शहर की पढ़ाई-लिखाई को वर्ल्ड क्लास (विश्वस्तरीय) बनाने और पैरेंट्स की जेब पर पड़ने वाले बोझ को कम करने के लिए एक बड़ी और ऐतिहासिक शुरुआत हुई है। ‘मुस्कुराए कानपुर’ मुहिम के तहत शहर में ‘कानपुर एजुकेशन कमेटी’ का गठन किया गया है। आवास विकास के एक होटल में शहर के नामचीन शिक्षाविदों और प्रशासनिक चेहरों ने मिलकर इस कमेटी का शुभारंभ किया। इस कमेटी का सबसे बड़ा मकसद एक ऐसा ‘कानपुर मॉडल’ तैयार करना है, जो न सिर्फ बच्चों को अच्छी और नैतिक शिक्षा दे, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के लिए एक मिसाल बन सके। प्राइमरी से लेकर टेक्निकल एजुकेशन तक के 21 एक्सपर्ट्स शामिल इस खास कमेटी में कोई साधारण लोग नहीं, बल्कि शिक्षा जगत के उन 21 दिग्गजों को शामिल किया गया है जो जमीन से जुड़े हैं। इसमें प्राइमरी, माध्यमिक, उच्च और तकनीकी (टेक्निकल) शिक्षा से जुड़े अनुभवी प्रिसिंपल, मैनेजर, प्रोफेसर्स और ट्रेनर्स शामिल हैं। कमेटी में स्मार्ट सिटी के ब्रांड एंबेसडर डॉ. सिधांशु राय, भारत स्काउट एंड गाइड के सहायक राज्य आयुक्त डॉ. आर.सी. शर्मा, डॉ. अवध बिहारी मिश्रा, पी.सी. अग्निहोत्री, अमित अग्रवाल, प्रो. टी.एन. अग्रवाल, डॉ. राकेश राम त्रिपाठी, डॉ. बृजमोहन सिंह और डॉ. वनिता मेहरोत्रा जैसी हस्तियां शामिल हैं। इनके अलावा सुबोध कटियार, डॉ. सी डेनियल, गुरुशरण सिंह, डॉ. भक्ति विजय शुक्ला, प्रो. जी.एल. श्रीवास्तव, डॉ. संगीता सिंह, राजेश ग्रोवर, डॉ. माहे तलत, शाहिद कामरान, मनप्रीत सिंह, मलिका गुप्ता, डॉ. शिवा मिश्रा और किरण प्रजापति को भी इस मिशन से जोड़ा गया है। रोजगार और बजट में फीस दिलाएगी पैरेंट्स को संतुष्टि कमेटी के समन्वयक (कोऑर्डिनेटर) बनाए गए डॉ. आर.सी. शर्मा ने साफ किया कि इस पूरी मुहिम का असली फोकस तीन चीजों पर रहेगा। पहला रोजगार, दूसरा बजट में आने वाला फीस स्ट्रक्चर और तीसरा अभिभावकों (पैरेंट्स) की संतुष्टि। आज के दौर में पैरेंट्स बच्चों की महंगी फीस और भविष्य में नौकरी न मिलने की चिंता से सबसे ज्यादा परेशान रहते हैं, कमेटी इसी गैप को खत्म करेगी। वही, कमेटी के संस्थापक डॉ. सिधांशु राय का कहना है कि किसी भी शहर का भविष्य वहां की शिक्षा व्यवस्था से तय होता है। यह कमेटी सरकारी प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए वर्तमान दौर की जरूरतों के हिसाब से काम करेगी। क्या है यह ‘कानपुर मॉडल’?
अमित अग्रवाल, डॉ. जी.एल. श्रीवास्तव और राजेश ग्रोवर ने बताया कि ‘कानपुर मॉडल’ के जरिए एक ऐसी प्रैक्टिकल शिक्षा प्रणाली का ढांचा तैयार किया जा रहा है, जो बच्चों को किताबी कीड़ा बनाने के बजाय उनमें नैतिक सोच और हुनर (स्किल्स) पैदा करे। डॉ. अवध बिहारी मिश्रा और प्रेमचंद अग्निहोत्री ने भी इसे शहर के विकास के लिए एक अनोखी और बेहद जरूरी पहल बताया है। आने वाले दिनों में यह कमेटी शहर के स्कूलों और कॉलेजों के लिए नए सुझाव और ब्लूप्रिंट तैयार करेगी।


