ममता बनर्जी की करीबी रहीं सुष्मिता देव ने बुधवार को राज्यसभा सांसद से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफा देने के बाद सुष्मिता की असम सीएम हिमंता बिस्वा सरमा के साथ मुलाकात की एक तस्वीर भी सामने आई। सूत्रों के मुताबिक, सुष्मिता भाजपा में शामिल हो सकती हैं। पिछले 3 दिनों में टीएमसी के दो राज्यसभा सांसद इस्तीफा दे चुके हैं। इससे पहले 8 जून को सुखेंदु शेखर ने सांसद पद से इस्तीफा दे दिया था, पार्टी भी छोड़ दी थी। त्यागपत्र में उन्होंने ममता के 15 साल के अराजक शासन को पार्टी की हार का नतीजा बताया था। लोकसभा में TMC के अभी 28 और राज्यसभा में 13 सांसद हैं। इससे पहले 3 जून को बंगाल के 80 में से 58 विधायक अलग गुट बना चुके हैं। इस गुट ने ऋतब्रत को अपना नेता बनाया है। TMC सांसदों और विधायकों की ममता से बगावत का घटनाक्रम… 8 जून: ममता बनर्जी के 28 में से 20 लोकसभा सांसद टूटे 8 जून को टीएमसी के लोकसभा के 28 सांसदों में से 20 ने एनडीए सरकार को समर्थन देने का फैसला किया था। सांसद और TMC की पूर्व नेता काकोली घोष दस्तीदार ने कहा था कि सांसदों के साइन वाला पत्र लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को भेज दिया है। इसमें अलग संसदीय ब्लॉक के रूप में अलग बैठने की व्यवस्था की मांग भी की गई है। 3 जून: 28 साल पुरानी TMC में बगावत, अलग हुए 58 विधायक 3 जून को टीएमसी में पहली बार बगावत की खबर सामने आई थी। 58 बागी विधायकों ने पार्टी से निकाले गए विधायक ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता चुना। विधानसभा स्पीकर रथींद्र बोस को समर्थन पत्र दिया। इसमें मांग की गई कि ऋतब्रत को नेता विपक्ष घोषित किया जाए। स्पीकर ने मंजूरी दे दी। TMC बचाने के लिए ममता-अभिषेक की 3 कोशिशें… टीएमसी में फूट क्यों पड़ रही है, 5 वजहें… 1. विधानसभा चुनाव में हार: चुनावी हार के बाद पार्टी नेतृत्व और रणनीति पर सवाल उठने लगे। कई नेताओं ने हार के लिए संगठन को जिम्मेदार ठहराया। 2. अभिषेक बनर्जी का विरोध: पार्टी के एक वर्ग को लगता है कि फैसले कुछ नेताओं तक सीमित हो गए हैं। बागी गुट खुलकर अभिषेक के नेतृत्व पर सवाल उठा रहा है। 3. नेता प्रतिपक्ष को लेकर विवाद: ममता गुट और बागी गुट ने अलग-अलग नाम आगे बढ़ाए, जिससे टकराव खुलकर सामने आ गया। 4. हस्ताक्षर फर्जीवाड़ा मामला: नेता प्रतिपक्ष के चयन से जुड़े कथित फर्जी हस्ताक्षर विवाद ने पार्टी की अंदरूनी लड़ाई को कानूनी और राजनीतिक संकट में बदल दिया। 5. संगठन में असंतोष और गुटबाजी: विधायकों और सांसदों के एक बड़े वर्ग में लंबे समय से असंतोष था, जो चुनावी हार के बाद खुली बगावत में बदल गया।
ममता की करीबी सुष्मिता देव का राज्यसभा से इस्तीफा:असम सीएम हिमंता से मुलाकात की, भाजपा जॉइन कर सकती हैं


