‘विनोद मेरा चचेरा भाई था, लेकिन मेरे काले कारोबार में रोड़ा बन रहा था। मैं बिहार में शराबबंदी के बाद से ही इस काले धंधे में लगा हूं। विनोद पुलिसकर्मियों को दूध पहुंचाता था। इसी दौरान मेरे कारोबार के बारे में पुलिस को बता देता था। मैं विनोद के कारण ही कई बार जेल गया। परेशान होकर मैंने अपने पिता, पत्नी से बात की। उनकी सहमति के बाद दोस्तों संग मिलकर विनोद की सिर में दो गोली मारकर हत्या कर दी।’ बेगूसराय में 1 अगस्त की शाम सांख गांव के रहने वाले दूध कारोबारी 35 साल के विनोद की हत्या करने वाले मुख्य आरोपी 30 साल के मुकेश यादव का ये कबूलनामा है। पुलिस ने मुकेश को 23 अगस्त को हरियाणा के कापरीवास से गिरफ्तार किया था। इससे पहले विनोद हत्याकांड में पुलिस ने तीन आरोपी राहुल शर्मा, सचिन कुमार को 2 अगस्त, जबकि 3 अगस्त को रौशन कुमार को पकड़कर जेल भेजा था। कबूलनामा में मुकेश ने पुलिस को क्या-क्या बताया? हत्या के बाद आरोपी कहां से और कैसे फरार हुआ? मृतक की पत्नी ने वारदात को लेकर क्या कहा? पुलिस का इस मामले में क्या कहना है? पढ़िए ग्राउंड रिपोर्ट। पहले घटना वाले दिन यानी 1 अगस्त की तीन तस्वीरें देखिए सबसे पहले आरोपी मुकेश यादव का कबूलनामा पढ़िए मुकेश ने बताया कि मैं गांव के बुरे संगत वाले लड़कों के साथ रहने के कारण इंटर से अधिक पढ़ाई नहीं कर सका। इसी दौरान एक लड़की से प्यार करने लगा और उससे ही शादी की। शादी के बाद परिवार को चलाने के लिए कुछ रोजगार चाहिए था। इसलिए मैंने शराबबंदी वाले बिहार में शराब के कारोबार से पैसे बनाने का निर्णय लिया। पत्नी, पिता की सहमति से घर में ही शराब रखकर बेचने लगा। मेरे चचेरे चाचा का लड़का विनोद यादव पेशे से दूध कारोबारी है। वो थाना के पुलिस पदाधिकारी और कर्मियों को दूध पहुंचता था। विनोद ने कई बार मुफस्सिल थाना के SHO को थानाध्यक्ष को बता दिया कि मैं शराब बेचता हूं। इसके बाद पुलिस ने मेरे घर पर छापेमारी कर शराब की बरामदगी की और मुझे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। कुछ दिनों के बाद जेल से निकला और फिर से शराब का कारोबार करने लगा। विनोद यादव ने दोबारा मेरे शराब बेचने की सूचना पुलिस को दे दी। मैं दोबारा पकड़ा गया। मैं कई बार शराब बेचने के आरोप में जेल जा चुका हूं। हर बार जेल से छूटने के बाद मेरी मुखबिरी करने वाले के बारे में जानकारी जुटाई तो वो विनोद यादव ही निकला। इसके बाद मैंने विनोद की हत्या की प्लानिंग की। ‘विनोद का जमीनी झगड़ा अरविंद शर्मा से हुआ, जिसका फायदा मैंने उठाया’ जब मैं विनोद की हत्या की प्लानिंग कर रहा था, इसी दौरान विनोद का जमीन को लेकर पड़ोस के अरविंद शर्मा से झगड़ा हुआ, जिसका फायदा मैंने उठाया। अरविंद शर्मा के बेटे राहुल कुमार को अपने साथ लिया और कहा कि विनोद यादव की हत्या करनी है, तुम्हारे पिता का जमीनी विवाद है, तुम्हारे रास्ते का रोड़ा भी हट जाएगा। दो दिन के बाद राहुल कुमार ने कहा कि मैंने अपने पिता से बात की है, उन्होंने कहा कि ये अच्छी बात है। मुकेश यादव से कहना कि हम दोनों उसकी मदद करेंगे। तब गांव