गोरखपुर में इन दिनों हार्ट पल्पिटेशन और हाई बीपी के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। जिला अस्पताल के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. रोहित गुप्ता ने बताया कि मरीजों में दिल की धड़कन असामान्य रूप से तेज या अनियंत्रित होने की समस्या देखी जा रही है। OPD में 8 से 10 नए मरीज इस समस्या को लेकर पहुंच रहे हैं। इस बीमारी का शिकार अब बुजुर्गों से ज्यादा युवा हो रहे हैं। डॉक्टर का कहना है कि रोजमर्रा की जिंदगी में बढ़ता तनाव, काम का प्रेशर और गलत खान-पान इसके मुख्य कारण हैं। अनियंत्रित लाइफ स्टाइल की शुरुआती संकेत- डॉक्टर
जिला अस्पताल के कार्डियोलॉजिस्ट ने बताया कि पल्पिटेशन सिर्फ एक बीमारी नहीं है, बल्कि यह शरीर में किसी दूसरी समस्या या अनियंत्रित जीवनशैली का एक शुरुआती संकेत है। जब कोई व्यक्ति लगातार मानसिक तनाव, चिंता या घबराहट से गुजरता है, तो उसके शरीर में एड्रेनालिन हार्मोन का लेवल अचानक बढ़ जाता है। इस वजह से दिल की धड़कन अचानक काफी तेज हो जाती है या दिल की एक-दो धड़कन मिस होने जैसा महसूस होता है। डॉक्टर के मुताबिक, ओपीडी में आने वाले ज्यादातर मरीज 20 से 40 साल की उम्र के हैं। युवाओं में देर रात तक जागना, स्क्रीन टाइम का बढ़ना, चाय-कॉफी का ज्यादा सेवन और नौकरी या पढ़ाई का प्रेशर इस समस्या को गंभीर बना रहा है। क्यों बढ़ रही समस्या
जिला अस्पताल के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. रोहित गुप्ता ने पल्पिटेशन बढ़ने के पीछे कई अहम वजहों को बताया। उनका कहना है कि भागदौड़ भरी जिंदगी, ऑफिस का तनाव और पारिवारिक चिंताएं दिल की सेहत पर सीधा असर डाल रही हैं। युवा इससे अत्यधिक मानसिक तनाव महसूस करते हैं। साथ ही ज्यादा चाय, कॉफी, सिगरेट, बीड़ी या एनर्जी ड्रिंक्स पीने से दिल की धड़कन अचानक बढ़ जाती है। इसके अलावा रात में 7 से 8 घंटे की पूरी नींद न लेने से नर्वस सिस्टम पर बुरा असर पड़ता है। दिनभर एक ही जगह बैठकर काम करना और कोई एक्सरसाइज या वॉक न करने की वजह से भी पल्पिटेशन की समस्या बढ़ती है। वहीं शरीर में हीमोग्लोबिन कम होने या थायराइड हार्मोन का संतुलन बिगड़ने से भी धड़कन तेज होती है। शरीर में पानी और जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी होने पर भी पल्पिटेशन शुरू हो जाता है। परेशानी के हिसाब से मरीजों को दिया जाता ट्रीटमेंट
अस्पताल में आने वाले मरीजों का सबसे पहले बेसिक चेकअप किया जाता है। डॉक्टर के अनुसार, मरीज की परेशानी जानने के बाद ही सबसे पहले ईसीजी (ECG) और ब्लड प्रेशर चेक किया जाता है। जरूरत पड़ने पर इको और थायराइड जांच कराने की सलाह दी जाती है। अगर पल्पिटेशन हाई बीपी या किसी अन्य शारीरिक वजह से है, तो डॉक्टर उसकी दवा देते हैं। तनाव या घबराहट के मरीजों को माइल्ड सेडेटिव्स या एंग्जायटी कंट्रोल करने की दवा दी जाती है। कई बार मरीजों को केवल दवाओं की नहीं, बल्कि सही लाइफस्टाइल गाइडेंस और काउंसलिंग की जरूरत होती है। पल्पिटेशन के मुख्य लक्षण
जब किसी व्यक्ति को पल्पिटेशन की शिकायत होती है, तो उन्हें अक्सर ऐसा लगता है जैसे… बचाव के आसान और असरदार उपाय
डॉक्टरों का कहना है कि थोड़ी सी सावधानी और अपनी आदतों में सुधार करके इस समस्या से पूरी तरह बचा जा सकता है, जिसमें

