बिहार में बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है। गंगा और उसकी सहायक नदियों के उफान ने राज्य के कई जिलों में जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। राज्या के 11 जिलों के 50 प्रखंडों की 201 ग्राम पंचायतों में करीब 10.26 लाख लोग बाढ़ की चपेट में हैं, जबकि राजधानी पटना में गंगा और पुनपुन कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। हालांकि, सोमवार 7 सितंबर को जारी आकंड़ों के मुताबिक, पटना के दीघा घाट और गांधी घाट पर गंगा नदी के जलस्तर में 16 सेमी की गिरावट देखने को मिली है। फिर भी जलस्तर खतरे के निशान से उपर बना हुआ है। बढ़ते जलस्तर का असर अब सिर्फ दियारा और निचले इलाकों तक सीमित नहीं है, बल्कि पटना के श्मशान घाटों पर भी संकट खड़ा हो गया है, जहां अंतिम संस्कार के लिए जगह कम पड़ने लगी है। कई गांवों में घरों तक पानी पहुंच चुका है और प्रभावित परिवार नाव के सहारे सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं। प्रशासन की ओर से राहत और बचाव कार्य तेज करने के साथ SDRF और NDRF की टीमें भी तैनात की गई हैं। पटना सिटी के घाटों की तस्वीर… गंगा समेत कई प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बिहार में गंगा समेत कई प्रमुख नदियां भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। गंडक नदी डुमरिया घाट और हाजीपुर में खतरे के निशान को पार कर चुकी है। वहीं, कोसी नदी बलतारा और कुर्सेला में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। बूढ़ी गंडक नदी खगड़िया में खतरे के निशान से ऊपर है। गंगा नदी दीघा, हाथीदह, भागलपुर, कहलगांव, बक्सर और मुंगेर में भी खतरे के स्तर को पार कर चुकी है। इसके अलावा पुनपुन नदी श्रीपालपुर और घाघरा नदी दरौली में भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। कई नदियों के बढ़ते जलस्तर ने राज्य के निचले और दियारा क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
गांधी घाट पर गंगा खतरे के निशान से 1.38 मीटर ऊपर, आज जलस्तर घटा पटना में गंगा का बढ़ता जलस्तर सबसे बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है। 6 सितंबर की सुबह जारी जल संसाधन विभाग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, गांधी घाट पर गंगा नदी का जलस्तर 51.99 मीटर दर्ज किया गया था। यहां खतरे का निशान 50.45 मीटर है। हालांकि, सोमवार 7 सितंबर को जारी आकंड़ों के मुताबिक, पटना के दीघा घाट और गांधी घाट पर गंगा नदी के जलस्तर में 16 सेमी की गिरावट देखने को मिली है। इस तरह गांधी घाट पर गंगा खतरे के निशान से 1.38 मीटर ऊपर बह रही है। वहीं, बाढ़ की स्थिति को देखते हुए पटना के तटवर्ती और निचले इलाकों में सतर्कता बरती जा रही है। दीघा घाट पर जलस्तर में गिरावट, 21 सेमी नीचे आया पटना के दीघा घाट पर भी गंगा खतरे के निशान से ऊपर बनी हुई है। हालांकि, 7 सितंबर को जलस्तर में 21 सेमी की गिरावट दर्ज की गई है। इससे पहले 6 सितंबर की सुबह यहां गंगा का जलस्तर 53.76 मीटर दर्ज किया गया, जबकि खतरे का निशान 52.00 मीटर है। इस तरह दीघा घाट पर गंगा खतरे के निशान से 1.76 मीटर ऊपर बह रही थी। राहत की बात यह है कि यहां जलस्तर में गिरावट का रुझान दर्ज किया गया। गंगा के बढ़े हुए जलस्तर के कारण दीघा समेत पटना के तटवर्ती इलाकों, निचले क्षेत्रों और दियारा इलाकों में बाढ़ का दबाव बना हुआ है। मनेर में भी खतरे के निशान से ऊपर गंगा पटना जिले के मनेर में भी गंगा नदी खतरे के निशान को पार कर चुकी है। हालांकि, 7 सितंबर को जलस्तर में 21 सेमी की गिरावट दर्ज की गई है। इससे पहले 6 सितंबर की सुबह यहां गंगा का जलस्तर 60.42 मीटर दर्ज किया गया था, जबकि खतरे का निशान 60.32 मीटर है। यानी मनेर में गंगा के जलस्तर में गिरावट आई है। फिर भी नदी किनारे के निचले इलाकों पर विशेष नजर रखी जा रही है। श्रीपालपुर में पुनपुन खतरे के निशान से 2.82 मीटर ऊपर पटना के श्रीपालपुर में पुनपुन नदी का बढ़ता जलस्तर भी चिंता का विषय बना हुआ है। 