बिहारशरीफ में लगातार नीचे जा रहा भू-जलस्तर:शहर के 25 वार्ड ड्राई जोन में तब्दील, 50 से 45 MLD पहुंची पानी की कुल सप्लाई

बिहारशरीफ में लगातार नीचे जा रहा भू-जलस्तर:शहर के 25 वार्ड ड्राई जोन में तब्दील, 50 से 45 MLD पहुंची पानी की कुल सप्लाई

भीषण गर्मी और तपिश के बीच बिहारशरीफ शहर का भू-जलस्तर तेजी से पाताल की ओर खिसक रहा है। शहर में पानी की किल्लत इस कदर बढ़ गई है कि अगर अगले एक महीने के भीतर झमाझम बारिश नहीं हुई, तो शहरवासियों को भयंकर जल संकट का सामना करना पड़ेगा। पानी का लेयर लगातार नीचे जाने का सीधा और गंभीर असर शहर की जलापूर्ति व्यवस्था पर पड़ा है। हालात ये हैं कि शहरी इलाके के लोगों के कंठ तर करने में लगे 97 पंप हाउस अब हांफने लगे हैं और शहर के 51 में से 25 वार्ड पूरी तरह से ड्राई जोन में तब्दील हो चुके हैं। इन सूखाग्रस्त वार्डों में फिलहाल शहर के बाहरी हिस्सों की बोरिंग से पानी की सप्लाई कर किसी तरह काम चलाया जा रहा है। 50 से 45 एमएलडी पहुंचा पानी का सप्लाई भू-जलस्तर में भारी गिरावट के कारण शहर में पानी की कुल सप्लाई 50 एमएलडी (मिलियन लीटर पर डे) से घटकर अब मात्र 45 एमएलडी पर आ गई है। पानी का स्तर नीचे जाने से पंपों पर अत्यधिक दबाव पड़ रहा है। पानी छोड़ने और ओवरलोडिंग के कारण पिछले महज दो महीनों के भीतर शहर के 50 पंप हाउसों (बोरिंग) के मोटर जल चुके हैं। शहरवासियों की मांग को पूरी करने के लिए दिन के 24 घंटों में से 20-20 घंटे मोटर चलाने पड़ रहे हैं, जिससे तकनीकी खराबी और मोटर जलने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। हालात की गंभीरता को लेकर बुडको के कार्यपालक अभियंता कुंदन त्रिपाठी ने गहरी चिंता जाहिर की है। उन्होंने बताया कि नगर निगम और बुडको के अधीन कुल 97 पंप हाउस संचालित हैं। जलस्तर नीचे जाने के कारण हर दिन एक-दो बोरिंग के मोटर जल रहे हैं। हाल के तीन दिनों में ही खासगंज, लेबर हाउस और बिहार थाना स्थित बोरिंग के मोटर जल गए। बचाव कार्य के तहत जलापूर्ति सामान्य बनाए रखने के लिए 50 से अधिक पंप हाउसों में 10 फीट तक अतिरिक्त पाइप जोड़कर मोटरों को और नीचे लटकाया गया है। शहर में 500 फीट की गहराई तक उच्च क्षमता वाली बोरिंग विभागीय अधिकारियों के अनुसार, शहर में 450 से 500 फीट गहराई तक की उच्च क्षमता वाली बोरिंग की गई है, लेकिन पानी नीचे खिसकने से मोटरों को 250 फीट गहराई तक लटकाना पड़ा है। इसका अधिकतम तकनीकी मानक 270 फीट ही है। अगर पानी का स्तर 270 फीट से भी नीचे गया, तो मोटर को और गहराई में ले जाने के बावजूद पर्याप्त पानी ऊपर खींचना संभव नहीं हो पाएगा। एक तरफ पानी का मुख्य स्रोत (भू-जल) दम तोड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ वैकल्पिक व्यवस्थाएं भी पूरी तरह से ध्वस्त नजर आ रही हैं। जलापूर्ति बाधित होने पर जनता को राहत देने के लिए शहर में बनाए गए कई स्टैंड पोस्ट आज सिर्फ शो-पीस बनकर रह गए हैं, जिनसे पानी की एक बूंद भी नहीं टपकती। कभी शहर की प्यास बुझाने वाले चापाकल तो अब पूरी तरह इतिहास बन चुके हैं। सार्वजनिक स्थलों पर अब हैंडपंप ढूंढने से भी नहीं मिलते। साल 2007 में नगर परिषद से नगर निगम बनने के बाद 2015 तक जलापूर्ति की जिम्मेदारी पीएचईडी के पास थी, तब केवल तीन जलमीनारें थीं जो अब बढ़कर 10 हो गई हैं। वर्तमान में शहर के लगभग 63 हजार घरों में पानी की सप्लाई इन्हीं 97 पम्प हाउसों, 10 जलमीनारों और 2 संप हाउस के भरोसे