अपने परिवार की सुरक्षा और बंगले के मसले पर राबड़ी नाराज बिहार की सियासत में शनिवार की सुबह एक बड़े टकराव के साथ शुरू हुई। राजद अध्यक्ष लालू यादव और पूर्व सीएम राबड़ी देवी की Z+ सुरक्षा हटाने के फैसले ने सियासी माहौल गरमा दिया है। सुरक्षा में कटौती से नाराज लालू परिवार ने राज्य सरकार की नई सुरक्षा व्यवस्था को सिरे से खारिज कर दिया। शनिवार सुबह ठीक 7 बजे पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने बड़ा फैसला लिया। उन्होंने 10 सर्कुलर रोड स्थित बंगले पर तैनात सभी सरकारी सुरक्षा जवानों को वापस लौटा दिया। यह विवाद केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि अब यह आत्मसम्मान की लड़ाई बन चुका है। लालू यादव फिलहाल सिंगापुर में अपना इलाज करा रहे हैं। तेजस्वी यादव भी दिल्ली में हैं। उनकी अनुपस्थिति में राबड़ी देवी ने मोर्चा संभाल लिया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि वे सरकारी सुरक्षा के भरोसे नहीं रहेंगी। राबड़ी देवी के इस कदम के तुरंत बाद राजद कार्यकर्ता लाठियां लेकर बंगले पर पहुंच गए। अब 10 सर्कुलर रोड की सुरक्षा की कमान पुलिस के बजाय राजद के लाठीधारी कार्यकर्ताओं के हाथ में है। इस पूरे विवाद की पटकथा 30 मई को ही लिख दी गई थी। तब सरकार ने राबड़ी देवी को 10 सर्कुलर रोड का बंगला खाली करने का नोटिस दिया था। उन्हें नया आवास 39 हार्डिंग रोड आवंटित किया गया और 15 दिनों की मोहलत दी गई। इसके ठीक बाद 4 जून को सरकार ने सुरक्षा की समीक्षा की। समीक्षा के नाम पर लालू यादव और राबड़ी देवी की Z+ सुरक्षा हटा ली गई। तेजप्रताप यादव की Y+ सुरक्षा भी छीन ली गई। हालांकि, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की Y+ सुरक्षा बरकरार रखी गई है।
सहानुभूति और शक्ति प्रदर्शन की नई बिसात 10 सर्कुलर रोड और Z+ सुरक्षा अब सिर्फ प्रशासनिक मामला नहीं रह गया है। यह लालू परिवार के लिए राजनीतिक वर्चस्व का सवाल बन चुका है। सरकारी सुरक्षा लौटाना और कार्यकर्ताओं को लाठियों के साथ तैनात करना राजद की एक सोची-समझी रणनीति है। इसके जरिए पार्टी दो बड़े लक्ष्य साध रही है। पहला- कार्यकर्ताओं को भावनात्मक रूप से एकजुट करना कि उनके नेता की जान खतरे में है। दूसरा- जनता के बीच यह संदेश देना कि सरकार जानबूझकर उन्हें प्रताड़ित कर रही है। आने वाले दिनों में यह विवाद बिहार की राजनीति को और ध्रुवीकृत कर सकता है। सत्ता पक्ष का वार… लालू परिवार इसे राजनीति न बनाए दूसरी तरफ, सरकार ने राजद के आरोपों को खारिज किया है। मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि सुरक्षा में बदलाव एक प्रशासनिक प्रक्रिया है। सुरक्षा लौटाकर सरकार को डराना सही नहीं है। जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि लालू परिवार को वीआईपी सुविधाओं-बंगलों से भारी मोह है। लालू परिवार इसे राजनीति न बनाए। 