बलिया में बाढ़ के स्थायी समाधान की मांग उठी है। बांसडीह विधानसभा के पूर्व उम्मीदवार और समाजवादी पार्टी (सपा) नेता सुशांत राज पाठक ने मीडिया से बातचीत में यह बात कही। उन्होंने सुझाव दिया कि बाढ़ नियंत्रण के लिए तीन-चार या पांच साल का बजट एक साथ जारी किया जाना चाहिए। ताकि समस्या का स्थायी हल निकल सके। पाठक ने मौजूदा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि हर साल 20 से 35 करोड़ रुपये बाढ़ राहत के लिए आते हैं, लेकिन इनका बंदरबांट हो जाता है। उनके अनुसार, विधायक से लेकर अधिकारी तक इन पैसों का दुरुपयोग करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बाढ़ कार्यों का ऑडिट नहीं होता, जिससे विधायक और अधिकारी इसे हर साल मिलने वाला ‘बोनस’ मानते हैं और जितना हो सके, लूट लेते हैं। उन्होंने 107 करोड़ रुपये के एक मामले का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें से 50-60 करोड़ रुपए का गबन किया गया। सपा नेता ने कहा कि पहले यह जांच की जानी चाहिए कि किन क्षेत्रों में स्थायी समाधान की आवश्यकता है।
इसके बाद, चार-पांच साल का पूरा पैसा एक साथ उन जगहों पर लगाया जाए। उनका मानना है कि जब पूरा बजट एक साथ खर्च होगा, तो कटान से प्रभावित होने वाले गांवों को बांध के दूसरी ओर जमीन और मकान का पैसा देकर स्थायी रूप से विस्थापित भी किया जा सकता है। पाठक ने यह भी सुझाव दिया कि बाढ़ नियंत्रण कार्यों के लिए टाटा और एल एंड टी जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों को काम दिया जाना चाहिए, जो इस क्षेत्र में विशेषज्ञ हैं। उन्होंने कहा कि स्थानीय ठेकेदारों को काम देने से पैसों का बंदरबांट होता है, जबकि बड़ी कंपनियां गुणवत्तापूर्ण काम सुनिश्चित कर सकती हैं।