6 संतिबर को पुनपुन नदी का जलस्तर 53.42 मीटर दर्ज किया गया, जबकि खतरे का निशान 50.60 मीटर है। इस तरह पुनपुन नदी खतरे के निशान से 2.82 मीटर ऊपर बह रही थी। यहां भी जलस्तर में बढ़ोतरी का रुझान दर्ज किया गया है। पुनपुन नदी के किनारे बसे गांवों और निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। हाथीदह में गंगा खतरे के निशान से 2.00 मीटर ऊपर हाथीदह में भी गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से काफी ऊपर बना हुआ है। 6 सितंबर की सुबह जारी रिपोर्ट के अनुसार, यहां गंगा का जलस्तर 50.57 मीटर दर्ज किया गया, जबकि खतरे का निशान 48.60 मीटर है। वहीं, 7 सितंबर को इसमें 3 सेमी की बढ़ोत्तरी हुई है। यानी हाथीदह में गंगा खतरे के निशान से 2.00 मीटर ऊपर बह रही है। गांधी घाट और पंडारक में पहले ही टूट चुके हैं पुराने रिकॉर्ड बाढ़ की मौजूदा स्थिति के दौरान पटना के गांधी घाट और पंडारक में गंगा ने पिछले उच्चतम जलस्तर के रिकॉर्ड भी पार किए हैं। पहले जारी रिपोर्ट के मुताबिक, गंगा ने 21 अगस्त 2016 को दर्ज 50.52 मीटर के पिछले उच्चतम जलस्तर को पार किया था। वहीं, पटना जिले के पंडारक में भी गंगा ने 16 अगस्त 2021 को दर्ज 43.73 मीटर के पिछले उच्चतम जलस्तर को पार करते हुए 43.78 मीटर का स्तर दर्ज किया था। हालांकि, 7 सितंबर को इसमें 16 सेमी की गिरावट दर्ज की गई है। गंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर ने नदी किनारे बसे गांवों और निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ा दिया है। बिहार के 11 जिलों के 50 प्रखंडों में बाढ़ का असर नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी के कारण बिहार के 11 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं। इनमें पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार और अरवल शामिल हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार इन 11 जिलों के 50 प्रखंडों की 201 ग्राम पंचायतों में बाढ़ का असर है। इन प्रभावित क्षेत्रों में करीब 10.26 लाख लोग बाढ़ की चपेट में हैं। बाढ़ के कारण ग्रामीण इलाकों में आवागमन, खाद्य सामग्री की उपलब्धता और सुरक्षित स्थानों तक पहुंचने जैसी समस्याएं बढ़ गई हैं। प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है। दियारा के गांवों में घुसा पानी, नाव से सुरक्षित स्थानों पर पहुंच रहे लोग फुलझरिया ने बताया कि उनका घर दियारा क्षेत्र में है और पूरे गांव में बाढ़ का पानी फैल गया है। घर और आंगन में पानी भर जाने के बाद उन्हें नाव के सहारे वहां से निकलना पड़ा। उन्होंने बताया कि खाने-पीने का सामान और अनाज तक पानी में बह गया है। किसी तरह जरूरी सामान निकालकर वह इस तरफ आई हैं और अब किराये पर रहने की मजबूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि अब तक सरकार की ओर से कोई सुविधा या मदद नहीं मिली है। घर में पानी घुसने से भोजन और पढ़ाई पर संकट सबिता देवी ने बताया कि उनके पूरे घर में बाढ़ का पानी घुस गया है, जिससे खाना-पीना तक मुश्किल हो गया है। वह किसी तरह बच्चों के साथ सुरक्षित स्थान पर पहुंची हैं और अब किराये के कमरे में रहने की व्यवस्था की है। उन्होंने कहा कि उनके छोटे-छोटे बच्चे हैं और बाढ़ के कारण उनकी पढ़ाई भी छूट गई है। सबिता देवी ने कहा कि प्रभावित परिवारों के लिए सरकार की ओर से अभी तक कोई समुचित व्यवस्था नहीं की गई है। श्मशान घाट डूबा, सड़क किनारे कर रहे अंतिम संस्कार जय प्रकाश तिवारी ने बताया, ‘गंगा का जलस्तर बढ़ने से अंतिम संस्कार करने वाले घाट पर परेशानी काफी बढ़ गई है। पानी बढ़ने के कारण अब पर्याप्त जगह नहीं बची है।’ उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा को तो झेलना ही पड़ेगा, लेकिन सरकार को यहां आवश्यक व्यवस्था करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि जलस्तर में थोड़ी और वृद्धि हुई तो लोगों को सड़क पर अंतिम संस्कार करने की नौबत आ सकती है। ज्यादा शव आने पर अंतिम संस्कार कराना होगा मुश्किल सिद्धनाथ शर्मा ने बताया, ‘घाट किनारे अंतिम संस्कार करने के लिए अब जगह नहीं बची है और गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। इससे लोगों को काफी परेशानी हो रही है। उन्होंने कहा कि यदि एक साथ अधिक शव आए तो यहां अंतिम संस्कार कराना संभव नहीं होगा। उन्होंने सरकार से घाट पर जल्द आवश्यक व्यवस्था करने की मांग की। SDRF की 27 और NDRF की 7 टीमें तैनात बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए राहत और बचाव कार्यों के लिए राज्य में एसडीआरएफ की 27 और एनडीआरएफ की 7 टीमें विभिन्न जिलों में तैनात की गई हैं। यह टीमें जरूरत पड़ने पर बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने, राहत कार्यों में सहयोग करने और अन्य आपात स्थितियों से निपटने के लिए तैयार हैं। जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग प्रभावित इलाकों की स्थिति की लगातार निगरानी कर रहे हैं। सितंबर में सामान्य से 69 प्रतिशत अधिक बारिश बाढ़ दैनिक प्रतिवेदन के मुताबिक, सितंबर महीने में अब तक बिहार में 60.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य से 69 प्रतिशत अधिक है। हालांकि, पूरे मानसून की स्थिति इससे अलग रही है। 1 जून से 5 सितंबर तक राज्य में कुल 582.3 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है, जो सामान्य से 27 प्रतिशत कम है। जून, जुलाई और अगस्त के दौरान भी राज्य में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई थी। बिहार में बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है। गंगा और उसकी सहायक नदियों के उफान ने राज्य के कई जिलों में जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। राज्या के 11 जिलों के 50 प्रखंडों की 201 ग्राम पंचायतों में करीब 10.26 लाख लोग बाढ़ की चपेट में हैं, जबकि राजधानी पटना में गंगा और पुनपुन कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। हालांकि, सोमवार 7 सितंबर को जारी आकंड़ों के मुताबिक, पटना के दीघा घाट और गांधी घाट पर गंगा नदी के जलस्तर में 16 सेमी की गिरावट देखने को मिली है। फिर भी जलस्तर खतरे के निशान से उपर बना हुआ है। बढ़ते जलस्तर का असर अब सिर्फ दियारा और निचले इलाकों तक सीमित नहीं है, बल्कि पटना के श्मशान घाटों पर भी संकट खड़ा हो गया है, जहां अंतिम संस्कार के लिए जगह कम पड़ने लगी है। कई गांवों में घरों तक पानी पहुंच चुका है और प्रभावित परिवार नाव के सहारे सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं। प्रशासन की ओर से राहत और बचाव कार्य तेज करने के साथ SDRF और NDRF की टीमें भी तैनात की गई हैं। पटना सिटी के घाटों की तस्वीर… गंगा समेत कई प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बिहार में गंगा समेत कई प्रमुख नदियां भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। गंडक नदी डुमरिया घाट और हाजीपुर में खतरे के निशान को पार कर चुकी है। वहीं, कोसी नदी बलतारा और कुर्सेला में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। बूढ़ी गंडक नदी खगड़िया में खतरे के निशान से ऊपर है। गंगा नदी दीघा, हाथीदह, भागलपुर, कहलगांव, बक्सर और मुंगेर में भी खतरे के स्तर को पार कर चुकी है। इसके अलावा पुनपुन नदी श्रीपालपुर और घाघरा नदी दरौली में भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। कई नदियों के बढ़ते जलस्तर ने राज्य के निचले और दियारा क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