के एक अन्य लड़के रौशन कुमार को हत्या का प्लान शेयर किया। रौशन भी तैयार हो गया। इसके बाद पहाड़चक के रहने वाले सचिन को कहानी बताते हुए मदद मांगी तो सचिन भी राजी हो गया। चारों लोगों के साथ मिलकर प्लानिंग तैयार की। फिर अपनी मां उर्मिला देवी, पापा रामाश्रय यादव, बडे भाई अनिल कुमार और पत्नी रानी कुमारी को इसकी जानकारी दी। मम्मी-पापा ने कहा- विनोद ने तुम्हें काफी परेशान किया है, कारोबार को भी नुकसान पहुंचा है मम्मी-पापा और भाई ने मुझसे कहा कि विनोद ने तुम्हें काफी परेशान किया है, तुम्हारे कारोबार को भी नुकसान पहुंचाया है, उसे मर ही जाना चाहिए। मुकेश ने बताया कि हालांकि मेरी पत्नी हत्या के लिए राजी नहीं हुई। लेकिन बाद में वो राजी हो गई। इसके बाद सभी लड़कों के साथ विनोद यादव के आने-जाने के रास्ते सांख-भर्रा रोड का जायजा लिया, जिसके दोनों तरफ जंगल है। राहुल को विनोद यादव के घर से ही पीछा करने को कहा गया। रौशन ने गाड़ी का व्यवस्था की और गाड़ी चलाने को राजी हो गया। 31 जुलाई को रौशन की ओर से व्यवस्था किए गए सफेद बोलेरो में लाल बहादुर तांती, रौशन कुमार और सचिन कुमार के साथ मैं रास्ते में विनोद का इंतजार करने लगा। थोड़ी देर बाद राहुल ने बताया कि विनोद यादव आज दूध देने रजौड़ा होते हुए चला गया। तब हम लोग अपने-अपने घर लौट गए। अगले दिन यानी 1 अगस्त को सभी लड़कों को फोन कर तैयार रहने को कहा। मैंने अपना मोबाइल पोखरिया के रहने वाले दोस्त आयुष राज को दे दिया। रौशन ने भी मोबाइल बंद कर दिया। सभी सांख-भर्रा रोड के बीच चपरिया के नजदीक विनोद यादव का इंतजार करने लगे। शाम करीब 7 बजे राहुल ने बताया कि विनोद यादव के पीछे-पीछे अपने पिताजी के साथ आ रहा हूं, आप लोग तैयार रहिए। इसी दौरान एक बाइक आता दिखा, पीछे से एक और बाइक दिखा तो हम लोग समझ गए की आगे वाली बाइक पर विनोद यादव है। नजदीक आते ही मेरे कहने पर रौशन ने विनोद की बाइक को बोलेरो से टक्कर मारी। विनोद बाइक समेत रोड पर गिर गया। इतने में पीछे से आ रहे राहुल और अरविंद शर्मा ने विनोद यादव को पकड़ लिया, मैं भी गाड़ी से उतरा और विनोद यादव को पकड़ लिए। इतने में विनोद यादव का बेटा और भतीजा घटनास्थल पर आ गए। ‘मैंने, रौशन, सचिन और लाल बहादुर के साथ मिलकर गोली चला दी’ मुकेश ने कहा कि विनोद के बेटे और भतीजा के आने के बाद भी मैंने रौशन, सचिन और लाल बहादुर के साथ मिलकर विनोद पर फायरिंग कर दी। मुझे गोली चलाते हुए विनोद के बेटे और भतीजे ने देख लिया था। वारदात को अंजाम देने के बाद मैं अपने साथियों के साथ बोलेरो में बैठकर भाग गया। लाल बहादुर और सचिन को रास्ते में उतार दिया। इसके बाद हम लोगों ने हथियार को सिमरिया पुल से गंगा नदी में फेंक दिया और हरियाणा आकर रहने लगे। मुकेश ने बताया कि पिस्टल और गोली की व्यवस्था राहुल कुमार और अरविंद शर्मा ने की थी, चूंकि अरविंद शर्मा पहले ही हथियार बनाने के कारण जेल जा चुका था। मैं जानता था कि पुलिस जब पकड़ेगी तो मुझसे हथियार के बारे में पूछेगी, इसलिए कोई सबूत न रहे, पिस्टल को गंगा नदी में फेंक दिया था। वारदात के