बिहार भाजपा ने संगठन को 13 जोन में बांटा:घनराज शर्मा को मिथिला-तिरहुत संभाग, नितिन अभिषेक को मगध-शाहाबाद की जिम्मेदारी

बिहार भाजपा ने संगठन को 13 जोन में बांटा:घनराज शर्मा को मिथिला-तिरहुत संभाग, नितिन अभिषेक को मगध-शाहाबाद की जिम्मेदारी

संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और 2029 के लोकसभा चुनाव की अभी से तैयारी के उद्देश्य से भारतीय जनता पार्टी ने बड़ा संगठनात्मक फैसला लिया है। प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी के निर्देश पर बिहार भाजपा ने अपने सभी सांगठनिक जिलों को 13 जोन में विभाजित कर दिया है प्रत्येक संभाग की जिम्मेदारी वरिष्ठ नेताओं को सौंपी गई है। प्रदेश मुख्यालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार पांच वरिष्ठ नेताओं को 13 संभागों की जिम्मेदारी दी गई है। घनराज शर्मा को मिथिला और तिरहुत संभाग मिला है। भाजपा के प्रदेश महामंत्री घनराज शर्मा को दो बड़े संभागों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पहला मिथिला संभाग इसमें दरभंगा पूर्वी,दरभंगा पश्चिमी, मधुबनी, बेनीपुर,समस्तीपुर उत्तरी,समस्तीपुर दक्षिण, तिरहुत संभाग के अंतर्गत वैशाली उत्तरी, वैशाली दक्षिणी, मुजफ्फरपुर पूर्वी, मुजफ्फरपुर पश्चिमी, सीतामढ़ी, शिवहर शामिल है। देखें लिस्ट… नितिन अभिषेक को मगध और शाहाबाद की जिम्मेदारी प्रदेश महामंत्री नितिन अभिषेक को दक्षिण और मध्य बिहार के महत्वपूर्ण क्षेत्रों का प्रभार दिया गया है। मगध संभाग में जहानाबाद, गया पश्चिमी, गया पूर्वी, औरंगाबाद, अरवल,नवादा, शाहाबाद संभाग में कैमूर, रोहतास,बक्सर,भोजपुर शामिल है। भाजपा का मानना है कि इस नई व्यवस्था से संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा। पंचायत, मंडल, जिला और प्रदेश स्तर के बीच संवाद की प्रक्रिया तेज होगी तथा चुनावी तैयारियों की नियमित निगरानी संभव हो सकेगी। साथ ही नेताओं की जवाबदेही और प्राथमिकता भी स्पष्ट हो गई है। चुनावी तैयारी और संगठन विस्तार की रणनीति भाजपा की यह नई व्यवस्था आगामी लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर बनाई गई रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि प्रत्येक संभाग प्रभारी अपने क्षेत्र के जिलों, मंडलों और बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं के साथ लगातार संपर्क बनाए रखें। नई व्यवस्था के तहत संभाग प्रभारी संगठनात्मक गतिविधियों की समीक्षा करेंगे, सदस्यत अभियान, प्रशिक्षण कार्यक्रम, जनसंपर्क अभियान और चुनावी तैयारियों की निगरानी करेंगे। इससे प्रदेश नेतृत्व तक जमीनी फीडबैक तेजी से पहुंचेगा और संगठनात्मक निर्णयों के क्रियान्वयन में भी गति आएगी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा ने इस कदम के जरिए न केवल संगठन को अधिक व्यवस्थित किया है, बल्कि अपने प्रमुख नेताओं की जिम्मेदारियां भी स्पष्ट कर दी हैं। इससे आगामी चुनावों में पार्टी को बूथ स्तर तक मजबूत नेटवर्क खड़ा करने में मदद मिल सकती है। संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और 2029 के लोकसभा चुनाव की अभी से तैयारी के उद्देश्य से भारतीय जनता पार्टी ने बड़ा संगठनात्मक फैसला लिया है। प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी के निर्देश पर बिहार भाजपा ने अपने सभी सांगठनिक जिलों को 13 जोन में विभाजित कर दिया है प्रत्येक संभाग की जिम्मेदारी वरिष्ठ नेताओं को सौंपी गई है। प्रदेश मुख्यालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार पांच वरिष्ठ नेताओं को 13 संभागों की जिम्मेदारी दी गई है। घनराज शर्मा को मिथिला और तिरहुत संभाग मिला है। भाजपा के प्रदेश महामंत्री घनराज शर्मा को दो बड़े संभागों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पहला मिथिला संभाग इसमें दरभंगा पूर्वी,दरभंगा पश्चिमी, मधुबनी, बेनीपुर,समस्तीपुर उत्तरी,समस्तीपुर दक्षिण, तिरहुत संभाग के अंतर्गत वैशाली उत्तरी, वैशाली दक्षिणी, मुजफ्फरपुर पूर्वी, मुजफ्फरपुर पश्चिमी, सीतामढ़ी, शिवहर शामिल है। देखें लिस्ट… नितिन अभिषेक को मगध और शाहाबाद की जिम्मेदारी प्रदेश महामंत्री नितिन अभिषेक को दक्षिण और मध्य बिहार के महत्वपूर्ण क्षेत्रों का प्रभार दिया गया है। मगध संभाग में जहानाबाद, गया पश्चिमी, गया पूर्वी, औरंगाबाद, अरवल,नवादा, शाहाबाद संभाग में कैमूर, रोहतास,बक्सर,भोजपुर शामिल है। भाजपा का मानना है कि इस नई व्यवस्था से संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा। पंचायत, मंडल, जिला और प्रदेश स्तर के बीच संवाद की प्रक्रिया तेज होगी तथा चुनावी तैयारियों की नियमित निगरानी संभव हो सकेगी। साथ ही नेताओं की जवाबदेही और प्राथमिकता भी स्पष्ट हो गई है। चुनावी तैयारी और संगठन विस्तार की रणनीति भाजपा की यह नई व्यवस्था आगामी लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर बनाई गई रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि प्रत्येक संभाग प्रभारी अपने क्षेत्र के जिलों, मंडलों और बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं के साथ लगातार संपर्क बनाए रखें। नई व्यवस्था के तहत संभाग प्रभारी संगठनात्मक गतिविधियों की समीक्षा करेंगे, सदस्यत अभियान, प्रशिक्षण कार्यक्रम, जनसंपर्क अभियान और चुनावी तैयारियों की निगरानी करेंगे। इससे प्रदेश नेतृत्व तक जमीनी फीडबैक तेजी से पहुंचेगा और संगठनात्मक निर्णयों के क्रियान्वयन में भी गति आएगी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा ने इस कदम के जरिए न केवल संगठन को अधिक व्यवस्थित किया है, बल्कि अपने प्रमुख नेताओं की जिम्मेदारियां भी स्पष्ट कर दी हैं। इससे आगामी चुनावों में पार्टी को बूथ स्तर तक मजबूत नेटवर्क खड़ा करने में मदद मिल सकती है।  

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