गांधी घाट पर गंगा खतरे के निशान से 1.38 मीटर ऊपर, आज जलस्तर घटा पटना में गंगा का बढ़ता जलस्तर सबसे बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है। 6 सितंबर की सुबह जारी जल संसाधन विभाग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, गांधी घाट पर गंगा नदी का जलस्तर 51.99 मीटर दर्ज किया गया था। यहां खतरे का निशान 50.45 मीटर है। हालांकि, सोमवार 7 सितंबर को जारी आकंड़ों के मुताबिक, पटना के दीघा घाट और गांधी घाट पर गंगा नदी के जलस्तर में 16 सेमी की गिरावट देखने को मिली है। इस तरह गांधी घाट पर गंगा खतरे के निशान से 1.38 मीटर ऊपर बह रही है। वहीं, बाढ़ की स्थिति को देखते हुए पटना के तटवर्ती और निचले इलाकों में सतर्कता बरती जा रही है। दीघा घाट पर जलस्तर में गिरावट, 21 सेमी नीचे आया पटना के दीघा घाट पर भी गंगा खतरे के निशान से ऊपर बनी हुई है। हालांकि, 7 सितंबर को जलस्तर में 21 सेमी की गिरावट दर्ज की गई है। इससे पहले 6 सितंबर की सुबह यहां गंगा का जलस्तर 53.76 मीटर दर्ज किया गया, जबकि खतरे का निशान 52.00 मीटर है। इस तरह दीघा घाट पर गंगा खतरे के निशान से 1.76 मीटर ऊपर बह रही थी। राहत की बात यह है कि यहां जलस्तर में गिरावट का रुझान दर्ज किया गया। गंगा के बढ़े हुए जलस्तर के कारण दीघा समेत पटना के तटवर्ती इलाकों, निचले क्षेत्रों और दियारा इलाकों में बाढ़ का दबाव बना हुआ है। मनेर में भी खतरे के निशान से ऊपर गंगा पटना जिले के मनेर में भी गंगा नदी खतरे के निशान को पार कर चुकी है। हालांकि, 7 सितंबर को जलस्तर में 21 सेमी की गिरावट दर्ज की गई है। इससे पहले 6 सितंबर की सुबह यहां गंगा का जलस्तर 60.42 मीटर दर्ज किया गया था, जबकि खतरे का निशान 60.32 मीटर है। यानी मनेर में गंगा के जलस्तर में गिरावट आई है। फिर भी नदी किनारे के निचले इलाकों पर विशेष नजर रखी जा रही है। श्रीपालपुर में पुनपुन खतरे के निशान से 2.82 मीटर ऊपर पटना के श्रीपालपुर में पुनपुन नदी का बढ़ता जलस्तर भी चिंता का विषय बना हुआ है। 6 संतिबर को पुनपुन नदी का जलस्तर 53.42 मीटर दर्ज किया गया, जबकि खतरे का निशान 50.60 मीटर है। इस तरह पुनपुन नदी खतरे के निशान से 2.82 मीटर ऊपर बह रही थी। यहां भी जलस्तर में बढ़ोतरी का रुझान दर्ज किया गया है। पुनपुन नदी के किनारे बसे गांवों और निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। हाथीदह में गंगा खतरे के निशान से 2.00 मीटर ऊपर हाथीदह में भी गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से काफी ऊपर बना हुआ है। 6 सितंबर की सुबह जारी रिपोर्ट के अनुसार, यहां गंगा का जलस्तर 50.57 मीटर दर्ज किया गया, जबकि खतरे का निशान 48.60 मीटर है। वहीं, 7 सितंबर को इसमें 3 सेमी की बढ़ोत्तरी हुई है। यानी हाथीदह में गंगा खतरे के निशान से 2.00 मीटर ऊपर बह रही है। गांधी घाट और पंडारक में पहले ही टूट चुके हैं पुराने रिकॉर्ड बाढ़ की मौजूदा स्थिति के दौरान पटना के गांधी घाट और पंडारक में गंगा ने पिछले उच्चतम जलस्तर के रिकॉर्ड भी पार किए हैं। पहले जारी रिपोर्ट के मुताबिक, गंगा ने 21 अगस्त 2016 को दर्ज 50.52 मीटर के पिछले उच्चतम जलस्तर को पार किया था। वहीं, पटना जिले के पंडारक में भी गंगा ने 16 अगस्त 2021 को दर्ज 43.73 मीटर के पिछले उच्चतम जलस्तर को पार करते हुए 43.78 मीटर का स्तर दर्ज किया था। हालांकि, 7 सितंबर को इसमें 16 सेमी की गिरावट दर्ज की गई है। गंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर ने नदी किनारे बसे गांवों और निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ा दिया है। बिहार के 11 जिलों के 50 प्रखंडों में बाढ़ का असर नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी के कारण बिहार के 