बाद मैंने मोबाइल का सिम भी तोड़ कर फेंक दिया था। विनोद की पत्नी प्रियंका ने दर्ज कराई थी FIR इस मामले में मृतक की पत्नी प्रियंका कुमारी ने FIR दर्ज कराई थी। FIR में कहा गया था कि मेरे पति रोज की तरह बाइक से दूध पहुंचाने बेगूसराय के लिए बाइक से निकले थे। लेकिन एक छोटा केन में रखा दूध घर पर ही छूट गया था। उन्होंने हमारे बेटे कुणाल कुमार को कहा था कि वो दूध लेकर आ जाए, मैं भर्रा ठाकुरबारी के पास इंतजार कर रहा हूं। कुणाल अपने चचेरे भाई दिनेश कुमार के साथ जा रहा था। इसी दौरान चपरिया चौर के जौहरी कुंआ के पास देखा कि मुकेश मुकेश कुमार यादव, अनिल कुमार, राहुल कुमार, अरविंद शर्मा, रौशन कुमार एवं सचिन कुमार समेत अन्य तीन-चार अज्ञात लोगों ने मेरे पति विनोद को घेर लिया था। मेरे बेटे कुणाल और दिनेश को देखते ही आरोपियों ने मेरे पति विनोद यादव की गोली मारकर हत्या कर दी और बेलोरो से भाग निकले। खून से लथपथ पति को सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। घटना की सूचना पाकर परिवार के कुछ लोग जब मुकेश यादव के घर पर गए तो घर में ताला लगा हुआ था। मुकेश यादव और उसका पूरा परिवार घटना के दो-तीन घंटा पहले ही घर छोड़ कर चले गए थे। प्रियंका ने बताया कि हत्या से पहले यानी 28 मई को रामाश्रय यादव और उसके दो बेटों मुकेश और अनिल ने गाली-गलौज करते हुए मेरे पति को जान मारने की धमकी दी थी। इस संबंध में 1 जून को सनहा भी दर्ज कराया गया था। इसके बाद भी आरोपियों ने मेरे पति की गोली मारकर हत्या कर दी। ‘विनोद मेरा चचेरा भाई था, लेकिन मेरे काले कारोबार में रोड़ा बन रहा था। मैं बिहार में शराबबंदी के बाद से ही इस काले धंधे में लगा हूं। विनोद पुलिसकर्मियों को दूध पहुंचाता था। इसी दौरान मेरे कारोबार के बारे में पुलिस को बता देता था। मैं विनोद के कारण ही कई बार जेल गया। परेशान होकर मैंने अपने पिता, पत्नी से बात की। उनकी सहमति के बाद दोस्तों संग मिलकर विनोद की सिर में दो गोली मारकर हत्या कर दी।’ बेगूसराय में 1 अगस्त की शाम सांख गांव के रहने वाले दूध कारोबारी 35 साल के विनोद की हत्या करने वाले मुख्य आरोपी 30 साल के मुकेश यादव का ये कबूलनामा है। पुलिस ने मुकेश को 23 अगस्त को हरियाणा के कापरीवास से गिरफ्तार किया था। इससे पहले विनोद हत्याकांड में पुलिस ने तीन आरोपी राहुल शर्मा, सचिन कुमार को 2 अगस्त, जबकि 3 अगस्त को रौशन कुमार को पकड़कर जेल भेजा था। कबूलनामा में मुकेश ने पुलिस को क्या-क्या बताया? हत्या के बाद आरोपी कहां से और कैसे फरार हुआ? मृतक की पत्नी ने वारदात को लेकर क्या कहा? पुलिस का इस मामले में क्या कहना है? पढ़िए ग्राउंड रिपोर्ट। पहले घटना वाले दिन यानी 1 अगस्त की तीन तस्वीरें देखिए सबसे पहले आरोपी मुकेश यादव का कबूलनामा पढ़िए मुकेश ने बताया कि मैं गांव के बुरे संगत वाले लड़कों के साथ रहने के कारण इंटर से अधिक पढ़ाई नहीं कर सका। इसी दौरान एक लड़की से प्यार करने लगा और उससे ही शादी की। शादी के बाद परिवार को चलाने के लिए कुछ रोजगार चाहिए था। इसलिए मैंने शराबबंदी वाले बिहार में