विनोद जैन/Chhattisgarh Politics: गोबरा नवापारा। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष धनेंद्र साहू ने राज्य सरकार की फसल विविधीकरण योजना पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि खरीफ सीजन में धान की जगह अन्य फसलों की खेती करने पर 15 हजार रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा प्रदेश की वास्तविक कृषि परिस्थितियों से मेल नहीं खाती। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार फसल विविधीकरण के नाम पर किसानों को धान उत्पादन से दूर करने का प्रयास कर रही है।
जारी प्रेस विज्ञप्ति में साहू ने कहा कि छत्तीसगढ़ की कृषि व्यवस्था और खेतों की भौगोलिक संरचना को समझे बिना ऐसी योजनाओं की घोषणा करना किसानों को भ्रमित करने जैसा है। उनका कहना है कि प्रदेश के अधिकांश खेतों की बनावट ऐसी है, जहां एक खेत से दूसरे खेत तक पानी का प्रवाह होता है और बड़ी मात्रा में जलभराव की स्थिति बनी रहती है।
Farmers News: धान के लिए उपयुक्त हैं प्रदेश के अधिकांश खेत
धनेंद्र साहू ने कहा कि छत्तीसगढ़ की बड़ी आबादी कृषि पर निर्भर है और प्रदेश की पहचान देश के प्रमुख धान उत्पादक राज्यों में होती है। यहां की भूमि और जलवायु मुख्य रूप से धान उत्पादन के अनुकूल है। उन्होंने कहा कि जिन खेतों में अधिक जलभराव होता है, वहां धान और कुछ हद तक गन्ने जैसी फसलें ही बेहतर उत्पादन दे सकती हैं।
ऐसे में खरीफ सीजन के दौरान दलहन, तिलहन अथवा अन्य वैकल्पिक फसलों की खेती अधिकांश किसानों के लिए व्यवहारिक नहीं है। साहू का कहना है कि सरकार को योजनाएं बनाते समय किसानों की जमीनी परिस्थितियों, मिट्टी की प्रकृति और जल उपलब्धता जैसे कारकों का ध्यान रखना चाहिए।
पहले भी सफल नहीं हो पाए ऐसे प्रयोग
पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए पूर्व में भी कई सरकारों द्वारा विभिन्न योजनाएं लागू की गई थीं, लेकिन प्रदेश की भौगोलिक और कृषि परिस्थितियों के कारण उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी। उन्होंने कहा कि किसान धान की खेती किसी मजबूरी में नहीं करते, बल्कि भूमि की प्रकृति, उत्पादन क्षमता और आर्थिक लाभ को ध्यान में रखते हुए धान को प्राथमिकता देते हैं। ऐसे में केवल प्रोत्साहन राशि की घोषणा करके किसानों को दूसरी फसलों की ओर मोड़ना व्यावहारिक नहीं होगा।
Dhanendra Sahu Statement: धान खरीदी और भंडारण की समस्या से बचना चाहती है सरकार?
धनेंद्र साहू ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार धान खरीदी की बढ़ती मात्रा और भंडारण की समस्या को लेकर चिंतित है। उनका कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा समर्थन मूल्य पर खरीदे गए धान से तैयार चावल का पर्याप्त उठाव नहीं किए जाने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र और राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो तथा चावल के पूर्ण उठाव की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, तो किसानों के सामने ऐसी समस्या खड़ी नहीं होगी। साहू ने सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार को धान उत्पादन कम करने की दिशा में काम करने के बजाय किसानों की उपज के उचित प्रबंधन और विपणन पर ध्यान देना चाहिए।
किसानों को हतोत्साहित करने का आरोप
कांग्रेस नेता ने कहा कि एक ओर किसान खरीफ सीजन की तैयारियों में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर खाद की उपलब्धता को लेकर भी कई क्षेत्रों से शिकायतें सामने आ रही हैं। ऐसे समय में धान की खेती को लेकर दिए जा रहे संदेश किसानों का मनोबल गिराने वाले हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को किसानों को प्रोत्साहित करने वाली नीतियां बनानी चाहिए, न कि ऐसी घोषणाएं करनी चाहिए जिससे किसानों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो।
Congress statement: वैज्ञानिक आधार और किसानों की सहमति जरूरी
धनेंद्र साहू ने कहा कि फसल विविधीकरण का विरोध नहीं है, लेकिन यह प्रक्रिया किसानों की इच्छा, भूमि की प्रकृति और वैज्ञानिक व्यवहारिकता के आधार पर लागू की जानी चाहिए। केवल प्रोत्साहन राशि का लालच देकर किसानों को धान उत्पादन से दूर करने का प्रयास उचित नहीं है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि किसानों की वास्तविक जरूरतों और प्रदेश की कृषि परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए नीतियां बनाई जाएं, ताकि कृषि उत्पादन, किसानों की आय और खाद्य सुरक्षा तीनों का संतुलन बना रहे। कांग्रेस नेता ने कहा कि छत्तीसगढ़ के किसानों की आजीविका धान पर आधारित है। इसलिए सरकार को ऐसी योजनाओं से बचना चाहिए जो किसानों के बीच भ्रम पैदा करें और कृषि व्यवस्था को प्रभावित करें।


