मस्जिद हटाने के बाद काशी स्टेशन के विस्तारीकरण में तेजी, बनाया जाएगा मॉडल स्टेशन, 350 करोड़ आएगी लागत

मस्जिद हटाने के बाद काशी स्टेशन के विस्तारीकरण में तेजी, बनाया जाएगा मॉडल स्टेशन, 350 करोड़ आएगी लागत

Development work of kashi railway station: वाराणसी में काशी स्टेशन के समीप स्थित अजगैब शहिद मस्जिद और कब्रिस्तान को मंगलवार की देर रात हटाए जाने के बाद रेल प्रशासन ने विकास कार्य तेज कर दिए हैं। 350 करोड़ रुपए की लागत से काशी रेलवे स्टेशन को मल्टी मॉडल इंटर मॉडल टर्मिनल बनाने का काम किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि एक ही स्थान से ट्रेन, बस और ऑटो का परिचालन किया जाएगा, जिससे यात्रियों को सहूलियत होगी।

47.26 एकड़ भूमि पर निर्माण कार्य

काशी रेलवे स्टेशन के आसपास अतिक्रमण की गई भूमि को खाली कर जाने के बाद रेल प्रशासन 350 करोड़ की लागत से काशी स्टेशन के विस्तारीकारण की योजना पर तेजी से कम कर रहा है। स्टेशन के जीर्णोद्धार और विस्तार कार्य के लिए 47.26 एकड़ भूमि पर निर्माण कर किया जा रहा है। रेल प्रशासन ने कार्यदाई संस्था को काम में तेजी लाने को और निर्माण कार्य को जल्द से जल्द पूरा करने को कहा है।

दरअसल, मंगलवार की देर रात काशी रेलवे स्टेशन के पास स्थित मस्जिद को हटाने के लिए जिला प्रशासन की टीम कई थानों की फोर्स और पीएसी के जवानों के साथ पहुंची थी। इस दौरान आधा दर्जन बुलडोजर लगाकर रेलवे की भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया गया। इसके साथ ही रातों-रात डंपर लगाकर मलबे भी हटा दिए गए। अब इस काम के बाद यहां निर्माण कार्य तेज किया गया है। रेल प्रशासन की अगले वर्ष तक काशी को मॉडल स्टेशन के रूप में विकसित करने की मंशा है।

मस्जिद कमेटी ने हाईकोर्ट में दायर की याचिका

रेलवे प्रशासन की माने तो काशी रेलवे स्टेशन को मल्टी मॉडल इंटर मॉडल टर्मिनल बनाने के बाद पास ही स्थित नमो घाट की कनेक्टिविटी बढ़ जाएगी। इसके साथ ही वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन का लोड भी कम हो सकेगा। दरअसल, माल गोदाम क्षेत्र, भदऊ चुंगी, पलंग अजगैब शहिद मस्जिद के आसपास की भूमि को लेकर रेलवे और स्थानीय लोगों के बीच विवाद चल रहा था। अजगैब शहिद मस्जिद कमेटी की ओर से हाई कोर्ट में एक याचिका भी दाखिल की गई है।

बताया जा रहा है कि काशी रेलवे स्टेशन को 2024 में मॉडल रेलवे स्टेशन के रूप में विकसित किए जाने की योजना लाई गई थी और जमीन की पैमाइश करने के बाद पता चला कि मस्जिद रेलवे की जमीन पर बनी है और इस पर अवैध रूप से कब्जा किया गया है। इसके बाद रेलवे ने जमीन को खाली करने के लिए नोटिस जारी किया। इसके बाद मामला कोर्ट में पहुंचा। वहीं, स्थानीय कोर्ट से मुस्लिम पक्ष की हार होने के बाद इसपर निर्माण कार्य शुरू किया गया है।

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