श्रोता तीन प्रकार के
अपने प्रवचन में दीपकभाई शास्त्री ने बताया कि श्रोता भी तीन प्रकार के होते हैं। उत्तम श्रोता वह है, जो यह मानता है कि भगवान की कृपा और करुणा से जो कुछ प्राप्त हुआ है, वह सब उनके चरणों में समर्पित है। मध्यम श्रोता अपनी किसी आवश्यकता या मनोकामना की पूर्ति के लिए कथा का श्रवण करता है, जबकि हीन श्रोता का मन कथा में न लगकर सांसारिक विषयों में भटकता रहता है। उन्होंने कहा कि कथा का वास्तविक लाभ वही प्राप्त करता है, जो स्वयं को भगवान के प्रति पूर्ण रूप से समर्पित कर देता है। दीपकभाई शास्त्री ने शिवपुराण के वक्ताओं के गुणों का भी वर्णन किया।
लोककल्याण और आत्मकल्याण
उन्होंने कहा कि उत्तम वक्ता निष्काम भाव से भगवान को कथा समर्पित करता है और स्वयं को केवल माध्यम मानता है। मध्यम वक्ता के मन में कथा के दौरान कभी-कभी सांसारिक विचार आ जाते हैं, जबकि हीन वक्ता आरंभ से लेकर समापन तक केवल अपने स्वार्थ और लाभ की चिंता करता रहता है। उन्होंने कहा कि कथा का उद्देश्य धन या यश प्राप्त करना नहीं, बल्कि लोककल्याण और आत्मकल्याण होना चाहिए।
हर-हर भोले
कथा के दौरान बार-बार ओम नम: शिवाय, हर-हर भोले और ओम नम: शिवाय के जयघोष से पूरा कथा पंडाल गुंजायमान हो उठा। श्रद्धालु भक्ति रस में डूबकर भगवान शिव की आराधना करते रहे और वातावरण पूर्णत: शिवमय बना रहा। अपने प्रवचन में उन्होंने शिव महापुराण की सात संहिताओं का भी उल्लेख किया और बताया कि इसमें विद्येश्वर संहिता, रुद्र संहिता, शतरुद्र संहिता, कोटिरुद्र संहिता, कुमार संहिता, कैलाश संहिता तथा वायवीय संहिता का समावेश है।
प्रतिदिन कथा का श्रवण
श्री गुजरात समाज के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में प्रमुख शैलेशभाई पटेल, कार्यदर्शी सुनीलभाई लधड़ तथा महोत्सव चेयरमैन गिरीशभाई उपाध्याय सहित समाज के अनेक पदाधिकारी और कार्यकर्ता व्यवस्थाओं में जुटे हुए हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रतिदिन कथा का श्रवण कर धर्म लाभ प्राप्त कर रहे हैं। आयोजन समिति के अनुसार आगामी दिनों में शिव महापुराण के अंतर्गत सती चरित्र, शिव-पार्वती विवाह, शिव तांडव, गणपति प्राकट्य और ज्योतिर्लिंग महिमा जैसे दिव्य प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा। समापन अवसर पर यज्ञ, शिव सहस्रनामावली पाठ और महाप्रसाद का आयोजन भी होगा।


