UP Politics: ‘जिन्होंने कभी नहीं चखा चुनावी हार का स्वाद’, राजा भैया, अखिलेश यादव समेत जानिए यूपी की सियासत के वो 9 चेहरे

UP Politics: ‘जिन्होंने कभी नहीं चखा चुनावी हार का स्वाद’, राजा भैया, अखिलेश यादव समेत जानिए यूपी की सियासत के वो 9 चेहरे

UP Politics: उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव (Uttar Pradesh Assembly Elections 2027) होने हैं। राज्य की सियासत में कई बड़े नेता आए और गए, लेकिन कुछ नेताओं के चुनावी रिकॉर्ड आज भी बेहद खास माने जाते हैं। किसी नेता ने लगातार एक ही सीट को अपना गढ़ बनाए रखा, तो किसी ने अलग-अलग सीटों से चुनाव लड़कर हर बार जीत दर्ज की। इस सूची में ऐसे 9 नेताओं का जिक्र है, जिनके चुनावी करियर में अब तक हार दर्ज नहीं हुई है।

फोटो सोर्स-Ai
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वरुण गांधी: लोकसभा के तीनों चुनाव जीते

बेबाक बयानों के लिए चर्चित वरुण गांधी ने 2009 में पीलीभीत से लोकसभा चुनाव जीतकर अपनी चुनावी राजनीति की शुरुआत की। उन्होंने 2009 में 2,81,501 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। इसके बाद 2014 में सुल्तानपुर और 2019 में पीलीभीत से भी चुनाव जीतने में सफल रहे। इस तरह लोकसभा के तीनों चुनावों में उन्हें जीत मिली। 2024 में BJP ने उन्हें टिकट नहीं दिया, लेकिन चुनावी मैदान में उनका रिकॉर्ड अब तक 3-0 रहा है।

अनुप्रिया पटेल: 4 चुनाव, 4 जीत

अनुप्रिया पटेल ने 2012 में वाराणसी की रोहनिया विधानसभा सीट से पहली चुनावी जीत दर्ज की। इसके बाद 2014 में उन्होंने मिर्जापुर से लोकसभा चुनाव जीता। 2019 और 2024 में भी उन्होंने मिर्जापुर से जीत दोहराई।

उनका चुनावी रिकॉर्ड इस तरह रहा-

-2012 विधानसभा + 2014, 2019 और 2024 लोकसभा

यानी कुल 4 चुनाव और 4 जीत। यह रिकॉर्ड उन्हें यूपी की राजनीति के सफल युवा चेहरों में शामिल करता है।

फोटो सोर्स-Ai
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राजीव गांधी: अमेठी से लगातार जीत

राजीव गांधी ने 1981 में अमेठी लोकसभा सीट के उपचुनाव से चुनावी राजनीति में कदम रखा। इसके बाद उन्होंने 1984, 1989 और 1991 में भी अमेठी से जीत दर्ज की। इस तरह उनके खाते में कुल 4 चुनाव और 4 जीत दर्ज होती हैं। 1981 में उन्होंने अमेठी उपचुनाव दो लाख से ज्यादा वोटों के अंतर से जीता था और 1991 तक यह सीट उनके पास रही।

अखिलेश यादव: कन्नौज से आजमगढ़ और करहल तक जीत

अखिलेश यादव का चुनावी रिकॉर्ड इसलिए अलग है क्योंकि उन्होंने कई बार एक से ज्यादा सीटों से चुनाव लड़ा। उन्होंने 2000 में कन्नौज लोकसभा उपचुनाव से चुनावी सफर की शुरुआत की। इसके बाद 2004 और 2009 में कन्नौज से जीत दर्ज की। 2009 में उन्होंने फिरोजाबाद से भी चुनाव जीता। इसके बाद 2019 में आजमगढ़ और 2022 में करहल से जीत हासिल की। 2024 में उन्होंने एक बार फिर कन्नौज से लोकसभा चुनाव जीतकर संसद में वापसी की।

अगर 2009 में लड़ी गई दोनों लोकसभा सीटों को अलग-अलग चुनावी मुकाबले के तौर पर गिना जाए तो उनके खाते में 8 चुनाव और 8 जीत दर्ज होती हैं।

योगी आदित्यनाथ: गोरखपुर से लखनऊ तक जीत का रिकॉर्ड

योगी आदित्यनाथ ने महज 26 साल की उम्र में 1998 में गोरखपुर से लोकसभा चुनाव जीतकर चुनावी राजनीति में कदम रखा। इसके बाद उन्होंने लगातार 5 लोकसभा चुनाव जीते।

