कभी रेत के टीलों, तपती धूप और तेज आंधियों के लिए पहचाना जाने वाला पश्चिमी राजस्थान अब इन्हीं प्राकृतिक संसाधनों के दम पर देश की हरित ऊर्जा क्रांति का केंद्र बनता जा रहा है। मरुधरा की तेज हवाएं ऊर्जा उत्पादन में अपनी हिस्सेदारी लगातार बढ़ा रही हैं, जबकि प्रचुर सौर विकिरण इस क्षेत्र को नवीकरणीय ऊर्जा के लिए सबसे उपयुक्त भूभाग बना रहा है। जैसलमेर और बाड़मेर में विकसित हो रही विशाल सौर एवं पवन ऊर्जा परियोजनाएं न केवल राजस्थान की पहचान बदल रही हैं, बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा और हरित विकास की नई दिशा भी तय कर रही हैं।
घोटारू क्षेत्र में प्रस्तावित लगभग 60 गीगावाट क्षमता का ग्रीन एनर्जी हब इस बदलाव का सबसे बड़ा प्रतीक माना जा रहा है। इस परियोजना से जुड़े निवेश का आकार करीब 3 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचने का अनुमान है, जिसमें विदेशी और घरेलू कंपनियों की सक्रिय भागीदारी दिखाई दे रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यहां की भौगोलिक परिस्थितियां—सालभर तेज धूप और खुले रेगिस्तानी क्षेत्र—इसे दुनिया के सबसे उपयुक्त नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों में शामिल करती हैं।
पश्चिमी राजस्थान में ऊर्जा परियोजनाओं की बढ़ती रफ्तार ने निवेश का पूरा नक्शा बदल दिया है।
निवेश का नया भूगोल
-बड़े कॉर्पोरेट समूह सोलर और विंड हाइब्रिड मॉडल पर फोकस कर रहे
-अंतरराष्ट्रीय निवेशकों की रुचि लगातार बढ़ रही
-ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर से ट्रांसमिशन नेटवर्क मजबूत हो रहा
-भूमि और मौसम ने क्षेत्र को प्राकृतिक लाभ दिया है
राष्ट्रीय ऊर्जा लक्ष्य से सीधा जुड़ाव
भारत का लक्ष्य 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता हासिल करना है। पश्चिमी राजस्थान इस लक्ष्य में सबसे बड़ा योगदानकर्ता बनकर उभर रहा है।
-4 करोड़ घरों तक स्वच्छ ऊर्जा पहुंचाने की क्षमता
-जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता में कमी
-कार्बन उत्सर्जन घटाने में मदद
-ऊर्जा आयात पर दबाव कम
नया ऊर्जा इकोसिस्टम
-ट्रांसमिशन नेटवर्क का विस्तार
– स्टोरेज और बैटरी सिस्टम की नई तकनीक
-ग्रीन हाइड्रोजन की संभावनाएं
– ऊर्जा आधारित औद्योगिक विकास
बड़ा सवाल यह भी
तेजी से बढ़ते निवेश के बीच चुनौती यह है कि स्थानीय संसाधन, ट्रांसमिशन क्षमता और नीति स्थिरता को समान गति से मजबूत किया जाए या नहीं—यही तय करेगा कि यह ऊर्जा क्रांति कितनी दूर तक जाएगी।
एक्सपर्ट व्यू: निर्यात आधारित बिजली अर्थव्यवस्था की कवायद
पश्चिमी राजस्थान आने वाले वर्षों में भारत की एनर्जी एक्सपोर्ट पावर बन सकता है। यदि योजनाएं समय पर पूरी होती हैं, तो यह क्षेत्र न केवल देश को ऊर्जा आत्मनिर्भर बनाएगा बल्कि निर्यात आधारित बिजली अर्थव्यवस्था भी तैयार कर सकता है।
— जितेंद्र थानवी, ऊर्जा विशेषज्ञ


