लखीसराय सदर अस्पताल की व्यवस्था बदत्तर:अशोक धाम हादसे के बाद उठे सवाल; 22 घायल 5-6 कमरों में भर्ती, एक डॉक्टर के भरोसे इलाज

लखीसराय सदर अस्पताल की व्यवस्था बदत्तर:अशोक धाम हादसे के बाद उठे सवाल; 22 घायल 5-6 कमरों में भर्ती, एक डॉक्टर के भरोसे इलाज

लखीसराय के अशोक धाम मंदिर में हुए हादसे के बाद जिला स्वास्थ्य विभाग की आपदा प्रबंधन तैयारियों पर सवाल उठने लगे हैं। हादसे में घायल 22 मरीजों के एक साथ सदर अस्पताल पहुंचने पर अस्पताल की व्यवस्था कमजोर नजर आई। इससे बेहतर आपातकालीन चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के दावों पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। पांच से छह कमरों में भर्ती किए गए घायल हादसे में घायल 22 मरीजों को इमरजेंसी वार्ड समेत अस्पताल के करीब पांच से छह अलग-अलग कमरों में स्थानांतरित करना पड़ा। इन कमरों में पहले से ही सामान्य मरीज भर्ती थे। आपातकालीन मरीजों के लिए अलग से पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण घायलों का इलाज अन्य मरीजों के साथ ही करना पड़ा। एक साथ बड़ी संख्या में घायलों के पहुंचने से अस्पताल में अफरातफरी का माहौल बन गया। स्वास्थ्यकर्मियों को घायलों के इलाज, निगरानी और उन्हें अलग-अलग कमरों में व्यवस्थित करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। अपनों की जानकारी के लिए भटकते रहे परिजन हादसे के बाद सदर अस्पताल पहुंचे मृतकों और घायलों के परिजन अपने प्रियजनों की जानकारी के लिए परेशान दिखे। वे अस्पताल परिसर में इधर-उधर घूमते रहे और स्वास्थ्यकर्मियों व पुलिसकर्मियों से अपने परिजनों के बारे में जानकारी लेते रहे। आमतौर पर आपदा जैसी स्थिति में पीड़ितों और मृतकों की जानकारी देने के लिए हेल्प डेस्क, पूछताछ काउंटर या हेल्पलाइन की व्यवस्था की जाती है। हालांकि, सदर अस्पताल में ऐसी कोई स्पष्ट व्यवस्था नजर नहीं आई, जिससे परिजनों की परेशानी और बढ़ गई। एक चिकित्सक के भरोसे रहे 22 घायल बड़े हादसे के बाद बड़ी संख्या में मरीजों के पहुंचने पर अतिरिक्त चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की जरूरत होती है। लेकिन घटना के दौरान सदर अस्पताल में अतिरिक्त मानव संसाधन की पर्याप्त व्यवस्था नहीं दिखी। इमरजेंसी वार्ड में तैनात एकमात्र चिकित्सक पर ही 22 घायलों की प्राथमिक जांच और निगरानी की जिम्मेदारी आ गई। एक साथ इतने मरीजों को संभालना चिकित्सक के लिए भी बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। आधे से एक घंटे बाद पहुंचे अतिरिक्त चिकित्सक जानकारी के अनुसार, करीब आधे से एक घंटे बाद डीएस, सीएस समेत चार-पांच अन्य चिकित्सक अस्पताल पहुंचे। इसके बाद घायलों की जांच और इलाज की व्यवस्था में तेजी आई। अशोक धाम हादसे ने लखीसराय सदर अस्पताल की आपदा प्रबंधन और इमरजेंसी चिकित्सा व्यवस्था की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि अगर इससे भी बड़ा हादसा होता और घायलों की संख्या कई गुना अधिक होती, तो अस्पताल की मौजूदा व्यवस्था उन्हें किस तरह संभाल पाती। लखीसराय के अशोक धाम मंदिर में हुए हादसे के बाद जिला स्वास्थ्य विभाग की आपदा प्रबंधन तैयारियों पर सवाल उठने लगे हैं। हादसे में घायल 22 मरीजों के एक साथ सदर अस्पताल पहुंचने पर अस्पताल की व्यवस्था कमजोर नजर आई। इससे बेहतर आपातकालीन चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के दावों पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। पांच से छह कमरों में भर्ती किए गए घायल हादसे में घायल 22 मरीजों को इमरजेंसी वार्ड समेत अस्पताल के करीब पांच से छह अलग-अलग कमरों में स्थानांतरित करना पड़ा। इन कमरों में पहले से ही सामान्य मरीज भर्ती थे। आपातकालीन मरीजों के लिए अलग से पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण घायलों का इलाज अन्य मरीजों के साथ ही करना पड़ा। एक साथ बड़ी संख्या में घायलों के पहुंचने से अस्पताल में अफरातफरी का माहौल बन गया। स्वास्थ्यकर्मियों को घायलों के इलाज, निगरानी और उन्हें अलग-अलग कमरों में व्यवस्थित करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। अपनों की जानकारी के लिए भटकते रहे परिजन हादसे के बाद सदर अस्पताल पहुंचे मृतकों और घायलों के परिजन अपने प्रियजनों की जानकारी के लिए परेशान दिखे। वे अस्पताल परिसर में इधर-उधर घूमते रहे और स्वास्थ्यकर्मियों व पुलिसकर्मियों से अपने परिजनों के बारे में जानकारी लेते रहे। आमतौर पर आपदा जैसी स्थिति में पीड़ितों और मृतकों की जानकारी देने के लिए हेल्प डेस्क, पूछताछ काउंटर या हेल्पलाइन की व्यवस्था की जाती है। हालांकि, सदर अस्पताल में ऐसी कोई स्पष्ट व्यवस्था नजर नहीं आई, जिससे परिजनों की परेशानी और बढ़ गई। एक चिकित्सक के भरोसे रहे 22 घायल बड़े हादसे के बाद बड़ी संख्या में मरीजों के पहुंचने पर अतिरिक्त चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की जरूरत होती है। लेकिन घटना के दौरान सदर अस्पताल में अतिरिक्त मानव संसाधन की पर्याप्त व्यवस्था नहीं दिखी। इमरजेंसी वार्ड में तैनात एकमात्र चिकित्सक पर ही 22 घायलों की प्राथमिक जांच और निगरानी की जिम्मेदारी आ गई। एक साथ इतने मरीजों को संभालना चिकित्सक के लिए भी बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। आधे से एक घंटे बाद पहुंचे अतिरिक्त चिकित्सक जानकारी के अनुसार, करीब आधे से एक घंटे बाद डीएस, सीएस समेत चार-पांच अन्य चिकित्सक अस्पताल पहुंचे। इसके बाद घायलों की जांच और इलाज की व्यवस्था में तेजी आई। अशोक धाम हादसे ने लखीसराय सदर अस्पताल की आपदा प्रबंधन और इमरजेंसी चिकित्सा व्यवस्था की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि अगर इससे भी बड़ा हादसा होता और घायलों की संख्या कई गुना अधिक होती, तो अस्पताल की मौजूदा व्यवस्था उन्हें किस तरह संभाल पाती।  

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