है और कमरों में पानी भर जाता है। मजबूरी में एक कक्षा के बच्चों को दूसरी कक्षा में भेजना पड़ता है।’ उन्होंने विभाग से जल्द स्कूल भवन की समस्या दूर करने की अपील की। शिक्षिका सीमा कुमारी ने बताया कि स्कूल के चारों कमरों की स्थिति ठीक नहीं है। कमरों की कमी के कारण दो कक्षाओं के बच्चों को एक साथ पढ़ाना पड़ता है। बारिश में छत से पानी टपकने पर अभिभावक फोन कर बच्चों को स्कूल नहीं भेजने की बात कहते हैं। शिक्षकों की ओर से उन्हें समझाकर बच्चों को स्कूल भेजने का आग्रह किया जाता है। महापुरुषों के नाम पर रखे गए क्लास के नाम लेकिन बारिश तेज होने पर सभी बच्चों को सुरक्षित कमरे में बैठाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को डर रहता है कि कहीं छत का मलवा या कोई हिस्सा गिरकर हादसा न हो जाए। बदहाल भवन के बीच स्कूल की एक पहल बच्चों को महापुरुषों से जोड़ रही है। यहां कक्षाओं के नाम महात्मा गांधी, भगत सिंह, सुभाष चंद्र बोस और रानी लक्ष्मीबाई जैसे महापुरुषों के नाम पर रखे गए हैं। इससे बच्चों को उनके जीवन और योगदान की जानकारी भी मिलती है। प्रधानाध्यापक के अनुसार, कक्षा बुलाने में भी इन नामों का इस्तेमाल होता है, जिससे बच्चों में महापुरुषों के प्रति जिज्ञासा बढ़ती है। अब जरूरत है कि संबंधित विभाग स्कूल भवन का निरीक्षण कर उसकी स्थिति का आकलन करे। मरम्मत संभव हो तो तत्काल जीर्णोद्धार कराया जाए और भवन ज्यादा जर्जर होने पर नए भवन की व्यवस्था की जाए, ताकि बच्चों की पढ़ाई डर के साये में नहीं, सुरक्षित माहौल में हो सके। जमुई के खैरा प्रखंड में उत्क्रमित मध्य विद्यालय जोगाझींगोय की हालत खराब है। यहां सरकारी स्कूलों में बेहतर शिक्षा और सुरक्षित माहौल के दावों पर सवाल उठते हैं। स्कूल की बिल्डिंग पुरानी हो चुकी है और बारिश में छत टपकती है। यहां गांधी और भगत सिंह के नाम पर कक्षाएं चलती हैं, लेकिन बच्चों की पढ़ाई में दिक्कत आ रही है। स्कूल की छत से पानी गिरता है और प्लास्टर झड़ता रहता है। इससे हर समय हादसे का डर बना रहता है। पुरानी दीवारें और कमजोर भवन बच्चों की सुरक्षा के लिए खतरा बने हुए हैं। इस स्कूल में कक्षा 1 से 8 तक करीब 260 बच्चे पढ़ते हैं। इनमें से लगभग 80 प्रतिशत बच्चे रोज स्कूल आते हैं। इतनी बड़ी संख्या में बच्चों की पढ़ाई सिर्फ चार कमरों में चल रही है। स्कूल से जुड़ी तस्वीरें देखिए…. बच्चों की सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता – हेडमास्टर बारिश के दिनों में दो कमरों की छत से पानी टपकने लगता है। ऐसे में शिक्षकों को छोटे बच्चों को पुरानी छत और कमजोर दीवारों के नीचे पढ़ाने में चिंता होती है। आठ कक्षाओं के लिए चार कमरे होने से कई बार दो कक्षाओं के बच्चों को एक ही कमरे में बैठाना पड़ता है। प्रधानाध्यापक श्याम सुंदर पांडेय ने बताया, ‘हमारे स्कूल में 260 बच्चे और आठ शिक्षक हैं, लेकिन कमरे सिर्फ चार हैं। बच्चों की सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता है। 2 अलग-अलग क्लास के बच्चों की एक साथ पढ़ाई बारिश होते ही छत टपकने लगती है और कमरों में पानी भर जाता है। मजबूरी में एक कक्षा के बच्चों को दूसरी कक्षा में भेजना पड़ता है।’ उन्होंने विभाग से जल्द स्कूल भवन की समस्या दूर करने की अपील की। शिक्षिका सीमा कुमारी ने बताया कि स्कूल के चारों कमरों की स्थिति ठीक नहीं है। कमरों की कमी के कारण दो कक्षाओं के बच्चों को एक साथ पढ़ाना पड़ता है। बारिश में छत से पानी टपकने पर अभिभावक फोन कर बच्चों को स्कूल नहीं भेजने की बात कहते हैं। शिक्षकों की ओर से उन्हें समझाकर बच्चों को स्कूल भेजने का आग्रह किया जाता है। महापुरुषों के नाम पर रखे गए क्लास के नाम लेकिन बारिश तेज होने पर सभी बच्चों को सुरक्षित कमरे में बैठाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को डर रहता है कि कहीं छत का मलवा या कोई हिस्सा गिरकर हादसा न हो जाए। बदहाल भवन के बीच स्कूल की एक पहल बच्चों को महापुरुषों से जोड़ रही है। यहां कक्षाओं के नाम महात्मा गांधी, भगत सिंह, सुभाष चंद्र बोस और रानी लक्ष्मीबाई जैसे महापुरुषों के नाम पर रखे गए हैं। इससे बच्चों को उनके जीवन और योगदान की जानकारी भी मिलती है। प्रधानाध्यापक के अनुसार, कक्षा बुलाने में भी इन नामों का इस्तेमाल होता है, जिससे बच्चों में महापुरुषों के प्रति जिज्ञासा बढ़ती है। अब जरूरत है कि संबंधित विभाग स्कूल भवन का निरीक्षण कर उसकी स्थिति का आकलन करे। मरम्मत संभव हो तो तत्काल जीर्णोद्धार कराया जाए और भवन ज्यादा जर्जर होने पर नए भवन की व्यवस्था की जाए, ताकि बच्चों की पढ़ाई डर के साये में नहीं, सुरक्षित माहौल में हो सके।  

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