चाणक्य के डायरेक्टर बोले- OTT की गालियां बाजार की पसंद:लोग देख रहे तो बनता रहेगा; Gen-G पर कहा- बच्चों से हारने में दिक्कत क्या

चाणक्य के डायरेक्टर बोले- OTT की गालियां बाजार की पसंद:लोग देख रहे तो बनता रहेगा; Gen-G पर कहा- बच्चों से हारने में दिक्कत क्या

मशहूर धारावाहिक ‘चाणक्य’ के निर्देशक और ‘पिंजर’ के फिल्म निर्माता डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी रायपुर पहुंचे। दैनिक भास्कर डिजिटल से खास बातचीत में उन्होंने GEN-G आंदोलन, पेपर लीक, युवाओं के तनाव, OTT पर बढ़ती अश्लीलता और फिल्मों में AI के इस्तेमाल पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि OTT पर कई कार्यक्रम सिर्फ गालियों पर आधारित हैं, लेकिन जब तक बाजार उन्हें देख रहा है, ऐसी चीजें बनती रहेंगी। GEN-G आंदोलन पर उन्होंने कहा कि जीत और हार एक तरह का परसेप्शन है। अगर बच्चों की मांग समय रहते मान ली जाती, तो आंदोलन की नौबत नहीं आती। पढ़िए पूरा इंटरव्यू…
सवाल: जेन-G आंदोलन को आप किस नजरिए से देखते हैं? जवाब: उसके किसी राजनीतिक पहलू पर नहीं कहूंगा, लेकिन यह अवश्य कहूंगा कि एक विद्यार्थी मेहनत करता है और पेपर लीक हो जाते हैं। ऐसे में किसी न किसी को उसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए थी। जीत और हार एक तरह का परसेप्शन है। मैं भगवान बुद्ध को यहां स्मरण कर रहा हूं। जब अजातशत्रु युद्ध में हार गए, तो भगवान वहां पहुंचे और कहा कि जो विजेता होता है, उसे उन्माद होता है और जो पराजित होता है, वह हताश होता है। इसलिए न उन्माद अच्छा है, न हताशा अच्छी है। दोनों को ही छोड़ देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों से हार जाते, तो इसमें दिक्कत थी? समय रहते मांग मान ली जाती, तो आंदोलन नहीं होता। सवाल: OTT प्लेटफॉर्म पर अश्लीलता और गालियों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। इसे आप किस तरह देखते हैं? जवाब: गालियों का हमारे समाज में स्थान रहा है, हमारे सिनेमा में भी इसका स्थान रहा है। लेकिन जब उसका दुरुपयोग होता है, तब लगता है कि ज्यादा हो रहा है। आज के समय में कई कार्यक्रम सिर्फ गालियों पर ही आधारित होते हैं। वे सिर्फ सफल ही नहीं हैं, बल्कि लोग उन्हें पसंद कर रहे हैं। हमारे लोकतंत्र में इतनी स्वतंत्रता है कि जो आप देखते हैं, वह आप देखिए। जब पानी सिर से ऊपर चला जाता है, तब लोग सुप्रीम कोर्ट जाकर गुहार लगाते हैं। जब तक बाजार उसे देख रहा है, कुछ चीजें बनती रहेंगी। जितने भी OTT प्लेटफॉर्म हैं, उनमें भारत के राष्ट्रीय गौरव को लेकर कार्यक्रम ही नहीं बनाए गए हैं। मैंने कई बार उन लोगों से बात की, तो उनका कहना है कि भारत के इतिहास से विश्व के लोग परिचित नहीं हैं। तो मैं उनसे पूछता हूं कि वाइकिंग्स से कौन परिचित था? लेकिन उसे लोगों को दिखाया गया। आप रोम का इतिहास दिखाते हैं, ग्रीस का इतिहास दिखाते हैं, लेकिन भारत का इतिहास नहीं दिखाया जाता। इसके पीछे भी कारण है। इस विषय पर फिर कभी बात करूंगा। सवाल: AI का इस्तेमाल फिल्मों में भी हो रहा है। इसे आप आसान मानते हैं या चुनौती? जवाब: मैं इसे चुनौती बिल्कुल नहीं समझता। यह बहुत ही उपयोगी साधन है। इससे सिनेमा बनाने का लोकतंत्र और विकसित होगा। आज सिनेमा तभी बनता है, जब एक बड़ा सितारा किसी सिनेमा के लिए हां कहता है। यह सच्चाई से हमारा आम दर्शक वाकिफ नहीं है। लोग कहते हैं, खराब सिनेमा बना, अच्छा नहीं लगा, लेकिन वह नहीं जानता कि उसके मूल में हमारा अभिनेता है। वह जिस तरह से कहानी चुनते हैं, न सिर्फ कहानी चुनते हैं, जिस तरह की कहानी डिक्टेट करते हैं, उसके बाद उसका परिणाम है, जो आप देख रहे हो। फिल्म नहीं चली तो सारा दोष निर्देशक के मत्थे चढ़ जाता है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वह शास्त्र है, जहां एक निर्देशक बिना किसी बड़े एक्टर के भी अपनी फिल्म बना सकेगा और अपनी बात कह सकेगा। सवाल: देश के विभाजन के लिए आपकी नजर में कौन जिम्मेदार है? जवाब: मैं इसका उत्तरदायित्व धार्मिक कट्टरता को समझता हूं। साथ ही, उस समय जो देश का नेतृत्व कर रहे थे उन्हें। देश के नेतृत्वकर्ताओं को दो में से एक को चुनना था। एक खंडित भारत, जहां हिंसा न हो या और एक ऐसा आजाद भारत, जिसमें चारों ओर हिंसा हो। उस समय देश के नेतृत्वकर्ताओं ने यह तय किया कि हम खंडित भारत स्वीकार कर लेंगे। मुस्लिम लीग धार्मिक राजनीतिक संगठन था। उन्होंने धर्म के नाम पर एक स्वतंत्र राष्ट्र की मांग की। अगर वे ऐसा न करते तो शायद इतना उन्माद नहीं होता। इसलिए उन्होंने मुसलमानों के लिए राष्ट्र की मांग की थी, लेकिन जिन्होंने मांग की, वे खुद पाकिस्तान भी नहीं गए। सवाल: पाकिस्तान बनने का क्रेडिट मोहम्मद अली जिन्ना किसे दिया करते थे? जवाब: जिन्ना के पास अक्सर लोग जाकर रोया करते थे। हम भारत से यहां आए हैं, पाकिस्तान में, लेकिन हमारी क्या दुर्दशा है। क्योंकि वहां के जो स्थायी मुसलमान थे, उन्होंने जिन्ना को आसानी से स्वीकार नहीं किया था। जो सपना लेकर भारत से गए थे कि पाकिस्तान जाते ही हमें जन्नत मिल जाएगी, वह लोगों को मिली नहीं। एक बार जब कुछ लोग मोहम्मद अली जिन्ना के पास गए थे, तब उन्होंने कहा था कि तुम लोगों का इसमें कोई योगदान नहीं है। इसमें राष्ट्र बनाने में, पाकिस्तान बनाने में योगदान मेरे सेक्रेटरी और मेरे टाइपराइटर का है। मैं लिखवाता गया, वह लिखती गई और उसके बूते पर मैंने भारत से पाकिस्तान ले लिया। सवाल: आपका अगला प्रोजेक्ट क्या है? जवाब: संघर्ष कर रहा हूं, लेकिन इतिहास पर ही काम कर रहा हूं। यह बता देता हूं। ………………….. इससे जुड़ी खबर भी पढ़ें… अविमुक्तेश्वरानंद बोले-कंगना पर किसी का कंट्रोल नहीं, लाइसेंस मिला है: कहा- छत्तीसगढ़ सरकार अब डबल इंजन नहीं, केंद्र की खींची हुई बोगी है छत्तीसगढ़ दौरे पर पहुंचे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने अलग-अलग मुद्दों पर बयान दिया है। उन्होंने जंतर-मंतर में हुए आंदोलन को सरकार की विफलता का आंदोलन बताया। भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि सरकार जनता को डराकर राज कर रही है, ये रावण राज है। पढ़ें पूरी खबर…

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