जमुई के नक्सल प्रभावित गांवों में विकास की नई पहल:आशा कार्यकर्ता चयन और जल-नल योजना से ग्रामीणों को मिली राहत

जमुई के नक्सल प्रभावित गांवों में विकास की नई पहल:आशा कार्यकर्ता चयन और जल-नल योजना से ग्रामीणों को मिली राहत

जमुई के अति नक्सल प्रभावित गुरमाहा, चोरमारा, बिचला टोला और अंबा टोला सहित आसपास के गांवों में अब विकास की नई गाथा लिखी जा रही है। लगभग 25 वर्षों के बाद इन क्षेत्रों में आशा कार्यकर्ता (आशा दीदी) का चयन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ है, वहीं देश की आजादी के 76 वर्षों बाद पहली बार सरकारी जल-नल योजना के तहत स्वच्छ पेयजल भी पहुंचा है। 2005 में एनआरएचएम की शुरुआत वर्ष 2005 में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) की शुरुआत के बावजूद इन गांवों में अब तक आशा कार्यकर्ता की नियुक्ति नहीं हो सकी थी। यह उपलब्धि स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन के लिए एक बड़ी सफलता मानी जा रही है। आशा कार्यकर्ता ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी होती हैं, जो मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, पोषण और परिवार कल्याण जैसी विभिन्न सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं की जानकारी लोगों तक पहुंचाती हैं। गुरमाहा और चोरमारा जैसे दुर्गम गांवों में पहली बार आशा दीदी के चयन से ग्रामीणों को अब स्वास्थ्य सेवाओं का सीधा लाभ मिल सकेगा। इसी के साथ, इन गांवों में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज हुई है। आजादी के 76 वर्षों बाद पहली बार गुरमाहा, चोरमारा, बिचला टोला और अंबा टोला सहित आधा दर्जन गांवों में सरकारी जल-नल योजना के माध्यम से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया गया है। वर्षों से गंदे और असुरक्षित जल स्रोतों पर निर्भर रहने वाले ग्रामीणों के लिए यह सुविधा किसी सपने के सच होने जैसी है। 2025 में सुरक्षा बलों की कार्रवाई से हालात सामान्य स्थानीय निवासियों ने बताया कि लंबे समय तक उपेक्षित रहे इन गांवों में अब विकास की किरण दिखाई देने लगी है। वर्ष 2025 में सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई के बाद यह इलाका नक्सल मुक्त हुआ, जिसके बाद प्रशासन ने विकास योजनाओं को गति दी। स्वास्थ्य और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं की पहुंच से ग्रामीणों में खुशी का माहौल है। प्रशासन का मानना है कि इन पहलों से क्षेत्र में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ेगी और सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सकेगा। जमुई के अति नक्सल प्रभावित गुरमाहा, चोरमारा, बिचला टोला और अंबा टोला सहित आसपास के गांवों में अब विकास की नई गाथा लिखी जा रही है। लगभग 25 वर्षों के बाद इन क्षेत्रों में आशा कार्यकर्ता (आशा दीदी) का चयन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ है, वहीं देश की आजादी के 76 वर्षों बाद पहली बार सरकारी जल-नल योजना के तहत स्वच्छ पेयजल भी पहुंचा है। 2005 में एनआरएचएम की शुरुआत वर्ष 2005 में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) की शुरुआत के बावजूद इन गांवों में अब तक आशा कार्यकर्ता की नियुक्ति नहीं हो सकी थी। यह उपलब्धि स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन के लिए एक बड़ी सफलता मानी जा रही है। आशा कार्यकर्ता ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी होती हैं, जो मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, पोषण और परिवार कल्याण जैसी विभिन्न सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं की जानकारी लोगों तक पहुंचाती हैं। गुरमाहा और चोरमारा जैसे दुर्गम गांवों में पहली बार आशा दीदी के चयन से ग्रामीणों को अब स्वास्थ्य सेवाओं का सीधा लाभ मिल सकेगा। इसी के साथ, इन गांवों में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज हुई है। आजादी के 76 वर्षों बाद पहली बार गुरमाहा, चोरमारा, बिचला टोला और अंबा टोला सहित आधा दर्जन गांवों में सरकारी जल-नल योजना के माध्यम से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया गया है। वर्षों से गंदे और असुरक्षित जल स्रोतों पर निर्भर रहने वाले ग्रामीणों के लिए यह सुविधा किसी सपने के सच होने जैसी है। 2025 में सुरक्षा बलों की कार्रवाई से हालात सामान्य स्थानीय निवासियों ने बताया कि लंबे समय तक उपेक्षित रहे इन गांवों में अब विकास की किरण दिखाई देने लगी है। वर्ष 2025 में सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई के बाद यह इलाका नक्सल मुक्त हुआ, जिसके बाद प्रशासन ने विकास योजनाओं को गति दी। स्वास्थ्य और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं की पहुंच से ग्रामीणों में खुशी का माहौल है। प्रशासन का मानना है कि इन पहलों से क्षेत्र में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ेगी और सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सकेगा।  

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