अंबिकापुर के प्राइवेट हॉस्पिटल के संचालक डॉक्टर दंपती को धमकी देने और लाखों रुपये की गड़बड़ी की शिकायत पर पुलिस ने दो युवकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। हॉस्पिटल का संचालन आदिवासी दंपती करते हैं। मामला अजाक थाने में दर्ज किया गया है। महिला चिकित्सक ने आरोप लगाया है कि फार्मास्सिट और उसके साथी ने अभद्रता की और जातिगत गाली-गलौज करते हुए धमकी दी कि हॉस्पिटल चलाना है तो हर माह 5 लाख रुपये देने पड़ेंगे। शिकायत के बाद एफआईआर दर्ज नहीं करने पर सरगुजा बचाओ समिति ने एक दिवसीय धरना दिया था। जानकारी के मुताबिक, चोपड़ापारा स्थित डीएचटी केयर हॉस्पिटल की संचालिका दिव्या टोप्पो ने शिकायत दर्ज कराई है कि हॉस्पिटल में फार्मेसी चलाने वाले सुशील कुमार राय के द्वारा करीब 65 लाख रुपये की गड़बड़ी की गई है। अस्पताल संचालक डॉक्टर दंपती का कहना है कि दोनों को अस्पताल के बैंक खाते से पैसे निकालने या किसी तरह का लेन-देन करने की अनुमति नहीं थी। संचालक दंपती ने हिसाब मांगा तो उनके साथ जातिगत गाली-गलौच करते हुए दोनों ने उन्हें धमकी भी दी। फार्मेसी चलाने के लिए किया था अनुबंध संचालिका दिव्या टोप्पो ने मामले की शिकायत सरगुजा एसपी और सरगुजा आईजी से भी की थी। दिव्या टोप्पो ने शिकायत में बताया है कि सुशील कुमार राय ने करीब दो साल पहले हॉस्पिटल में फार्मेसी चलाने के लिए संपर्क किया था और अनुबंध किया गया था। बाद में सुशील कुमार राय हॉस्पिटल का काम भी देखने लगा और उसे आयुष्मान भारत का काम भी सौंप दिया गया। शिकायतकर्ता ने पुलिस को बैंक खाते का स्टेटमेंट और लेन-देन से जुड़े उपलब्ध दस्तावेज भी सौंपे हैं। चिकित्सक दंपती ने लगाया धमकाने का आरोप सरगुजा आईजी को दी गई शिकायत में अस्पताल संचालक डा. अशोक टोप्पो की पत्नी दीपिका टोप्पो ने आरोप लगाया है कि 3 जुलाई को गड़बड़ी को लेकर सुशील कुमार राय से पूछताछ की गई, तो उसने बदसलूकी की। इसके बाद सुशील कुमार राय और नवीन द्विवेदी ने उन्हें धमकी दी और कहा कि अगर हॉस्पिटल चलाना है तो हर महीने 5 लाख रुपए देने होंगे। डॉ. दीपिका टोप्पो ने नवीन द्विवेदी पर हॉस्पिटल का पदाधिकारी बनकर वसूली करने का भी आरोप लगाया है। अजाक पुलिस ने दर्ज की FIR मामले में एफआईआर दर्ज नहीं होने पर सरगुजा बचाओ समिति ने गुरुवार को गांधी चौक पर एक दिवसीय धरना दिया था। मामले में प्रदर्शन के बाद अजाक पुलिस ने धारा 296, 351(3), 3(5), एवं अनुसूचित जाति, जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 3 के तहत एफआईआर दर्ज किया है। आर्थिक अनियमितता के आरोपों की जांच की जा रही है।

