मुजफ्फरपुर के ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र से तीन महीने पहले लापता लैपटॉप कारोबारी मनोज भगत (48) और उनकी पत्नी मीनू देवी (45) की गुमशुदगी का राज खुल गया है। पुलिस के अनुसार, संपत्ति में बेटी और बहनों को हिस्सा देने की बात से नाराज मनोज के छोटे भाई अविनाश उर्फ अनुज ने ही दंपती की हत्या की थी। पहले उसने भाभी मीनू देवी का गला दबाकर हत्या की। भाई मनोज ने विरोध किया तो घर में रखी पीतल की मूर्ति से उसके सिर पर वार कर दिया। वारदात के बाद दोनों शवों को ठिकाने लगाने के लिए कंबल-बेडशीट में बांधा और कार से करीब 10 किलोमीटर दूर बोचहां थाना क्षेत्र में एनएच-27 किनारे सुनसान जगह पर फेंक दिया। हत्या के बाद आरोपी ने खुद को बचाने के लिए अपनी गुमशुदगी की कहानी भी रची। चार जून को उसकी बहन ने उसके लापता होने की प्राथमिकी दर्ज कराई। इसके बाद पुलिस उसकी तलाश में जुटी रही। तकनीकी जांच में उसकी लोकेशन वाराणसी में मिली। पुलिस ने यूपी पुलिस की मदद से उसे वहां से गिरफ्तार किया। पूछताछ में पुलिस के अनुसार उसने दंपती की हत्या की बात स्वीकार की है। बेटी और बहनों को हिस्सा देने के फैसले से था नाराज पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि मनोज भगत अपनी संपत्ति का हिस्सा अपनी इकलौती बेटी शेफाली और बहनों को देना चाहते थे। अनुज इसका विरोध करता था। वह शेफाली की शादी के पक्ष में भी नहीं था। इसी बात को लेकर दोनों भाइयों के बीच पहले से विवाद चल रहा था। मनोज की बेटी शेफाली ने दंपती के लापता होने के बाद से ही अपने चाचा अनुज पर संदेह जताया था। उसने पुलिस को बताया था कि संपत्ति और जमीन-जायदाद को लेकर उसके चाचा का उसके माता-पिता से विवाद रहता था। घटनास्थल से कुछ तस्वीरें… 19 मई की रात बहस के बाद हुई डबल मर्डर पुलिस के अनुसार, 19 मई की रात संपत्ति को लेकर मनोज और अनुज के बीच फिर विवाद हुआ। इसी दौरान अनुज ने पहले अपनी भाभी मीनू देवी का गला दबा दिया। मनोज ने इसका विरोध किया तो आरोपी ने घर में रखी पीतल की मूर्ति से उनके सिर पर जोरदार वार कर दिया। इससे मनोज की मौत हो गई। पुलिस को घर की जांच के दौरान खून के निशान मिले थे। दीवार पर भी खून के छींटे मिले थे। एफएसएल जांच में खून इंसानी होने की पुष्टि हुई थी। इसी के बाद पुलिस को यह मामला महज गुमशुदगी का नहीं, बल्कि हत्या का होने का संदेह गहरा गया था। शवों को बालू के ढेर पर फेंका, फिर कार से ले गया हत्या के बाद आरोपी ने घर में खून के निशान साफ करने की कोशिश की। इसके बाद दोनों शवों को कंबल और बेडशीट में बांधा। पुलिस के अनुसार, शवों को घर की छत से नीचे बालू के ढेर पर गिराया गया। बाद में दोनों को कार में रखा गया और बोचहां थाना क्षेत्र में एनएच-27 किनारे राधा स्वामी सत्संग के पास झाड़ियों में फेंक दिया गया। पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर रविवार को वहां से दोनों शवों के कंकालनुमा अवशेष बरामद किए। दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए एसकेएमसीएच भेजा गया है। पहचान की पुष्टि के लिए डीएनए जांच भी कराई जाएगी। शव ठिकाने लगाने के बाद कार बहन के घर छोड़ी पुलिस के अनुसार, दंपती की हत्या के बाद अनुज ने हत्या में इस्तेमाल कार अपनी बहन के घर पर खड़ी कर दी और वहां से निकल गया। इसके कुछ समय बाद चार जून को वह खुद भी गायब हो गया। उसकी बहन ने उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस को उस समय भी अनुज पर संदेह था, लेकिन वह हाथ नहीं आया। देश के कई धार्मिक स्थलों पर घूमता रहा आरोपी पुलिस की जांच के अनुसार, दंपती की हत्या के बाद अनुज अलग-अलग धार्मिक स्थलों पर घूमता रहा। वह केदारनाथ और बद्रीनाथ समेत कई स्थानों पर गया। इसके बाद वह वाराणसी पहुंचा और काशी विश्वनाथ मंदिर के आसपास रहने लगा। इसी दौरान पुलिस को उसकी लोकेशन मिली और यूपी पुलिस की मदद से उसे पकड़ लिया गया। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि दंपती की हत्या और शवों को ठिकाने लगाने में अनुज के साथ कोई और व्यक्ति शामिल था या नहीं। अकेले इतने बड़े घटनाक्रम को अंजाम देने की उसकी कहानी की भी पुलिस जांच कर रही है। जरूरत पड़ने पर कांट्रैक्ट किलर या किसी अन्य मददगार की भूमिका भी खंगाली जाएगी। बेटी बोली- शुरुआत से चाचा पर था शक मनोज और मीनू की इकलौती बेटी शेफाली ने कहा कि उसने शुरुआत से ही अपने चाचा पर शक जताया था। उसका कहना है कि माता-पिता के लापता होने के बाद उसने पुलिस को संपत्ति विवाद और चाचा के साथ चल रहे तनाव की जानकारी दी थी। घर से मिले खून के निशान को लेकर भी उसने आशंका जताई थी कि उसके माता-पिता के साथ अनहोनी हुई है। पुलिस अब पूरी साजिश की कड़ियां जोड़ रही सिटी एसपी मोहिबुल्लाह अंसारी के अनुसार, दंपती के गुमशुदगी मामले का खुलासा कर लिया गया है। अनुज को वाराणसी से लाकर पूछताछ की गई, जिसके बाद उसकी निशानदेही पर शव बरामद किए गए। पुलिस हत्या के कारण, घटनाक्रम और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। बरामद अवशेषों की डीएनए जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। मुजफ्फरपुर के ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र से तीन महीने पहले लापता लैपटॉप कारोबारी मनोज भगत (48) और उनकी पत्नी मीनू देवी (45) की गुमशुदगी का राज खुल गया है। पुलिस के अनुसार, संपत्ति में बेटी और बहनों को हिस्सा देने की बात से नाराज मनोज के छोटे भाई अविनाश उर्फ अनुज ने ही दंपती की हत्या की थी। पहले उसने भाभी मीनू देवी का गला दबाकर हत्या की। भाई मनोज ने विरोध किया तो घर में रखी पीतल की मूर्ति से उसके सिर पर वार कर दिया। वारदात के बाद दोनों शवों को ठिकाने लगाने के लिए कंबल-बेडशीट में बांधा और कार से करीब 10 किलोमीटर दूर बोचहां थाना क्षेत्र में एनएच-27 किनारे सुनसान जगह पर फेंक दिया। हत्या के बाद आरोपी ने खुद को बचाने के लिए अपनी गुमशुदगी की कहानी भी रची। चार जून को उसकी बहन ने उसके लापता होने की प्राथमिकी दर्ज कराई। इसके बाद पुलिस उसकी तलाश में जुटी रही। तकनीकी जांच में उसकी लोकेशन वाराणसी में मिली। पुलिस ने यूपी पुलिस की मदद से उसे वहां से गिरफ्तार किया। पूछताछ में पुलिस के अनुसार उसने दंपती की हत्या की बात स्वीकार की है। बेटी और बहनों को हिस्सा देने के फैसले से था नाराज पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि मनोज भगत अपनी संपत्ति का हिस्सा अपनी इकलौती बेटी शेफाली और बहनों को देना चाहते थे। अनुज इसका विरोध करता था। वह शेफाली की शादी के पक्ष में भी नहीं था। इसी बात को लेकर दोनों भाइयों के बीच पहले से विवाद चल रहा था। मनोज की बेटी शेफाली ने दंपती के लापता होने के बाद से ही अपने चाचा अनुज पर संदेह जताया था। उसने पुलिस को बताया था कि संपत्ति और जमीन-जायदाद को लेकर उसके चाचा का