Twisha Sharma Case- भोपाल में नोएडा की फिल्म एक्ट्रेस और मॉडल ट्विशा शर्मा जिस लिगेचर (एक तरह का एक्सरसाइज बेल्ट) के फंदे पर लटकी मिली थी, उसकी जब्ती और दस्तावेज लीक पुलिस के लिए फांस बन गए हैं। इससे थाने से लेकर एसआइटी की जांच पर गंभीर सवाल उठे हैं। फरियादी पक्ष इसे गंभीर मामला बता रहा है। दरअसल, लिगेचर को अहम साक्ष्य माना गया था, लेकिन ट्विशा के शव के पोस्टमार्टम के दौरान एम्स में प्रस्तुत नहीं किया गया। इससे गले में बने घेरे और लिगेचर के मिलान की वैज्ञानिक जांच नहीं हो पाई थी। बेल्ट देरी से पेश किए जाने और फिर फोरेंसिक जांच के लिए भेजे जाने को लेकर काफी विवाद हुआ था। इससे पुलिस की जांच और इससे जुड़े अधिकारियों के रवैये पर सवाल उठाए जा रहे थे।
पेपर पूर्व जज तक पहुंचे थे
पुलिस केस डायरी के दस्तावेजों तक ट्विशा शर्मा मामले में आरोपी पूर्व जज सास गिरिबाला और पति समर्थ सिंह की पहुंच को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता अंकुर पाण्डेय ने बताया कि 13 मई को ट्विशा का मोबाइल, इयरफोन सहित कुछ अन्य चीजों की जब्ती गिरिबाला और समर्थ से किए जाने के दस्तावेज पुलिस ने बनाए थे। इनपर उनके हस्ताक्षर भी हैं लेकिन लिगेचर की जब्ती में दोनों के हस्ताक्षर नहीं लिए गए। केवल जब्ती पत्रक बनाया गया और उसके बाद सब इंस्पेक्टर दिनेश शर्मा ने उसे अपने कार में रख लिया और फिर एम्स पहुंचाया।

अंकुर ने बताया कि तब एफआइआर नहीं हुई थी, इसके बाद भी यह सभी दस्तावेज पूर्व जज गिरिबाला सिंह तक पहुंच गए थे। इसकी पुष्टि मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत को रद्द किए जाने के लिए लगाई गई याचिका के दौरान गिरिबाला ने पेश किए थे।
गोपनीय थे दस्तावेज:
अधिवक्ता ने बताया कि यह सभी दस्तावेज गोपनीय थे, जिस तक किसी की पहुंच नहीं हो सकती, जब तक कि वह अदालत के समक्ष पेश नहीं हो जाते हैं। लिगेचर जब्ती में तो गिरिबाला और समर्थ के हस्ताक्षर भी नहीं थे, जबकि अन्य जब्ती पत्रक में उनके हस्ताक्षर थे। इसके बावजूद दस्तावेज उन तक पहुंच गए और कोर्ट में पेश भी किया। इससे पता चलता है कि जांच उनके प्रभाव में हो रही थी और सभी तरह की जानकारी भर ही नहीं बल्कि दस्तावेज भी पहुंच रहे थे। इससे फरियादी पक्ष शुरू से ही जांच पर सवाल उठा रहा था।


