10 दिन में ही उखड़ने लगा नारनौल रेलवे-स्टेशन का एंड-पाथवे:दैनिक रेलयात्री जन कल्याण संघ ने उठाए निर्माण गुणवत्ता पर सवाल, तकनीकी जांच की मांग

10 दिन में ही उखड़ने लगा नारनौल रेलवे-स्टेशन का एंड-पाथवे:दैनिक रेलयात्री जन कल्याण संघ ने उठाए निर्माण गुणवत्ता पर सवाल, तकनीकी जांच की मांग

हरियाणा के नारनौल रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की सुविधा के लिए हाल ही में बनाया गया एंड पाथ-वे निर्माण के कुछ ही दिनों बाद खराब होने लगा है। पाथवे की सतह से कंकड़ और निर्माण सामग्री उखड़ने तथा कई स्थानों पर सतह असमतल होने से निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं। दैनिक रेल यात्री एवं जन कल्याण संघ ने पूरे मामले की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराने की मांग की है। संघ के अध्यक्ष गणेश शर्मा ने बताया कि यात्रियों की सुविधा के लिए 21 मई 2026 को रेलवे अधिकारियों को रींगस की ओर एंड पाथ-वे बनाने का प्रस्ताव भेजा गया था। रेलवे ने 19 जून को पत्र जारी कर निर्माण का आश्वासन दिया। इसके बाद 18 अगस्त को पाथवे का निर्माण पूरा हुआ, जबकि अगले ही दिन 19 अगस्त को उत्तर पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक पंकज शर्मा का नारनौल स्टेशन दौरा था। 10 दिन बाद ही टूटने लगा उन्होंने कहा कि निर्माण के महज 10-11 दिन बाद ही पाथवे से निर्माण सामग्री उखड़ने लगी है, जो गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। रेलवे को जांच करनी चाहिए कि निर्माण में तय मानकों के अनुरूप सामग्री का उपयोग हुआ या नहीं और तकनीकी प्रक्रियाओं का पालन किया गया या नहीं। गंभीर मामला संघ के सचिव एडवोकेट महावीर जैन ने कहा कि सार्वजनिक धन से तैयार यात्री सुविधाओं में गुणवत्ता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि नई सुविधा कुछ ही दिनों में खराब होने लगे तो यह गंभीर मामला है। उन्होंने निर्माण सामग्री, गुणवत्ता परीक्षण, तकनीकी मानकों और भुगतान संबंधी रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की। डिजाइन पर भी उठाए सवाल संघ ने एंड पाथवे की उपयोगिता पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि वर्तमान पाथवे प्लेटफॉर्म नंबर एक और दो के बीच अपेक्षित आवागमन सुविधा उपलब्ध नहीं कराता। संघ ने रेवाड़ी रेलवे स्टेशन के एंड पाथवे का उदाहरण देते हुए नारनौल में बने पाथवे के स्वीकृत डिजाइन और नक्शे की भी जांच कराने की मांग की है। जांच कराने की मांग संघ ने रेलवे प्रशासन से पूरे मामले की स्वतंत्र तकनीकी जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों, कर्मचारियों और संबंधित एजेंसी की जवाबदेही तय करने तथा लापरवाही या वित्तीय अनियमितता मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है।

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