झारखंड सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू का रविवार 6 सितंबर को निधन हो गया। उनके निधन से झारखंड की राजनीति में दुख का माहौल है। झारखंड मुक्ति मोर्चा के वरिष्ठ नेता सुदिव्य कुमार सोनू के जाने से गिरिडीह समेत पूरे झारखंड में शोक है। कोडरमा जिले में भी उनके निधन पर दुख जताया गया। दरअसल, सुदिव्य सोनू का कोडरमा से गहरा जुड़ाव था। उनका रिश्ता सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं था। उनके जीवन के शुरुआती साल भी इसी जिले से जुड़े रहे। उनका बचपन झुमरीतिलैया में बीता। उन्होंने शहर के सीएच उच्च विद्यालय से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की थी। साल 1980 से 83 के बीच सुदिव्य सोनू अपने परिवार के साथ झुमरीतिलैया में रहते थे। उस समय उनके पिता शंभू नाथ कोडरमा के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग में कार्यपालक अभियंता थे। वे विभाग के सरकारी आवास में रहते थे। आज उसी परिसर में रहने वाले विजय कुमार बताते हैं कि सुदिव्य सोनू 2024 में दूसरी बार गिरिडीह से विधायक चुने गए थे। एक दिन रांची से लौटते समय वे अचानक यहां आ गए। उस समय वे यहां लंबे समय से गार्ड के रूप में काम कर रहे पंचम पासवान से मिले। पंचम का अब निधन हो चुका है। विजय ने बताया कि जब वे पंचम से मिले तो उनके पहले शब्द थे, ‘मुझे पहचाना, मैं आपका सोनुवा, बचपन में आपकी गोद में खेला था।’ इतना कहते ही वे पंचम के गले लग गए। यह घटना बताती है कि मंत्री सुदिव्य सोनू अपने पुराने संबंधों को कितनी अहमियत देते थे। मोहल्ले में काफी मित्र हुआ करते थे इधर, 80 के दौर में जब सुदिव्य सोनू झुमरीतिलैया के सीएच स्कूल में पढ़ाई करते थे, उस समय उनके मोहल्ले में काफी मित्र हुआ करते थे। उनमें से एक हैं विनोद विश्वकर्मा। विनोद विश्वकर्मा ने पुराने दिनों को याद करते हुए बताया कि हमलोगों के कुछ मित्रों की एक समूह थी जो शाम को एक साथ खेला करते थे। उसमें से एक सुदिव्य भी हुआ करते थे। विनोद अपनी पुरानी बातों को याद करते हुए भावुक भी हो गए। उन्होंने बताया कि सोनू काफी साधारण और कुशल छात्र भी थे। उन्होंने बताया कि चूंकि उस दौर में दूरभाष का साधन नहीं होने के कारण 83 में जब सुदिव्य मैट्रिक की परीक्षा देने के बाद यहां से चले गाए तो उनसे संपर्क टूट गया था। झारखंड सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू का रविवार 6 सितंबर को निधन हो गया। उनके निधन से झारखंड की राजनीति में दुख का माहौल है। झारखंड मुक्ति मोर्चा के वरिष्ठ नेता सुदिव्य कुमार सोनू के जाने से गिरिडीह समेत पूरे झारखंड में शोक है। कोडरमा जिले में भी उनके निधन पर दुख जताया गया। दरअसल, सुदिव्य सोनू का कोडरमा से गहरा जुड़ाव था। उनका रिश्ता सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं था। उनके जीवन के शुरुआती साल भी इसी जिले से जुड़े रहे। उनका बचपन झुमरीतिलैया में बीता। उन्होंने शहर के सीएच उच्च विद्यालय से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की थी। साल 1980 से 83 के बीच सुदिव्य सोनू अपने परिवार के साथ झुमरीतिलैया में रहते थे। उस समय उनके पिता शंभू नाथ कोडरमा के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग में कार्यपालक अभियंता थे। वे विभाग के सरकारी आवास में रहते थे। आज उसी परिसर में रहने वाले विजय कुमार बताते हैं कि सुदिव्य सोनू 2024 में दूसरी बार गिरिडीह से विधायक चुने गए थे। एक दिन रांची से लौटते समय वे अचानक यहां आ गए। उस समय वे यहां लंबे समय से गार्ड के रूप में काम कर रहे पंचम पासवान से मिले। पंचम का अब निधन हो चुका है। विजय ने बताया कि जब वे पंचम से मिले तो उनके पहले शब्द थे, ‘मुझे पहचाना, मैं आपका सोनुवा, बचपन में आपकी गोद में खेला था।’ इतना कहते ही वे पंचम के गले लग गए। यह घटना बताती है कि मंत्री सुदिव्य सोनू अपने पुराने संबंधों को कितनी अहमियत देते थे। मोहल्ले में काफी मित्र हुआ करते थे इधर, 80 के दौर में जब सुदिव्य सोनू झुमरीतिलैया के सीएच स्कूल में पढ़ाई करते थे, उस समय उनके मोहल्ले में काफी मित्र हुआ करते थे। उनमें से एक हैं विनोद विश्वकर्मा। विनोद विश्वकर्मा ने पुराने दिनों को याद करते हुए बताया कि हमलोगों के कुछ मित्रों की एक समूह थी जो शाम को एक साथ खेला करते थे। उसमें से एक सुदिव्य भी हुआ करते थे। विनोद अपनी पुरानी बातों को याद करते हुए भावुक भी हो गए। उन्होंने बताया कि सोनू काफी साधारण और कुशल छात्र भी थे। उन्होंने बताया कि चूंकि उस दौर में दूरभाष का साधन नहीं होने के कारण 83 में जब सुदिव्य मैट्रिक की परीक्षा देने के बाद यहां से चले गाए तो उनसे संपर्क टूट गया था।