टिकी है। अगर जल्द ही अच्छी बारिश नहीं हुई, तो बिहारशरीफ में पानी के लिए हाहाकार मचना तय है। भीषण गर्मी और तपिश के बीच बिहारशरीफ शहर का भू-जलस्तर तेजी से पाताल की ओर खिसक रहा है। शहर में पानी की किल्लत इस कदर बढ़ गई है कि अगर अगले एक महीने के भीतर झमाझम बारिश नहीं हुई, तो शहरवासियों को भयंकर जल संकट का सामना करना पड़ेगा। पानी का लेयर लगातार नीचे जाने का सीधा और गंभीर असर शहर की जलापूर्ति व्यवस्था पर पड़ा है। हालात ये हैं कि शहरी इलाके के लोगों के कंठ तर करने में लगे 97 पंप हाउस अब हांफने लगे हैं और शहर के 51 में से 25 वार्ड पूरी तरह से ड्राई जोन में तब्दील हो चुके हैं। इन सूखाग्रस्त वार्डों में फिलहाल शहर के बाहरी हिस्सों की बोरिंग से पानी की सप्लाई कर किसी तरह काम चलाया जा रहा है। 50 से 45 एमएलडी पहुंचा पानी का सप्लाई भू-जलस्तर में भारी गिरावट के कारण शहर में पानी की कुल सप्लाई 50 एमएलडी (मिलियन लीटर पर डे) से घटकर अब मात्र 45 एमएलडी पर आ गई है। पानी का स्तर नीचे जाने से पंपों पर अत्यधिक दबाव पड़ रहा है। पानी छोड़ने और ओवरलोडिंग के कारण पिछले महज दो महीनों के भीतर शहर के 50 पंप हाउसों (बोरिंग) के मोटर जल चुके हैं। शहरवासियों की मांग को पूरी करने के लिए दिन के 24 घंटों में से 20-20 घंटे मोटर चलाने पड़ रहे हैं, जिससे तकनीकी खराबी और मोटर जलने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। हालात की गंभीरता को लेकर बुडको के कार्यपालक अभियंता कुंदन त्रिपाठी ने गहरी चिंता जाहिर की है। उन्होंने बताया कि नगर निगम और बुडको के अधीन कुल 97 पंप हाउस संचालित हैं। जलस्तर नीचे जाने के कारण हर दिन एक-दो बोरिंग के मोटर जल रहे हैं। हाल के तीन दिनों में ही खासगंज, लेबर हाउस और बिहार थाना स्थित बोरिंग के मोटर जल गए। बचाव कार्य के तहत जलापूर्ति सामान्य बनाए रखने के लिए 50 से अधिक पंप हाउसों में 10 फीट तक अतिरिक्त पाइप जोड़कर मोटरों को और नीचे लटकाया गया है। शहर में 500 फीट की गहराई तक उच्च क्षमता वाली बोरिंग विभागीय अधिकारियों के अनुसार, शहर में 450 से 500 फीट गहराई तक की उच्च क्षमता वाली बोरिंग की गई है, लेकिन पानी नीचे खिसकने से मोटरों को 250 फीट गहराई तक लटकाना पड़ा है। इसका अधिकतम तकनीकी मानक 270 फीट ही है। अगर पानी का स्तर 270 फीट से भी नीचे गया, तो मोटर को और गहराई में ले जाने के बावजूद पर्याप्त पानी ऊपर खींचना संभव नहीं हो पाएगा। एक तरफ पानी का मुख्य स्रोत (भू-जल) दम तोड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ वैकल्पिक व्यवस्थाएं भी पूरी तरह से ध्वस्त नजर आ रही हैं। जलापूर्ति बाधित होने पर जनता को राहत देने के लिए शहर में बनाए गए कई स्टैंड पोस्ट आज सिर्फ शो-पीस बनकर रह गए हैं, जिनसे पानी की एक बूंद भी नहीं टपकती। कभी शहर की प्यास बुझाने वाले चापाकल तो अब पूरी तरह इतिहास बन चुके हैं। सार्वजनिक स्थलों पर अब हैंडपंप ढूंढने से भी नहीं मिलते। साल 2007 में नगर परिषद से नगर निगम बनने के बाद 2015 तक जलापूर्ति की जिम्मेदारी पीएचईडी के पास थी, तब केवल तीन जलमीनारें थीं जो अब बढ़कर 10 हो गई हैं। वर्तमान में शहर के लगभग 63 हजार घरों में पानी की सप्लाई इन्हीं 97 पम्प हाउसों, 10 जलमीनारों और 2 संप हाउस के भरोसे टिकी है। अगर जल्द ही अच्छी बारिश नहीं हुई, तो बिहारशरीफ में पानी के लिए हाहाकार मचना तय है।  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *