1984 में अमृतसर में हुए सैन्य ऑपरेशन के दौरान अपनी दुकानें गंवाने वाले 133 दुकानदारों के परिवारों को करीब चार दशक बाद बड़ी राहत मिली है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने इन प्रभावित दुकानदारों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए अमृतसर की माल मंडी में 133 दुकानों को अलॉट करने का आदेश दिया है। मामले की पैरवी कर रहे एडवोकेट सौरव खुराना ने बताया कि हाईकोर्ट का यह महत्वपूर्ण फैसला आया है। उन्होंने कहा कि 1984 में सैन्य ऑपरेशन के दौरान इन दुकानदारों की दुकानें तबाह हो गई थीं। इसके बाद से ही प्रभावित परिवार अपनी दुकानों के बदले पुनर्वास और दुकानें दिए जाने की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे थे। हमला हुआ तो नंगे पैर दुकानें छोड़कर भागे पीड़ित परिवारों ने उस समय का मंजर याद करते हुए बताया कि सैन्य ऑपरेशन के दौरान हालात बिगड़ने पर वे और उनके पिता नंगे पैर दुकानें खुली छोड़कर वहां से भाग गए थे। करीब एक सप्ताह बाद जब वापस लौटे तो दुकानें पूरी तरह ढह चुकी थीं। दुकानों के साथ उनका कारोबार और परिवारों की रोजी-रोटी का साधन भी खत्म हो गया था। 120 मूल दुकानदार अब दुनिया में नहीं इस मामले में सबसे भावुक पहलू यह है कि 133 मूल दुकानदारों में से करीब 120 का निधन हो चुका है। यानी जिन लोगों ने 1984 में अपनी दुकानें उजड़ते देखीं और दशकों तक उन्हें वापस पाने की लड़ाई लड़ी, उनमें से अधिकांश अब इस दुनिया में नहीं हैं। हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब उनके परिवारों को दुकानें मिलने का रास्ता साफ हुआ है। करीब चार दशक से लंबित इस मामले में हाईकोर्ट का फैसला प्रभावित परिवारों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। इससे उन्हें न केवल संपत्ति से जुड़ा अधिकार मिलने की उम्मीद है, बल्कि अपने परिवार के पुराने कारोबार और आजीविका से दोबारा जुड़ने का अवसर भी मिलेगा।

