जमुई के बरहट प्रखंड स्थित सरकारी अस्पताल में बच्चे के जन्म के लगभग एक साल बाद भी मां को उसका जन्म प्रमाणपत्र नहीं मिल सका है। प्रमाणपत्र बनवाने के लिए महिला ने अस्पताल और संबंधित कार्यालय के कई चक्कर लगाए। महिला ने आरोप लगाया है कि आशा कार्यकर्ता ने प्रमाणपत्र के लिए 600 से 700 रुपए की मांग की। यह मामला मलयपुर अतिरिक्त उप प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से जुड़ा है। बरहट प्रखंड की नुमर पंचायत के वार्ड संख्या दो निवासी सोनी देवी ने बताया कि उनके बच्चे का जन्म करीब एक साल पहले सरकारी अस्पताल में हुआ था। जन्म के बाद से ही वह लगातार बच्चे का प्रमाणपत्र बनवाने का प्रयास कर रही हैं। सोनी देवी का कहना है कि कई बार अस्पताल और संबंधित कार्यालय जाने के बावजूद उन्हें अब तक प्रमाणपत्र जारी नहीं किया गया। आशा कार्यकर्ता ने मांगी 700 रुपए सोनी देवी ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने आशा कार्यकर्ता रंभा देवी से मदद मांगी तो उनसे 600 से 700 रुपये मांगे गए। मजदूरी करके अपने परिवार का भरण-पोषण करने वाली सोनी के लिए यह रकम जुटाना मुश्किल है। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकारी अस्पताल में प्रसव और स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होने के बावजूद जन्म प्रमाणपत्र जैसे आवश्यक दस्तावेज के लिए पैसे क्यों मांगे जा रहे हैं। वहीं, आशा कार्यकर्ता रंभा देवी ने महिला के आरोपों को गलत बताया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने आज तक किसी से पैसे की मांग नहीं की है, लेकिन यदि कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से कुछ देता है तो वह उसे स्वीकार कर लेती हैं। प्रखंड चिकित्सा पदाधिकारी ने जांच का दिया आश्वासन इस संबंध में प्रखंड चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. विजय कुमार ने कहा कि उन्हें मामले की जानकारी नहीं है। उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के नाम पर किसी ने पैसे की मांग की है, तो मामले की जांच कराई जाएगी। डॉ. कुमार ने यह भी कहा कि संबंधित महिला से संपर्क कर बच्चे का जन्म प्रमाणपत्र बनवाने की कार्रवाई की जाएगी। जांच के बाद ही प्रमाणपत्र में देरी की वास्तविक वजह और पैसे मांगने के आरोप की सच्चाई स्पष्ट हो पाएगी। जमुई के बरहट प्रखंड स्थित सरकारी अस्पताल में बच्चे के जन्म के लगभग एक साल बाद भी मां को उसका जन्म प्रमाणपत्र नहीं मिल सका है। प्रमाणपत्र बनवाने के लिए महिला ने अस्पताल और संबंधित कार्यालय के कई चक्कर लगाए। महिला ने आरोप लगाया है कि आशा कार्यकर्ता ने प्रमाणपत्र के लिए 600 से 700 रुपए की मांग की। यह मामला मलयपुर अतिरिक्त उप प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से जुड़ा है। बरहट प्रखंड की नुमर पंचायत के वार्ड संख्या दो निवासी सोनी देवी ने बताया कि उनके बच्चे का जन्म करीब एक साल पहले सरकारी अस्पताल में हुआ था। जन्म के बाद से ही वह लगातार बच्चे का प्रमाणपत्र बनवाने का प्रयास कर रही हैं। सोनी देवी का कहना है कि कई बार अस्पताल और संबंधित कार्यालय जाने के बावजूद उन्हें अब तक प्रमाणपत्र जारी नहीं किया गया। आशा कार्यकर्ता ने मांगी 700 रुपए सोनी देवी ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने आशा कार्यकर्ता रंभा देवी से मदद मांगी तो उनसे 600 से 700 रुपये मांगे गए। मजदूरी करके अपने परिवार का भरण-पोषण करने वाली सोनी के लिए यह रकम जुटाना मुश्किल है। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकारी अस्पताल में प्रसव और स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होने के बावजूद जन्म प्रमाणपत्र जैसे आवश्यक दस्तावेज के लिए पैसे क्यों मांगे जा रहे हैं। वहीं, आशा कार्यकर्ता रंभा देवी ने महिला के आरोपों को गलत बताया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने आज तक किसी से पैसे की मांग नहीं की है, लेकिन यदि कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से कुछ देता है तो वह उसे स्वीकार कर लेती हैं। प्रखंड चिकित्सा पदाधिकारी ने जांच का दिया आश्वासन इस संबंध में प्रखंड चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. विजय कुमार ने कहा कि उन्हें मामले की जानकारी नहीं है। उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के नाम पर किसी ने पैसे की मांग की है, तो मामले की जांच कराई जाएगी। डॉ. कुमार ने यह भी कहा कि संबंधित महिला से संपर्क कर बच्चे का जन्म प्रमाणपत्र बनवाने की कार्रवाई की जाएगी। जांच के बाद ही प्रमाणपत्र में देरी की वास्तविक वजह और पैसे मांगने के आरोप की सच्चाई स्पष्ट हो पाएगी।

