ERC Imposed Fine on UPPCL: उत्तर प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी खबर सामने आई है। उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) पर नियामक आयोग ने 7 लाख 18 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। नियामक आयोग ने यह जुर्माना स्मार्ट प्रीपेड मीटर से जुड़े मामले में लगाया है।
मीटर लगाने में लापरवाही करने पर लगा जुर्माना
विद्युत नियामक आयोग ने तथ्यों के आधार पर पाया कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने में लापरवाही की गई। स्मार्ट प्रीपेड मीटर का रीचार्ज करने के 2 घंटे बाद भी कई उपभोक्ताओं का बिजली कनेक्शन नहीं जोड़ा गया। यह UPERC (स्टैंडर्ड ऑफ परफॉर्मेंस) विनियम 2019 का सीधा उल्लंघन है। आयोग के अनुसार, निगेटिव बैलेंस के कारण कनेक्शन कटने पर रीचार्ज के अधिकतम 2 घंटे के अंदर आपूर्ति बहाल करनी होती है।
यदि ऐसा नहीं होता तो उपभोक्ता को मुआवजा देना पड़ता है। पावर कॉर्पोरेशन ने मार्च 2026 में स्मार्ट मीटरिंग व्यवस्था शुरू की थी, जिसके बाद कई शिकायतें आईं कि रीचार्ज के बावजूद कनेक्शन समय पर नहीं जुड़े। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद द्वारा दायर लोक महत्व प्रस्ताव पर आयोग ने स्वतः संज्ञान लिया और कार्रवाई की है।
UPPCL को 15 दिन में भरना होगा जुर्माना
विद्युत नियामक आयोग की जांच में 13, 14, 16, 17, 18, 23, 25, 28 मार्च और 2 व 7 अप्रैल 2026 को निर्धारित सेवा मानकों का उल्लंघन पाया गया। इन दिनों में अनुपालन स्तर घटकर 77% तक पहुंच गया, जबकि न्यूनतम 95% अनुपालन जरूरी था। पॉवर कॉर्पोरेशन ने भी अपने जवाब में स्वीकार किया कि कई मामलों में निर्धारित समय सीमा में कनेक्शन बहाल नहीं हो सके।
आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार और सदस्य संजय कुमार सिंह की दो सदस्यीय पीठ ने विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 142 व 57 के तहत प्रति उल्लंघन 1 लाख रुपए और प्रतिदिन की देरी पर अतिरिक्त ₹6,000 के हिसाब से यह जुर्माना लगाया है। यह किसी भी डिस्कॉम पर नियामक आयोग द्वारा अब तक लगाई गई सबसे बड़ी पेनाल्टी है। आयोग ने पावर कॉर्पोरेशन से 15 दिनों में जुर्माना जमा करने के साथ-साथ लिखित जवाब भी तलब किया है।
UPPCL को नियामक आयोग की हिदायत
UPPCL पर जुर्माना लगाने के साथ ही विद्युत नियामक आयोग ने कड़ी हिदायत दी है। आयोग ने सख्त हिदायत दी कि वास्तविक कारणों की पड़ताल कर भविष्य में ऐसी लापरवाही न दोहराई जाए। आयोग ने कहा- उपभोक्ता सेवा में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह फैसला स्मार्ट मीटरिंग व्यवस्था को सुचारू बनाने और उपभोक्ता हितों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


