कोल लेवी मामले में देवेंद्र यादव को ईओडब्ल्यू का नोटिस:5 अक्टूबर को पेशी, ईओडब्ल्यू दाखिल करेगा आरोप पत्र, उपस्थित रहने के निर्देश

कोल लेवी मामले में देवेंद्र यादव को ईओडब्ल्यू का नोटिस:5 अक्टूबर को पेशी, ईओडब्ल्यू दाखिल करेगा आरोप पत्र, उपस्थित रहने के निर्देश

छत्तीसगढ़ के करीब 540 करोड़ रुपए के कोल लेवी मामले में भिलाई नगर विधायक देवेंद्र यादव को आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो ने नोटिस जारी किया है। ईओडब्ल्यू ने उन्हें 5 अक्टूबर को सुबह 10.30 बजे रायपुर की विशेष अदालत में पेश होने का नोटिस दिया है। जांच एजेंसी इस मामले में अपनी जांच पूरी कर आरोप पत्र पेश करेगी। सितंबर के आखिरी सप्ताह में भी देवेंद्र यादव से रायपुर स्थित आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो के दफ्तर में दो घंटे से ज्यादा पूछताछ हुई थी। पूछताछ का मुख्य आधार सूर्यकांत तिवारी से जुड़ी जांच में मिली डायरी में देवेंद्र यादव का नाम और पैसों के लेन-देन से जुड़ी जानकारी बताई गई है। हालांकि, देवेंद्र यादव ने अपने ऊपर लगे आरोपों को बेबुनियाद बताया है। जानिए क्या है पूरा मामला
इस मामले की शुरुआत 15 जुलाई 2020 से हुई थी। उस समय कोयला परिवहन के लिए इस्तेमाल होने वाली ऑनलाइन अनुमति व्यवस्था में बदलाव कर मैन्युअल प्रक्रिया शुरू की गई। जांच एजेंसियों के मुताबिक, इसके बाद कोयला कारोबारियों और परिवहन करने वालों से हर टन पर 25 रुपए की अवैध वसूली का रास्ता बना। जुलाई 2020 से जून 2022 के बीच इस तरीके से करीब 540 करोड़ रुपए जुटाए जाने का आरोप है। जांच में रायगढ़, कोरबा और सूरजपुर जैसे कोयला उत्पादक जिलों में इस वसूली की व्यवस्था चलने की बात सामने आई है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के हालिया आदेशों में भी जांच एजेंसी के इसी आरोप और 15 जुलाई 2020 के आदेश का उल्लेख है। सूर्यकांत तिवारी की डायरी में खुला था राज
जांच एजेंसियों के अनुसार, मामले के मुख्य आरोपी सूर्यकांत तिवारी से जुड़ी जांच के दौरान डायरी और दूसरे दस्तावेज मिले थे। इनमें पैसों के लेन-देन का ब्योरा होने की बात सामने आई। इसी कड़ी में देवेंद्र यादव का नाम सामने आने के बाद उनसे पूछताछ की गई। जांच के बाद उन्हें भी आरोपी बनाया गया है। अब जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि डायरी में दर्ज रकम और लेन-देन का वास्तविक संबंध क्या था। जांच में यह भी आरोप है कि अवैध तरीके से जुटाई गई रकम का इस्तेमाल राजनीतिक गतिविधियों, चुनावी खर्च और संपत्तियां खरीदने में किया गया। प्रवर्तन निदेशालय ने अपनी जांच में कहा था कि करीब 540 करोड़ रुपए की अवैध वसूली हुई और इसका एक हिस्सा नेताओं तथा अधिकारियों तक पहुंचा। 2024 में ईओडब्ल्यू ने किया था अपराध दर्ज
जांच के अनुसार ऑनलाइन व्यवस्था में बदलाव के बाद कोयला परिवहन की अनुमति के लिए खनन कार्यालय से मैन्युअल मंजूरी जरूरी हो गई। यही प्रक्रिया बाद में अवैध वसूली का जरिया बनी। जांच एजेंसियों के मुताबिक, कोयला कारोबारियों पर अनुमति लेने के लिए तय रकम के अलावा 25 रुपए प्रति टन देने का दबाव बनाया जाता था। इस मामले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो ने जनवरी 2024 में अपराध दर्ज किया था। प्रकरण में तत्कालीन अधिकारियों, कारोबारियों और राजनीतिक लोगों समेत कई लोगों के नाम सामने आए। देवेंद्र यादव का नाम भी आरोपियों की सूची में शामिल किया गया था।

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