1998 → गोरखपुर
1999 → गोरखपुर
2004 → गोरखपुर
2009 → गोरखपुर
2014 → गोरखपुर

इसके बाद 2022 में उन्होंने पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा। गोरखपुर शहरी सीट से उन्होंने 1.65 लाख से ज्यादा वोट हासिल कर जीत दर्ज की। इस तरह उनके खाते में 6 चुनाव और 6 जीत दर्ज हैं।

राजा भैया: कुंडा में 3 दशक का दबदबा

रघुराज प्रताप सिंह यानी राजा भैया ने 1993 में कुंडा विधानसभा सीट से अपना चुनावी सफर शुरू किया।

इसके बाद उन्होंने लगातार जीत दर्ज की-

1996 → 2002 → 2007 → 2012 → 2017 → 2022

2022 में उन्होंने कुंडा से लगातार सातवीं जीत हासिल की। खास बात यह है कि शुरुआती कई चुनावों में राजा भैया निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरे थे। कुंडा में उनका चुनावी रिकॉर्ड 7-0 है। यानी करीब तीन दशक से कुंडा की राजनीति में उनका दबदबा कायम है।

सोनिया गांधी: 7 चुनाव, 7 जीत

सोनिया गांधी का चुनावी रिकॉर्ड भी खास है। उन्होंने 1999 में अमेठी और बेल्लारी, दोनों सीटों से लोकसभा चुनाव जीता। इसके बाद रायबरेली उनकी प्रमुख राजनीतिक सीट बन गई। उन्होंने 2004, 2006 के उपचुनाव, 2009, 2014 और 2019 में रायबरेली से जीत दर्ज की। अगर अलग-अलग सीटों से लड़े गए चुनावी मुकाबलों को अलग-अलग गिना जाए तो उनके खाते में 7 चुनाव और 7 जीत दर्ज होती हैं। उनका रिकॉर्ड 7-0 रहा। 2019 के बाद उन्होंने लोकसभा की जगह राज्यसभा का रुख किया।

नरेंद्र मोदी: गुजरात से वाराणसी तक हर चुनाव में जीत

PM नरेंद्र मोदी का चुनावी रिकॉर्ड भी बेहद खास रहा है। उन्होंने 2002 में राजकोट-II उपचुनाव जीतकर चुनावी जीत का सिलसिला शुरू किया। उसी साल उन्होंने मणिनगर से विधानसभा चुनाव भी जीता।

इसके बाद उनका चुनावी सफर इस तरह रहा-

2007 → मणिनगर
2012 → मणिनगर
2014 → वडोदरा + वाराणसी
2019 → वाराणसी
2024 → वाराणसी

इन सभी चुनावी मुकाबलों में उन्होंने जीत दर्ज की।

अगर हर विधानसभा और लोकसभा सीट को अलग-अलग चुनावी मुकाबले के तौर पर गिना जाए तो उनका रिकॉर्ड 8-0 बैठता है। यानी 2002 से अब तक उनके चुनावी सफर में कोई हार दर्ज नहीं हुई।

चौधरी चरण सिंह: 11 चुनाव, 11 जीत का रिकॉर्ड

अब बात उस नाम की, जिसका चुनावी रिकॉर्ड इस सूची में सबसे बड़ा है। चौधरी चरण सिंह ने 1937 में संयुक्त प्रांत की विधानसभा से चुनावी राजनीति शुरू की। 1937 से 1974 तक उन्होंने लगातार 8 बार उस विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया।

उनके आधिकारिक आर्काइव में 1937, 1946, 1952, 1957, 1962, 1967, 1969 और 1974 का उल्लेख मिलता है। इसके बाद उन्होंने 1977, 1980 और 1984 में बागपत से लोकसभा चुनाव जीते। इस तरह 1937 से 1984 तक कुल 11 चुनावी जीत गिनने पर उनका रिकॉर्ड 11-0 बनता है। हालांकि कुछ चुनावी इतिहास केवल स्वतंत्र भारत के चुनावों को गिनते हैं। ऐसे में उनकी चुनावी जीत की संख्या 9 बताई जाती है। यानी चुनावों की गिनती के तरीके के आधार पर आंकड़े में अंतर हो सकता है, लेकिन उनका चुनावी सफर बेहद सफल रहा।

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