बक्सर के डुमरांव अनुमंडलीय अस्पताल में नवजात शिशुओं का इलाज मदर न्यूबॉर्न केयर यूनिट (एमएनसीयू) वार्ड के बाहर पेड़ की छांव में किए जाने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। बिजली आपूर्ति ठप होने और भीषण गर्मी के कारण चिकित्सकों को यह कदम उठाना पड़ा। इस घटना ने अस्पताल की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है और जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है। शनिवार को आई तेज आंधी और बारिश के कारण अस्पताल के कई वार्डों की बिजली व्यवस्था प्रभावित हो गई थी। अस्पताल का चेंजर पहले से ही खराब था, जिसके कारण एमएनसीयू में बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी। रविवार दोपहर जब गंभीर स्थिति वाले नवजात शिशुओं को एमएनसीयू में भर्ती करने लाया गया, तो वार्ड में बिजली नहीं थी, जिससे डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई। बताया गया कि एक नवजात की हालत गंभीर थी और उसे तत्काल विशेष देखभाल की आवश्यकता थी। बिजली न होने के कारण प्रभारी उपाधीक्षक डॉ. प्रेमा कुमारी और शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक कुमार ने तत्परता दिखाते हुए एमएनसीयू वार्ड के बाहर गेट के पास पीपल के पेड़ की छांव में ही नवजात का उपचार शुरू किया। इस त्वरित कार्रवाई से बच्चे की जान बचाई जा सकी। इलाज के बाद एक अन्य बच्चे को बेहतर उपचार के लिए बक्सर रेफर किया गया। कई महीनों से खराब था चेंजर यह मामला तब और गंभीर हो गया जब सामने आया कि अस्पताल का चेंजर कई महीनों से खराब पड़ा है। अस्पताल प्रबंधन ने 22 मई को ही सिविल सर्जन कार्यालय को इसकी लिखित सूचना दे दी थी, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया था। अंततः, हंगामे और अफरा-तफरी के बीच एक मिस्त्री को बुलाकर चेंजर को हटाया गया और सीधे तार जोड़कर बिजली आपूर्ति बहाल की गई। शिशु रोग विशेषज्ञों के अनुसार एमएनसीयू में भर्ती नवजातों के लिए नियंत्रित तापमान अत्यंत आवश्यक होता है। नवजात का शरीर तापमान 36.5 से 37.4 डिग्री सेल्सियस के बीच बनाए रखना जरूरी है। वहीं एमएनसीयू कक्ष का तापमान 22 से 26 डिग्री सेल्सियस रहना चाहिए। ऐसी स्थिति में बिजली गुल होने से नवजातों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है। भवन हुआ जर्जर, छत से टपकता है पानी अस्पताल की बदहाल स्थिति भी इस घटना से उजागर हुई है। कई स्थानों पर एमसीबी खराब हैं, भवन जर्जर हो चुका है, छत से पानी टपकता है और बार-बार ट्रिपिंग की समस्या बनी रहती है। बढ़ते बिजली लोड के कारण लगाया गया विशेष ट्रांसफार्मर भी पर्याप्त साबित नहीं हो रहा है। मामले के सामने आने के बाद सिविल सर्जन डॉ. शिव प्रसाद चक्रवर्ती ने कहा है कि घटना की जांच के लिए एसआईटी गठित कर दी गई है। संबंधित कर्मियों और अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा जा रहा है। जांच में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह घटना सरकारी अस्पतालों की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है, जहां जीवन बचाने के लिए बने वार्ड में ही बिजली व्यवस्था ध्वस्त होने से नवजातों का इलाज खुले में करना पड़ रहा है। बक्सर के डुमरांव अनुमंडलीय अस्पताल में नवजात शिशुओं का इलाज मदर न्यूबॉर्न केयर यूनिट (एमएनसीयू) वार्ड के बाहर पेड़ की छांव में किए जाने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। बिजली आपूर्ति ठप होने और भीषण गर्मी के कारण चिकित्सकों को यह कदम उठाना पड़ा। इस घटना ने अस्पताल की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है और जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है। शनिवार को आई तेज आंधी और बारिश के कारण अस्पताल के कई वार्डों की बिजली व्यवस्था प्रभावित हो गई थी। अस्पताल का चेंजर पहले से ही खराब था, जिसके कारण एमएनसीयू में बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी। रविवार दोपहर जब गंभीर स्थिति वाले नवजात शिशुओं को एमएनसीयू में भर्ती करने लाया गया, तो वार्ड में बिजली नहीं थी, जिससे डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई। बताया गया कि एक नवजात की हालत गंभीर थी और उसे तत्काल विशेष देखभाल की आवश्यकता थी। बिजली न होने के कारण प्रभारी उपाधीक्षक डॉ. प्रेमा कुमारी और शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक कुमार ने तत्परता दिखाते हुए एमएनसीयू वार्ड के बाहर गेट के पास पीपल के पेड़ की छांव में ही नवजात का उपचार शुरू किया। इस त्वरित कार्रवाई से बच्चे की जान बचाई जा सकी। इलाज के बाद एक अन्य बच्चे को बेहतर उपचार के लिए बक्सर रेफर किया गया। कई महीनों से खराब था चेंजर यह मामला तब और गंभीर हो गया जब सामने आया कि अस्पताल का चेंजर कई महीनों से खराब पड़ा है। अस्पताल प्रबंधन ने 22 मई को ही सिविल सर्जन कार्यालय को इसकी लिखित सूचना दे दी थी, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया था। अंततः, हंगामे और अफरा-तफरी के बीच एक मिस्त्री को बुलाकर चेंजर को हटाया गया और सीधे तार जोड़कर बिजली आपूर्ति बहाल की गई। शिशु रोग विशेषज्ञों के अनुसार एमएनसीयू में भर्ती नवजातों के लिए नियंत्रित तापमान अत्यंत आवश्यक होता है। नवजात का शरीर तापमान 36.5 से 37.4 डिग्री सेल्सियस के बीच बनाए रखना जरूरी है। वहीं एमएनसीयू कक्ष का तापमान 22 से 26 डिग्री सेल्सियस रहना चाहिए। ऐसी स्थिति में बिजली गुल होने से नवजातों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है। भवन हुआ जर्जर, छत से टपकता है पानी अस्पताल की बदहाल स्थिति भी इस घटना से उजागर हुई है। कई स्थानों पर एमसीबी खराब हैं, भवन जर्जर हो चुका है, छत से पानी टपकता है और बार-बार ट्रिपिंग की समस्या बनी रहती है। बढ़ते बिजली लोड के कारण लगाया गया विशेष ट्रांसफार्मर भी पर्याप्त साबित नहीं हो रहा है। मामले के सामने आने के बाद सिविल सर्जन डॉ. शिव प्रसाद चक्रवर्ती ने कहा है कि घटना की जांच के लिए एसआईटी गठित कर दी गई है। संबंधित कर्मियों और अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा जा रहा है। जांच में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह घटना सरकारी अस्पतालों की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है, जहां जीवन बचाने के लिए बने वार्ड में ही बिजली व्यवस्था ध्वस्त होने से नवजातों का इलाज खुले में करना पड़ रहा है।


