उत्तर प्रदेश के प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों को जोड़ने के लिए सदन में ‘श्रीराम दर्शन रेल पथ कॉरिडोर’ बनाने की मांग उठी है। प्रस्तावित रेल कॉरिडोर अयोध्या से शुरू होकर सुल्तानपुर, अमेठी, प्रतापगढ़, प्रयागराज, कौशांबी होते हुए चित्रकूट तक ले जाने की परिकल्पना की गई है। इससे भगवान श्रीराम से जुड़े तीर्थस्थलों के साथ संतों और धार्मिक परंपराओं से जुड़े प्रमुख स्थान रेल नेटवर्क से जुड़ सकेंगे। प्रस्ताव के अनुसार, रेल कॉरिडोर अयोध्या से शुरू होकर सुल्तानपुर और अमेठी के भादर मां व कालिका देवी धाम से होकर गुजरेगा। इसके बाद प्रतापगढ़ में मां चंडिका देवी धाम, घुइसरनाथ धाम, जगद्गुरु स्वामी करपात्री जी महाराज की जन्मस्थली और मनगढ़ धाम को जोड़ा जाएगा। इसके बाद रेल मार्ग प्रयागराज के श्रृंगवेरपुर धाम और कौशांबी के कड़ा धाम व मंझनपुर से होकर आगे बढ़ेगा। अंतिम चरण में गोस्वामी तुलसीदास की जन्मस्थली राजापुर और चित्रकूट धाम को इस नेटवर्क से जोड़ने का प्रस्ताव है। धार्मिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा प्रस्ताव रखने वालों का कहना है कि यह परियोजना केवल रेल लाइन बिछाने तक सीमित नहीं होगी, बल्कि उत्तर प्रदेश के धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पर्यटन को नई दिशा दे सकती है। एक ही रेल नेटवर्क से कई प्रमुख तीर्थस्थल जुड़ने पर श्रद्धालुओं के लिए यात्रा आसान और सुविधाजनक हो जाएगी। कॉरिडोर बनने से इन धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। इससे होटल, धर्मशाला, परिवहन, प्रसाद, हस्तशिल्प और स्थानीय बाजारों को भी फायदा मिलने की संभावना है। निर्माण से रोजगार, कारोबार को भी मिलेगा फायदा प्रस्ताव के मुताबिक, रेल कॉरिडोर के निर्माण के दौरान प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। वहीं, रेल सेवा शुरू होने के बाद पर्यटन, परिवहन, होटल, खान-पान और अन्य सेवा क्षेत्रों में अप्रत्यक्ष रोजगार बढ़ सकता है। इससे स्थानीय कारोबारियों और छोटे व्यापारियों को लाभ मिलने के साथ अयोध्या से चित्रकूट तक धार्मिक पर्यटन के एक नए सर्किट को विकसित करने में मदद मिल सकती है।