शराब के कारोबार से पैसे बनाने का निर्णय लिया। पत्नी, पिता की सहमति से घर में ही शराब रखकर बेचने लगा। मेरे चचेरे चाचा का लड़का विनोद यादव पेशे से दूध कारोबारी है। वो थाना के पुलिस पदाधिकारी और कर्मियों को दूध पहुंचता था। विनोद ने कई बार मुफस्सिल थाना के SHO को थानाध्यक्ष को बता दिया कि मैं शराब बेचता हूं। इसके बाद पुलिस ने मेरे घर पर छापेमारी कर शराब की बरामदगी की और मुझे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। कुछ दिनों के बाद जेल से निकला और फिर से शराब का कारोबार करने लगा। विनोद यादव ने दोबारा मेरे शराब बेचने की सूचना पुलिस को दे दी। मैं दोबारा पकड़ा गया। मैं कई बार शराब बेचने के आरोप में जेल जा चुका हूं। हर बार जेल से छूटने के बाद मेरी मुखबिरी करने वाले के बारे में जानकारी जुटाई तो वो विनोद यादव ही निकला। इसके बाद मैंने विनोद की हत्या की प्लानिंग की। ‘विनोद का जमीनी झगड़ा अरविंद शर्मा से हुआ, जिसका फायदा मैंने उठाया’ जब मैं विनोद की हत्या की प्लानिंग कर रहा था, इसी दौरान विनोद का जमीन को लेकर पड़ोस के अरविंद शर्मा से झगड़ा हुआ, जिसका फायदा मैंने उठाया। अरविंद शर्मा के बेटे राहुल कुमार को अपने साथ लिया और कहा कि विनोद यादव की हत्या करनी है, तुम्हारे पिता का जमीनी विवाद है, तुम्हारे रास्ते का रोड़ा भी हट जाएगा। दो दिन के बाद राहुल कुमार ने कहा कि मैंने अपने पिता से बात की है, उन्होंने कहा कि ये अच्छी बात है। मुकेश यादव से कहना कि हम दोनों उसकी मदद करेंगे। तब गांव के एक अन्य लड़के रौशन कुमार को हत्या का प्लान शेयर किया। रौशन भी तैयार हो गया। इसके बाद पहाड़चक के रहने वाले सचिन को कहानी बताते हुए मदद मांगी तो सचिन भी राजी हो गया। चारों लोगों के साथ मिलकर प्लानिंग तैयार की। फिर अपनी मां उर्मिला देवी, पापा रामाश्रय यादव, बडे भाई अनिल कुमार और पत्नी रानी कुमारी को इसकी जानकारी दी। मम्मी-पापा ने कहा- विनोद ने तुम्हें काफी परेशान किया है, कारोबार को भी नुकसान पहुंचा है मम्मी-पापा और भाई ने मुझसे कहा कि विनोद ने तुम्हें काफी परेशान किया है, तुम्हारे कारोबार को भी नुकसान पहुंचाया है, उसे मर ही जाना चाहिए। मुकेश ने बताया कि हालांकि मेरी पत्नी हत्या के लिए राजी नहीं हुई। लेकिन बाद में वो राजी हो गई। इसके बाद सभी लड़कों के साथ विनोद यादव के आने-जाने के रास्ते सांख-भर्रा रोड का जायजा लिया, जिसके दोनों तरफ जंगल है। राहुल को विनोद यादव के घर से ही पीछा करने को कहा गया। रौशन ने गाड़ी का व्यवस्था की और गाड़ी चलाने को राजी हो गया। 31 जुलाई को रौशन की ओर से व्यवस्था किए गए सफेद बोलेरो में लाल बहादुर तांती, रौशन कुमार और सचिन कुमार के साथ मैं रास्ते में विनोद का इंतजार करने लगा। थोड़ी देर बाद राहुल ने बताया कि विनोद यादव आज दूध देने रजौड़ा होते हुए चला गया। तब हम लोग अपने-अपने घर लौट गए। अगले दिन यानी 1 अगस्त को सभी लड़कों को फोन कर तैयार रहने को कहा। मैंने अपना मोबाइल पोखरिया के रहने वाले दोस्त आयुष राज को दे दिया। रौशन ने भी मोबाइल बंद कर दिया। सभी सांख-भर्रा