रतलाम. खरीफ सीजन में किसान खेतों की हंकाई कर अब जुताई की तैयारी में हैं, इस साल अधिकांश वर्तमान मौसम और मानसून को देखते हुए बीजों की नई किस्मों के चयन पर जोर दे रहे हैं। दूसरी तरफ बीज के सोयाबीन के भाव इन दिनों आसमान छू रहे हैं।
अच्छी किस्मों के बीज 8500 से 15 हजार रुपए प्रति क्विंटल से भी अधिक चल रहे हैं। मौसम विभाग के अनुसार मानसून 20-21 तारीख से सर्किय होना बता रहा हैं। प्री-मानसून के कारण कुछ विकासखंडों में एक-दो इंच तक बारिश हो चुकी हैं।
इन किस्मों पर अधिक ध्यान
किसानों के अनुसार एनआरसी 150, 2303, 2042, ब्लेक बोर्ड, 2218, 6124 आदि किस्मों पर अधिक पसंद की जा रही हैं। किसान जयप्रकाश पाटीदार ने बताया कि बीज महंगा हो गया हैं, मंडी में भी अचानक भाव में तेजी का रूख बना हुआ है। कई किसान घर तो जिनके पास व्यवस्था नहीं हैं वे उज्जैन, धार, देवास, होशंगाबाद, महाराष्ट्र से कुछ नई वैरायटियां लेकर आए हैं।
मंडी में ऊंचे सोयाबीन 7 हजार से अधिक
मंडी में सोयाबीन के भाव इन दिनों 3560 से 7460 रुपए प्रति क्विंटल के भाव तक नीलाम हो रहे हैं, वर्तमान में आवक 2607 क्विंटल रही। औसत मूल्य 6475 रुपए प्रति क्विंटल रहें। जबकि मक्का की आवक 13 क्विंटल रही और 2045 से 2098 रुपए प्रति क्विंटल के भाव रहे। गेहूं 9347 क्विंटल आवक रही और भाव 2.350 से 3501 रुपए प्रति क्विंटल रहे। औसत भाव 2690 रुपए प्रति क्विंटल रहे।
17583 क्विंटल प्याज नीलाम
सोमवार को प्याज की आवक कृषि उपज मंडी में 17583 क्विंटल रही। भाव में 501 से 1801 रुपए प्रति क्विंटल एवं 1111 रुपए औसत भाव रहे। लहसुन की आवक 712 क्विंटल होने पर 1400 से 17444 रुपए प्रति क्विंटल के भाव रहे। 5050 रुपए क्विंटल औसत भाव रहे।
रतलाम में खरीफ सीजन फसल पैटर्न में देखने को मिलेगा बदलाव
कृषि विभाग के अनुमान के अनुसार, इस साल रतलाम में मक्का का रकबा 4 हजार हेक्टेयर से अधिक बढ़ जाएगा। इसके विपरीत, खरीफ सीजन की मुख्य फसल सोयाबीन का रकबा 9 हजार हेक्टेयर से अधिक घट सकता है। गत वर्ष 2 लाख 99 हजार 308 हेक्टेयर में सोयाबीन बोई गई थी, जबकि इस साल इसे 2 लाख 90 हजार हेक्टेयर प्रस्तावित किया गया है।
इसलिए भी बीज संबंधी समस्या
यह कमी पिछले साल सोयाबीन फसल के खराब होने और किसानों को बीज संबंधी समस्याओं का सामना करने के कारण करने का निर्णय किया गया है। इस खरीफ सीजन में कुल 3 लाख 35 हजार 2 हेक्टेयर क्षेत्र में विभिन्न फसलें लगाई जानी हैं, जिनमें सोयाबीन, उड़द, मक्का, धान, मूंग, अरहर, कपास, मूंगफली और तिल शामिल हैं। किसानों का रुझान तिलहन फसलों की ओर बढ़ाने के लिए विभाग ने विशेष जोर दिया है।
कपास 2027 हेक्टेयर क्षेत्र में बढ़ेगा
इसी क्रम में कपास का रकबा 2027 हेक्टेयर, मूंगफली का रकबा 1103 हेक्टेयर और तिल का रकबा 1170 हेक्टेयर बढ़ाने की उम्मीद जताई जा रही है। यह बदलाव किसानों को वैकल्पिक और अधिक लाभदायक फसलों की ओर आकर्षित करने का एक प्रयास है।


