जहानाबाद के एस.एन. सिन्हा कॉलेज में विश्वविद्यालय अधिनियम 2026 के विरोध में शिक्षक और शिक्षकेत्तर कर्मियों का आंदोलन शुक्रवार को लगातार चौथे दिन भी जारी रहा। शिक्षक-शिक्षकेत्तर कर्मी संयुक्त संघर्ष मोर्चा के तत्वावधान में कॉलेज परिसर स्थित प्रशासनिक भवन के सामने घंटी बजाकर विरोध प्रदर्शन किया गया। आंदोलनकारियों ने नए प्रावधानों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इनसे महाविद्यालय और विश्वविद्यालय की स्वायत्तता प्रभावित होगी। उन्होंने सरकार से अधिनियम को वापस लेने की मांग की और चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन को आगे भी जारी रखा जाएगा। कर्मचारी संघ के शिक्षकेत्तर कर्मी एवं वरीय सहायक संजय कुमार ने अधिनियम को ‘काला कानून’ बताया। उन्होंने कहा कि यह कर्मचारियों के हित में नहीं है और यदि सरकार ने इसे जल्द वापस नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि नए कानून से कर्मचारियों के साथ-साथ महाविद्यालय-विश्वविद्यालय परिवार और छात्र-छात्राएं भी प्रतिकूल रूप से प्रभावित होंगे। वहीं, प्रदर्शन को संबोधित करते हुए शिक्षक डॉ. ओमप्रकाश वर्मा ने अधिनियम को ‘जनविरोधी’ करार दिया। उन्होंने कहा कि इससे कॉलेज और विश्वविद्यालय के शिक्षकों, शिक्षकेत्तर कर्मियों तथा विद्यार्थियों को नुकसान होगा। उन्होंने भी सरकार से इसे तत्काल वापस लेने की मांग की। इस प्रदर्शन के दौरान कॉलेज के शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मी बड़ी संख्या में मौजूद रहे और एकजुटता का प्रदर्शन किया। मौके पर डॉ. अख्तर रोमानी, डॉ. सुबोध कुमार झा, डॉ. शशिधर गुप्ता, डॉ. सुनील कुमार, डॉ. मोहम्मद इंतखाब आलम, श्रीमती कुमकुम कुमारी, डॉ. ज्योतिर्मय, डॉ. कविंद्र भगत, डॉ. नेहा कुमारी, डॉ. यास्मीन बानो, डॉ. शोभा रानी, डॉ. सुमन कुमारी, डॉ. निमिषा किरण, डॉ. सिया शरण, डॉ. हर्ष वर्धन और डॉ. रूपम कुमारी सहित अन्य शिक्षक उपस्थित रहे। शिक्षकेत्तर कर्मचारियों में राजीव नयन, दीपक कुमार, नीलम कुमारी, रंजन कुमार, विकास कुमार, अंकिता, शशिकांत निराला और धर्मेन्द्र कुमार समेत अन्य कर्मियों ने भी प्रदर्शन में सक्रिय भागीदारी निभाई। जहानाबाद के एस.एन. सिन्हा कॉलेज में विश्वविद्यालय अधिनियम 2026 के विरोध में शिक्षक और शिक्षकेत्तर कर्मियों का आंदोलन शुक्रवार को लगातार चौथे दिन भी जारी रहा। शिक्षक-शिक्षकेत्तर कर्मी संयुक्त संघर्ष मोर्चा के तत्वावधान में कॉलेज परिसर स्थित प्रशासनिक भवन के सामने घंटी बजाकर विरोध प्रदर्शन किया गया। आंदोलनकारियों ने नए प्रावधानों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इनसे महाविद्यालय और विश्वविद्यालय की स्वायत्तता प्रभावित होगी। उन्होंने सरकार से अधिनियम को वापस लेने की मांग की और चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन को आगे भी जारी रखा जाएगा। कर्मचारी संघ के शिक्षकेत्तर कर्मी एवं वरीय सहायक संजय कुमार ने अधिनियम को ‘काला कानून’ बताया। उन्होंने कहा कि यह कर्मचारियों के हित में नहीं है और यदि सरकार ने इसे जल्द वापस नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि नए कानून से कर्मचारियों के साथ-साथ महाविद्यालय-विश्वविद्यालय परिवार और छात्र-छात्राएं भी प्रतिकूल रूप से प्रभावित होंगे। वहीं, प्रदर्शन को संबोधित करते हुए शिक्षक डॉ. ओमप्रकाश वर्मा ने अधिनियम को ‘जनविरोधी’ करार दिया। उन्होंने कहा कि इससे कॉलेज और विश्वविद्यालय के शिक्षकों, शिक्षकेत्तर कर्मियों तथा विद्यार्थियों को नुकसान होगा। उन्होंने भी सरकार से इसे तत्काल वापस लेने की मांग की। इस प्रदर्शन के दौरान कॉलेज के शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मी बड़ी संख्या में मौजूद रहे और एकजुटता का प्रदर्शन किया। मौके पर डॉ. अख्तर रोमानी, डॉ. सुबोध कुमार झा, डॉ. शशिधर गुप्ता, डॉ. सुनील कुमार, डॉ. मोहम्मद इंतखाब आलम, श्रीमती कुमकुम कुमारी, डॉ. ज्योतिर्मय, डॉ. कविंद्र भगत, डॉ. नेहा कुमारी, डॉ. यास्मीन बानो, डॉ. शोभा रानी, डॉ. सुमन कुमारी, डॉ. निमिषा किरण, डॉ. सिया शरण, डॉ. हर्ष वर्धन और डॉ. रूपम कुमारी सहित अन्य शिक्षक उपस्थित रहे। शिक्षकेत्तर कर्मचारियों में राजीव नयन, दीपक कुमार, नीलम कुमारी, रंजन कुमार, विकास कुमार, अंकिता, शशिकांत निराला और धर्मेन्द्र कुमार समेत अन्य कर्मियों ने भी प्रदर्शन में सक्रिय भागीदारी निभाई।