रोड के बीच चपरिया के नजदीक विनोद यादव का इंतजार करने लगे। शाम करीब 7 बजे राहुल ने बताया कि विनोद यादव के पीछे-पीछे अपने पिताजी के साथ आ रहा हूं, आप लोग तैयार रहिए। इसी दौरान एक बाइक आता दिखा, पीछे से एक और बाइक दिखा तो हम लोग समझ गए की आगे वाली बाइक पर विनोद यादव है। नजदीक आते ही मेरे कहने पर रौशन ने विनोद की बाइक को बोलेरो से टक्कर मारी। विनोद बाइक समेत रोड पर गिर गया। इतने में पीछे से आ रहे राहुल और अरविंद शर्मा ने विनोद यादव को पकड़ लिया, मैं भी गाड़ी से उतरा और विनोद यादव को पकड़ लिए। इतने में विनोद यादव का बेटा और भतीजा घटनास्थल पर आ गए। ‘मैंने, रौशन, सचिन और लाल बहादुर के साथ मिलकर गोली चला दी’ मुकेश ने कहा कि विनोद के बेटे और भतीजा के आने के बाद भी मैंने रौशन, सचिन और लाल बहादुर के साथ मिलकर विनोद पर फायरिंग कर दी। मुझे गोली चलाते हुए विनोद के बेटे और भतीजे ने देख लिया था। वारदात को अंजाम देने के बाद मैं अपने साथियों के साथ बोलेरो में बैठकर भाग गया। लाल बहादुर और सचिन को रास्ते में उतार दिया। इसके बाद हम लोगों ने हथियार को सिमरिया पुल से गंगा नदी में फेंक दिया और हरियाणा आकर रहने लगे। मुकेश ने बताया कि पिस्टल और गोली की व्यवस्था राहुल कुमार और अरविंद शर्मा ने की थी, चूंकि अरविंद शर्मा पहले ही हथियार बनाने के कारण जेल जा चुका था। मैं जानता था कि पुलिस जब पकड़ेगी तो मुझसे हथियार के बारे में पूछेगी, इसलिए कोई सबूत न रहे, पिस्टल को गंगा नदी में फेंक दिया था। वारदात के बाद मैंने मोबाइल का सिम भी तोड़ कर फेंक दिया था। विनोद की पत्नी प्रियंका ने दर्ज कराई थी FIR इस मामले में मृतक की पत्नी प्रियंका कुमारी ने FIR दर्ज कराई थी। FIR में कहा गया था कि मेरे पति रोज की तरह बाइक से दूध पहुंचाने बेगूसराय के लिए बाइक से निकले थे। लेकिन एक छोटा केन में रखा दूध घर पर ही छूट गया था। उन्होंने हमारे बेटे कुणाल कुमार को कहा था कि वो दूध लेकर आ जाए, मैं भर्रा ठाकुरबारी के पास इंतजार कर रहा हूं। कुणाल अपने चचेरे भाई दिनेश कुमार के साथ जा रहा था। इसी दौरान चपरिया चौर के जौहरी कुंआ के पास देखा कि मुकेश मुकेश कुमार यादव, अनिल कुमार, राहुल कुमार, अरविंद शर्मा, रौशन कुमार एवं सचिन कुमार समेत अन्य तीन-चार अज्ञात लोगों ने मेरे पति विनोद को घेर लिया था। मेरे बेटे कुणाल और दिनेश को देखते ही आरोपियों ने मेरे पति विनोद यादव की गोली मारकर हत्या कर दी और बेलोरो से भाग निकले। खून से लथपथ पति को सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। घटना की सूचना पाकर परिवार के कुछ लोग जब मुकेश यादव के घर पर गए तो घर में ताला लगा हुआ था। मुकेश यादव और उसका पूरा परिवार घटना के दो-तीन घंटा पहले ही घर छोड़ कर चले गए थे। प्रियंका ने बताया कि हत्या से पहले यानी 28 मई को रामाश्रय यादव और उसके दो बेटों मुकेश और अनिल ने गाली-गलौज करते हुए मेरे पति को जान मारने की धमकी दी थी। इस संबंध में 1 जून को सनहा भी दर्ज कराया गया था। इसके बाद भी आरोपियों ने मेरे पति की गोली मारकर हत्या कर दी।