उसके माता-पिता से विवाद रहता था। घटनास्थल से कुछ तस्वीरें… 19 मई की रात बहस के बाद हुई डबल मर्डर पुलिस के अनुसार, 19 मई की रात संपत्ति को लेकर मनोज और अनुज के बीच फिर विवाद हुआ। इसी दौरान अनुज ने पहले अपनी भाभी मीनू देवी का गला दबा दिया। मनोज ने इसका विरोध किया तो आरोपी ने घर में रखी पीतल की मूर्ति से उनके सिर पर जोरदार वार कर दिया। इससे मनोज की मौत हो गई। पुलिस को घर की जांच के दौरान खून के निशान मिले थे। दीवार पर भी खून के छींटे मिले थे। एफएसएल जांच में खून इंसानी होने की पुष्टि हुई थी। इसी के बाद पुलिस को यह मामला महज गुमशुदगी का नहीं, बल्कि हत्या का होने का संदेह गहरा गया था। शवों को बालू के ढेर पर फेंका, फिर कार से ले गया हत्या के बाद आरोपी ने घर में खून के निशान साफ करने की कोशिश की। इसके बाद दोनों शवों को कंबल और बेडशीट में बांधा। पुलिस के अनुसार, शवों को घर की छत से नीचे बालू के ढेर पर गिराया गया। बाद में दोनों को कार में रखा गया और बोचहां थाना क्षेत्र में एनएच-27 किनारे राधा स्वामी सत्संग के पास झाड़ियों में फेंक दिया गया। पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर रविवार को वहां से दोनों शवों के कंकालनुमा अवशेष बरामद किए। दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए एसकेएमसीएच भेजा गया है। पहचान की पुष्टि के लिए डीएनए जांच भी कराई जाएगी। शव ठिकाने लगाने के बाद कार बहन के घर छोड़ी पुलिस के अनुसार, दंपती की हत्या के बाद अनुज ने हत्या में इस्तेमाल कार अपनी बहन के घर पर खड़ी कर दी और वहां से निकल गया। इसके कुछ समय बाद चार जून को वह खुद भी गायब हो गया। उसकी बहन ने उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस को उस समय भी अनुज पर संदेह था, लेकिन वह हाथ नहीं आया। देश के कई धार्मिक स्थलों पर घूमता रहा आरोपी पुलिस की जांच के अनुसार, दंपती की हत्या के बाद अनुज अलग-अलग धार्मिक स्थलों पर घूमता रहा। वह केदारनाथ और बद्रीनाथ समेत कई स्थानों पर गया। इसके बाद वह वाराणसी पहुंचा और काशी विश्वनाथ मंदिर के आसपास रहने लगा। इसी दौरान पुलिस को उसकी लोकेशन मिली और यूपी पुलिस की मदद से उसे पकड़ लिया गया। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि दंपती की हत्या और शवों को ठिकाने लगाने में अनुज के साथ कोई और व्यक्ति शामिल था या नहीं। अकेले इतने बड़े घटनाक्रम को अंजाम देने की उसकी कहानी की भी पुलिस जांच कर रही है। जरूरत पड़ने पर कांट्रैक्ट किलर या किसी अन्य मददगार की भूमिका भी खंगाली जाएगी। बेटी बोली- शुरुआत से चाचा पर था शक मनोज और मीनू की इकलौती बेटी शेफाली ने कहा कि उसने शुरुआत से ही अपने चाचा पर शक जताया था। उसका कहना है कि माता-पिता के लापता होने के बाद उसने पुलिस को संपत्ति विवाद और चाचा के साथ चल रहे तनाव की जानकारी दी थी। घर से मिले खून के निशान को लेकर भी उसने आशंका जताई थी कि उसके माता-पिता के साथ अनहोनी हुई है। पुलिस अब पूरी साजिश की कड़ियां जोड़ रही सिटी एसपी मोहिबुल्लाह अंसारी के अनुसार, दंपती के गुमशुदगी मामले का खुलासा कर लिया गया है। अनुज को वाराणसी से लाकर पूछताछ की गई, जिसके बाद उसकी निशानदेही पर शव बरामद किए गए। पुलिस हत्या के कारण, घटनाक्रम और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। बरामद अवशेषों की डीएनए जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