11 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं। इनमें पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार और अरवल शामिल हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार इन 11 जिलों के 50 प्रखंडों की 201 ग्राम पंचायतों में बाढ़ का असर है। इन प्रभावित क्षेत्रों में करीब 10.26 लाख लोग बाढ़ की चपेट में हैं। बाढ़ के कारण ग्रामीण इलाकों में आवागमन, खाद्य सामग्री की उपलब्धता और सुरक्षित स्थानों तक पहुंचने जैसी समस्याएं बढ़ गई हैं। प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है। दियारा के गांवों में घुसा पानी, नाव से सुरक्षित स्थानों पर पहुंच रहे लोग फुलझरिया ने बताया कि उनका घर दियारा क्षेत्र में है और पूरे गांव में बाढ़ का पानी फैल गया है। घर और आंगन में पानी भर जाने के बाद उन्हें नाव के सहारे वहां से निकलना पड़ा। उन्होंने बताया कि खाने-पीने का सामान और अनाज तक पानी में बह गया है। किसी तरह जरूरी सामान निकालकर वह इस तरफ आई हैं और अब किराये पर रहने की मजबूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि अब तक सरकार की ओर से कोई सुविधा या मदद नहीं मिली है। घर में पानी घुसने से भोजन और पढ़ाई पर संकट सबिता देवी ने बताया कि उनके पूरे घर में बाढ़ का पानी घुस गया है, जिससे खाना-पीना तक मुश्किल हो गया है। वह किसी तरह बच्चों के साथ सुरक्षित स्थान पर पहुंची हैं और अब किराये के कमरे में रहने की व्यवस्था की है। उन्होंने कहा कि उनके छोटे-छोटे बच्चे हैं और बाढ़ के कारण उनकी पढ़ाई भी छूट गई है। सबिता देवी ने कहा कि प्रभावित परिवारों के लिए सरकार की ओर से अभी तक कोई समुचित व्यवस्था नहीं की गई है। श्मशान घाट डूबा, सड़क किनारे कर रहे अंतिम संस्कार जय प्रकाश तिवारी ने बताया, ‘गंगा का जलस्तर बढ़ने से अंतिम संस्कार करने वाले घाट पर परेशानी काफी बढ़ गई है। पानी बढ़ने के कारण अब पर्याप्त जगह नहीं बची है।’ उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा को तो झेलना ही पड़ेगा, लेकिन सरकार को यहां आवश्यक व्यवस्था करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि जलस्तर में थोड़ी और वृद्धि हुई तो लोगों को सड़क पर अंतिम संस्कार करने की नौबत आ सकती है। ज्यादा शव आने पर अंतिम संस्कार कराना होगा मुश्किल सिद्धनाथ शर्मा ने बताया, ‘घाट किनारे अंतिम संस्कार करने के लिए अब जगह नहीं बची है और गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। इससे लोगों को काफी परेशानी हो रही है। उन्होंने कहा कि यदि एक साथ अधिक शव आए तो यहां अंतिम संस्कार कराना संभव नहीं होगा। उन्होंने सरकार से घाट पर जल्द आवश्यक व्यवस्था करने की मांग की। SDRF की 27 और NDRF की 7 टीमें तैनात बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए राहत और बचाव कार्यों के लिए राज्य में एसडीआरएफ की 27 और एनडीआरएफ की 7 टीमें विभिन्न जिलों में तैनात की गई हैं। यह टीमें जरूरत पड़ने पर बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने, राहत कार्यों में सहयोग करने और अन्य आपात स्थितियों से निपटने के लिए तैयार हैं। जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग प्रभावित इलाकों की स्थिति की लगातार निगरानी कर रहे हैं। सितंबर में सामान्य से 69 प्रतिशत अधिक बारिश बाढ़ दैनिक प्रतिवेदन के मुताबिक, सितंबर महीने में अब तक बिहार में 60.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य से 69 प्रतिशत अधिक है। हालांकि, पूरे मानसून की स्थिति इससे अलग रही है। 1 जून से 5 सितंबर तक राज्य में कुल 582.3 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है, जो सामान्य से 27 प्रतिशत कम है। जून, जुलाई और अगस्त के दौरान भी राज्य में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई थी।

