रामपुर में उदयनिधि स्टालिन और प्रियांक खड़गे के खिलाफ दर्ज मुकदमे की विवेचना स्थानांतरण को लेकर मंगलवार को एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट (सेशन ट्रायल) में होने वाली सुनवाई नहीं हो सकी। निचली अदालत से संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने के कारण अदालत में कार्यवाही आगे नहीं बढ़ पाई। अब मामले की अगली सुनवाई 3 सितंबर को होगी। यह मामला करीब तीन साल पहले रामपुर बार के वरिष्ठ अधिवक्ता रामसिंह लोधी और हर्ष गुप्ता की शिकायत के बाद सामने आया था। अधिवक्ताओं ने पुलिस अधीक्षक से शिकायत कर आरोप लगाया था कि 4 सितंबर 2023 को एक अंग्रेजी समाचार पत्र में प्रकाशित उदयनिधि स्टालिन के भाषण में सनातन धर्म को डेंगू, मलेरिया और कोरोना जैसी बीमारियों से जोड़ते हुए उसके नाश की बात कही गई थी। शिकायत के मुताबिक, इसके अगले दिन एक हिंदी राष्ट्रीय समाचार पत्र में प्रियांक खड़गे द्वारा स्टालिन के बयान का समर्थन किए जाने की खबर प्रकाशित हुई। दोनों बयानों को धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला बताते हुए पुलिस से कार्रवाई की मांग की गई थी। शिकायत के आधार पर सिविल लाइंस कोतवाली में दोनों नेताओं के खिलाफ तत्कालीन भारतीय दंड संहिता की धारा 153ए और 295ए के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। विवेचना दूसरे राज्यों को स्थानांतरित करने पर उठे सवाल मामले की विवेचना न्यायालय की निगरानी में चल रही थी। इसी बीच पुलिस अधिकारियों ने विवेचना को संबंधित राज्यों के पुलिस मुख्यालयों को स्थानांतरित कर दिया। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि उन्हें इस स्थानांतरण की जानकारी नहीं दी गई। इसके बाद उन्होंने एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट (सेशन ट्रायल) में प्रार्थना पत्र दाखिल कर पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। अदालत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा था। साथ ही एडीजी बरेली, डीआईजी मुरादाबाद, तत्कालीन पुलिस अधीक्षक और विवेचना अधिकारी को नोटिस जारी किए गए थे। अधिवक्ता हर्ष गुप्ता के मुताबिक, मंगलवार को सुनवाई के लिए निचली अदालत से रिकॉर्ड मंगाया गया था, लेकिन रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हो सका। इसी वजह से सुनवाई टाल दी गई। अब अदालत इस मामले में 3 सितंबर को सुनवाई करेगी।

