मंदसौर के प्रसिद्ध भगवान पशुपतिनाथ मंदिर में सावन माह के अवसर पर रविवार रात विशेष दीप ज्योति शयन आरती का आयोजन किया गया। यह आरती काशी विश्वनाथ और उज्जैन के बाबा महाकाल मंदिरों की तर्ज पर की गई। मंदिर प्रबंध समिति सावन के प्रत्येक रविवार और सोमवार को यह विशेष आरती आयोजित कर रही है। रविवार रात करीब 10:15 बजे दीप ज्योति आरती प्रारंभ हुई। आरती के समय गर्भगृह की विद्युत रोशनी बंद कर दी गई थी। केवल दीपों की रोशनी में भगवान पशुपतिनाथ की विशेष शयन आरती हुई। दीपों की मंद रोशनी में बाबा पशुपतिनाथ का स्वरूप अत्यंत मनमोहक और आकर्षक दिखाई दिया, जिसे देखकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा गया। श्रद्धालुओं का प्रवेश प्रतिबंधित रहा
विशेष आरती के दौरान गर्भगृह में श्रद्धालुओं का प्रवेश प्रतिबंधित रहा। केवल मंदिर के पुजारी ने गर्भगृह के भीतर जाकर भगवान पशुपतिनाथ की आरती की। आरती से पूर्व बाबा को भस्म का तिलक लगाया गया, जिसके बाद गर्भगृह की विद्युत रोशनी बंद कर दीपों से आरती संपन्न कराई गई। इस दीप ज्योति आरती के दर्शन के लिए मंदसौर सहित आसपास के क्षेत्रों और दूर-दराज से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। आरती के दौरान पूरा मंदिर परिसर ‘बाबा पशुपतिनाथ’ के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने बाबा के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। सावन में रविवार-सोमवार रात ऐसा आयोजन
पशुपतिनाथ मंदिर के मुख्य पुजारी राकेश भट्ट ने बताया कि पवित्र सावन मास के महत्व को देखते हुए मंदिर प्रबंध समिति ने यह निर्णय लिया है। काशी विश्वनाथ और उज्जैन के बाबा महाकाल मंदिरों में होने वाली शयनकालीन आरती की तर्ज पर मंदसौर में भी दीप ज्योति शयन आरती शुरू की गई है। सावन के प्रत्येक रविवार और सोमवार रात को यह विशेष आरती आयोजित की जाएगी। विशेष आरती के दौरान गर्भगृह में दीपों की रोशनी और बाहर की विद्युत सजावट से मंदिर परिसर का दृश्य अत्यंत आकर्षक लग रहा था। श्रद्धालु बाबा के दर्शन के साथ-साथ मंदिर परिसर और पशुपतिनाथ लोक की खूबसूरती भी निहारते दिखे। भक्तों ने इस दीप ज्योति आरती के अनुभव को ‘अद्भुत और आध्यात्मिक’ बताया। सावन माह में आयोजित हो रही यह विशेष दीप ज्योति शयन आरती अब श्रद्धालुओं के लिए धार्मिक आस्था के साथ आकर्षण का नया केंद्र बनती जा रही है।

