शेखपुरा में ‘खेत बचाओ अभियान’ कार्यक्रम आयोजित:कृषि वैज्ञानिकों ने कहा-प्राकृतिक खेती का मतलब ‘जीरो बजट खेती’

शेखपुरा में ‘खेत बचाओ अभियान’ कार्यक्रम आयोजित:कृषि वैज्ञानिकों ने कहा-प्राकृतिक खेती का मतलब ‘जीरो बजट खेती’

कृषि विज्ञान केंद्र, शेखपुरा और आत्मा के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को जिले के सदर प्रखंड अंतर्गत कोसरा पंचायत के गंगटी ग्राम में राष्ट्रव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान किसानों को कृषि संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी देकर जागरूक किया गया। कृषि विज्ञान केंद्र के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान ई. प्रमोद कुमार चौधरी ने आगामी 30 जून तक जिले में चलने वाले ‘खेत बचाओ कार्यक्रम’ की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने किसानों को खरीफ फसलों जैसे धान, अरहर और पोषक अनाज में उर्वरकों के संतुलित उपयोग, ढैचा के प्रयोग से हरित खाद द्वारा पैदावार बढ़ाने और रासायनिक उर्वरकों के दुष्प्रभावों के बारे में विस्तार से बताया। उद्यान वैज्ञानिक नवीन कुमार सिंह ने किसानों को प्राकृतिक खेती की तकनीक अपनाने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती को ‘जीरो बजट खेती’ भी कहा जाता है। जिसमें किसान घर में उपलब्ध संसाधनों जैसे गाय का गोबर, गौमूत्र, बेसन और मिट्टी का उपयोग करके खेत को पोषण देते हैं और लाभदायक जीवाणुओं की संख्या बढ़ाकर उत्पादन प्राप्त करते हैं। सहायक तकनीकी प्रबंधक अश्वनी कुमार ने कृषि विभाग द्वारा किसानों के लिए चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। इस अवसर पर कृषि समन्वयक प्रियंका कुमारी और किसान सलाहकार खुशबू ने भी अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम में पचास से अधिक किसानों ने भाग लिया और उर्वरकों के संतुलित उपयोग, प्राकृतिक खेती तथा हरित खाद जैसी नवीनतम कृषि जानकारियों से लाभान्वित हुए। कृषि विज्ञान केंद्र, शेखपुरा और आत्मा के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को जिले के सदर प्रखंड अंतर्गत कोसरा पंचायत के गंगटी ग्राम में राष्ट्रव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान किसानों को कृषि संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी देकर जागरूक किया गया। कृषि विज्ञान केंद्र के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान ई. प्रमोद कुमार चौधरी ने आगामी 30 जून तक जिले में चलने वाले ‘खेत बचाओ कार्यक्रम’ की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने किसानों को खरीफ फसलों जैसे धान, अरहर और पोषक अनाज में उर्वरकों के संतुलित उपयोग, ढैचा के प्रयोग से हरित खाद द्वारा पैदावार बढ़ाने और रासायनिक उर्वरकों के दुष्प्रभावों के बारे में विस्तार से बताया। उद्यान वैज्ञानिक नवीन कुमार सिंह ने किसानों को प्राकृतिक खेती की तकनीक अपनाने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती को ‘जीरो बजट खेती’ भी कहा जाता है। जिसमें किसान घर में उपलब्ध संसाधनों जैसे गाय का गोबर, गौमूत्र, बेसन और मिट्टी का उपयोग करके खेत को पोषण देते हैं और लाभदायक जीवाणुओं की संख्या बढ़ाकर उत्पादन प्राप्त करते हैं। सहायक तकनीकी प्रबंधक अश्वनी कुमार ने कृषि विभाग द्वारा किसानों के लिए चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। इस अवसर पर कृषि समन्वयक प्रियंका कुमारी और किसान सलाहकार खुशबू ने भी अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम में पचास से अधिक किसानों ने भाग लिया और उर्वरकों के संतुलित उपयोग, प्राकृतिक खेती तथा हरित खाद जैसी नवीनतम कृषि जानकारियों से लाभान्वित हुए।  

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