24 घंटे पहरा… दो शिफ्ट में तैनात रहेंगे राजद के ‘सिपाही’ राजद ने अब अपनी सुरक्षा खुद करने का फैसला किया है। प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल, भोला यादव और उदय नारायण चौधरी आवास के बाहर दिनभर डटे रहे। भाई अरुण और गौतम कृष्णा ने बताया कि कार्यकर्ताओं की दो शिफ्ट बनाई गई है। ये 24 घंटे आवास पर लाठियों के साथ तैनात रहेंगे। अपने परिवार की सुरक्षा और बंगले के मसले पर राबड़ी नाराज बिहार की सियासत में शनिवार की सुबह एक बड़े टकराव के साथ शुरू हुई। राजद अध्यक्ष लालू यादव और पूर्व सीएम राबड़ी देवी की Z+ सुरक्षा हटाने के फैसले ने सियासी माहौल गरमा दिया है। सुरक्षा में कटौती से नाराज लालू परिवार ने राज्य सरकार की नई सुरक्षा व्यवस्था को सिरे से खारिज कर दिया। शनिवार सुबह ठीक 7 बजे पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने बड़ा फैसला लिया। उन्होंने 10 सर्कुलर रोड स्थित बंगले पर तैनात सभी सरकारी सुरक्षा जवानों को वापस लौटा दिया। यह विवाद केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि अब यह आत्मसम्मान की लड़ाई बन चुका है। लालू यादव फिलहाल सिंगापुर में अपना इलाज करा रहे हैं। तेजस्वी यादव भी दिल्ली में हैं। उनकी अनुपस्थिति में राबड़ी देवी ने मोर्चा संभाल लिया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि वे सरकारी सुरक्षा के भरोसे नहीं रहेंगी। राबड़ी देवी के इस कदम के तुरंत बाद राजद कार्यकर्ता लाठियां लेकर बंगले पर पहुंच गए। अब 10 सर्कुलर रोड की सुरक्षा की कमान पुलिस के बजाय राजद के लाठीधारी कार्यकर्ताओं के हाथ में है। इस पूरे विवाद की पटकथा 30 मई को ही लिख दी गई थी। तब सरकार ने राबड़ी देवी को 10 सर्कुलर रोड का बंगला खाली करने का नोटिस दिया था। उन्हें नया आवास 39 हार्डिंग रोड आवंटित किया गया और 15 दिनों की मोहलत दी गई। इसके ठीक बाद 4 जून को सरकार ने सुरक्षा की समीक्षा की। समीक्षा के नाम पर लालू यादव और राबड़ी देवी की Z+ सुरक्षा हटा ली गई। तेजप्रताप यादव की Y+ सुरक्षा भी छीन ली गई। हालांकि, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की Y+ सुरक्षा बरकरार रखी गई है।
सहानुभूति और शक्ति प्रदर्शन की नई बिसात 10 सर्कुलर रोड और Z+ सुरक्षा अब सिर्फ प्रशासनिक मामला नहीं रह गया है। यह लालू परिवार के लिए राजनीतिक वर्चस्व का सवाल बन चुका है। सरकारी सुरक्षा लौटाना और कार्यकर्ताओं को लाठियों के साथ तैनात करना राजद की एक सोची-समझी रणनीति है। इसके जरिए पार्टी दो बड़े लक्ष्य साध रही है। पहला- कार्यकर्ताओं को भावनात्मक रूप से एकजुट करना कि उनके नेता की जान खतरे में है। दूसरा- जनता के बीच यह संदेश देना कि सरकार जानबूझकर उन्हें प्रताड़ित कर रही है। आने वाले दिनों में यह विवाद बिहार की राजनीति को और ध्रुवीकृत कर सकता है। सत्ता पक्ष का वार… लालू परिवार इसे राजनीति न बनाए दूसरी तरफ, सरकार ने राजद के आरोपों को खारिज किया है। मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि सुरक्षा में बदलाव एक प्रशासनिक प्रक्रिया है। सुरक्षा लौटाकर सरकार को डराना सही नहीं है। जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि लालू परिवार को वीआईपी सुविधाओं-बंगलों से भारी मोह है। लालू परिवार इसे राजनीति न बनाए। 24 घंटे पहरा… दो शिफ्ट में तैनात रहेंगे राजद के ‘सिपाही’ राजद ने अब अपनी सुरक्षा खुद करने का फैसला किया है। प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल, भोला यादव और उदय नारायण चौधरी आवास के बाहर दिनभर डटे रहे। भाई अरुण और गौतम कृष्णा ने बताया कि कार्यकर्ताओं की दो शिफ्ट बनाई गई है। ये 24 घंटे आवास पर लाठियों के साथ तैनात रहेंगे।


