रेवाड़ी में बेसहारा पशुओं की समस्या पर प्रशासन की कार्रवाई के बावजूद स्थिति काबू में आती नहीं दिख रही है। पांच दिन में पशुओं के हमले से दो लोगों की मौत और प्रशासन की चेतावनी के बाद भी कुछ पशुपालक बेखौफ नजर आ रहे हैं। पशु पकड़ने वाली टीम के कर्मचारियों के सामने से ही वैन का दरवाजा खोलकर पशुओं को छुड़ाकर ले जाने के मामले सामने आए हैं। इन घटनाओं में महिलाएं भी पशु छुड़ाने में शामिल नजर आईं। पिछले दो दिनों में ऐसे 2 मामले सामने आ चुके हैं। जानकारी के अनुसार, नगर परिषद के ठेकेदार के कर्मचारियों ने रविवार से फेज-2 क्षेत्र में दोबारा बेसहारा पशुओं को पकड़ने का अभियान शुरू किया था। पहले दिन पशुपालकों ने कर्मचारियों से चार पशु छुड़वा लिए। सोमवार देर शाम माता चौक पर पशुओं के हमले में प्रताप सिंह यादव की मौत के बाद तीन पशुपालकों के खिलाफ केस दर्ज किया गया। इसके बाद बुधवार को कर्मचारियों ने अभियान चलाकर करीब 12 पशु पकड़े। इनमें से एक गाय को पशुपालक वैन में चढ़ने के बाद छुड़ाकर ले गए। वीरवार को भी पशुपालकों ने कर्मचारियों को धमकाकर वैन से दूर किया और उसका दरवाजा खोलकर पशुओं को उतार लिया। कर्मचारियों के सामने दिखी दादागिरी पशु छुड़ाने के दौरान कुछ पशुपालक बेखौफ नजर आए। वे वैन के पास पहुंचे और कर्मचारियों की मौजूदगी में रस्सियां खोलकर पशुओं को अपने साथ ले गए। इस दौरान कर्मचारी उन्हें रोकने में असहाय नजर आए। लगातार ऐसी घटनाओं के चलते पशु पकड़ने वाले कर्मचारियों में भी डर और असमंजस की स्थिति बनी हुई है। 4 दिन बाद भी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं ठेकेदार देवेंद्र की शिकायत पर शहर थाना पुलिस ने 17 अगस्त को गुजरवाड़ा निवासी इंद्र गुर्जर, मलखान गुर्जर और फरसा गुर्जर के खिलाफ केस दर्ज किया था। हालांकि, चार दिन बीतने के बाद भी तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। वहीं कैप्टन जगराम यादव की मौत के मामले में भी 15 दिन बाद तक केस दर्ज नहीं होने का आरोप है। पांच दिन में दो लोगों की जा चुकी जान रेवाड़ी में बेसहारा पशुओं के हमले से पांच दिन के भीतर दो लोगों की मौत हो चुकी है। 5 अगस्त को सेक्टर-4 निवासी कैप्टन जगराम यादव सब्जी लेकर घर लौट रहे थे। इसी दौरान गाय और सांड ने उन पर हमला कर दिया। वे स्कूटी समेत सड़क पर गिर गए और उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। इसके बाद 11 अगस्त को माता चौक के पास प्रताप सिंह यादव पर गायों के झुंड ने हमला किया। गंभीर रूप से घायल प्रताप सिंह को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। विरोध के बाद प्रशासन ने दी थी कार्रवाई की चेतावनी दो मौतों के बाद लोगों में आक्रोश फैल गया था। स्थानीय विधायक और पूर्व मंत्री समेत कई लोगों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। धरना-प्रदर्शन के बाद डीसी अभिषेक मीणा ने कहा था कि नोटिस देने के बाद पशु छोड़ने वाले पशुपालकों के खिलाफ केस दर्ज किया जाएगा। डीएमसी ने भी सीएसआई को फटकार लगाते हुए चार महीने की रिपोर्ट तलब की थी। नगर परिषद के ईओ अरुण नांदल ने कहा कि विभाग में सभी काम अलग-अलग अधिकारियों-कर्मचारियों को सौंपे गए हैं। कर्मचारियों से पशु छुड़वाना गलत है। उन्होंने कहा कि यह काम सीएसआई देख रहे हैं और ऐसी घटनाओं पर कार्रवाई के बारे में वही स्थिति स्पष्ट कर सकते हैं। देखें, शहर में बेसहारा पशुओं के तस्वीरें…

