प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पिछले 12 वर्षों के कार्यकाल में आयकर बोझ में आई कमी सरकार की ‘रामराज्य’ की अवधारणा को दर्शाती है। निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में मोदी के सबसे लंबा कार्यकाल पूरा करने के अवसर पर जारी एक सरकारी पुस्तिका में यह बात कही गई है।
बुधवार को मोदी सरकार की तरफ से जारी इस पुस्तिका के मुताबिक, माल एवं सेवा कर (जीएसटी), चेहरा-रहित कर व्यवस्था और डिजिटल इंडिया जैसे सुधारों ने सार्वजनिक व्यवस्था में भरोसा बढ़ाया है, जो भारत को पांच लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने में मददगार होगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू का लगातार 4,398 दिनों तक पद पर रहने का रिकॉर्ड पार कर लिया। मोदी ने 26 मई 2014 को पहली बार पद संभाला था और 2019 में दोबारा निर्वाचित हुए थे। उनका तीसरा कार्यकाल नौ जून 2024 को शुरू हुआ था।
मोदी सरकार की उपलब्धियों को रेखांकित करने वाली इस पुस्तिका में कहा गयाहै कि करदाताओं के बढ़ते भरोसे से सड़कों, अस्पतालों और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ा है, जिससे देश के भविष्य को मजबूती मिली है।
पुस्तिका कहती है कि 2014 के बाद आयकर में चार बार राहत दी गई है और कर-मुक्त आय की सीमा दो लाख रुपये से बढ़ाकर 12.75 लाख रुपये कर दी गई है। इसी अवधि में आयकर दाताओं की संख्या 5.26 करोड़ से बढ़कर 12.13 करोड़ हो गई।
पुस्तिका के मुताबिक, “जब सरकार की आय बढ़ी, तो वह खजाने में ही नहीं टिकी रही, बल्कि नागरिकों के पास वापस गई।”
इसके साथ ही, मोदी सरकार के कार्यकाल में आयकर रिफंड की प्रक्रिया में तेजी से करदाताओं की नकदी उपलब्धता में भी सुधार हुआ है।
पुस्तिका में कहा गया, कर बोझ घटा है और लोगों का भरोसा बढ़ा है। इसका परिणाम यह है कि करदाताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है क्योंकि लोग देख रहे हैं कि उनका पैसा सड़कों, अस्पतालों और देश के भविष्य पर खर्च हो रहा है। यही सुशासन है और यही ‘रामराज्य’ का संदेश है।
सरकार की तरफ से जारी पुस्तिका के मुताबिक, भारत की अर्थव्यवस्था पांच नाजुक देशों (फ्रेजाइल फाइव) की श्रेणी से निकलकर सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बन गई है। इसमें मुद्रास्फीति नियंत्रण, जीएसटी लागू करने और बैंकिंग सुधारों के जरिए फंसा कर्ज (एनपीए) घटाने जैसे सुधारात्मक कदमों को अहम बताया गया है।
पुस्तिका के मुताबिक, सुधारों के 12 वर्ष अब विश्वास के 12 वर्ष बन गए हैं। चाहे जीएसटी हो, चेहरा-रहित कर व्यवस्था हो या डिजिटल इंडिया, हर कदम ने नागरिकों को यह महसूस कराया है कि वे भी राष्ट्र निर्माण में भागीदार हैं। भारत पांच लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की तरफ अग्रसर है।
यह केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि हर भारतीय के सपनों की उड़ान है।
इसके अनुसार, जीएसटी व्यवस्था में सुधार किए जाने के बाद कर संग्रह अप्रैल में 2.42 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने करीब दो लाख करोड़ रुपये का लाभ कमाया।
पुस्तिका में कहा गया कि मध्यम वर्ग इन सुधारों का सबसे बड़ा लाभार्थी बनकर उभरा है और घरेलू खपत में करीब दो लाख करोड़ रुपये की वृद्धि हुई है।


