Precocious Puberty: क्या 7 साल की उम्र में पीरियड्स आना नॉर्मल है? गायनेकोलॉजिस्ट से जानें

Precocious Puberty: क्या 7 साल की उम्र में पीरियड्स आना नॉर्मल है? गायनेकोलॉजिस्ट से जानें

Precocious Puberty Cause: माता-पिता तब बुरी तरह घबरा जाते हैं, जब उनकी सिर्फ 7 या 8 साल की छोटी सी बच्ची को पीरियड्स (मासिक धर्म) शुरू हो जाते हैं। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अनुसार, प्रीकोशियस प्यूबर्टी का समय पर इलाज न करवाने पर इसके परिणाम गंभीर हो सकते हैं। गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. शैलजा अग्रवाल का कहना है कि इतनी छोटी उम्र में पीरियड्स आना बिल्कुल भी नॉर्मल नहीं है। माता-पिता को इसे मामूली बात समझकर इग्नोर नहीं करना चाहिए, बल्कि डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

क्या होती है प्रीकोशियस प्यूबर्टी

आमतौर पर लड़कियों में बड़े होने के लक्षण 10 से 11 साल की उम्र के बाद दिखाई देते हैं। लेकिन जब किसी बच्ची के शरीर में ये सारे बदलाव 8 साल की उम्र से पहले ही दिखने लगें, तो उसे प्रीकोशियस प्यूबर्टी कहते हैं। इसका मतलब है कि बच्ची का शरीर अपनी उम्र से बहुत पहले ही मैच्योर (बड़ा) होने लगा है। इसमें बच्ची के ब्रेस्ट (स्तनों) का विकास जल्दी होने लगता है, शरीर पर अनचाहे बाल आने लगते हैं और अचानक उसकी लंबाई बहुत तेजी से बढ़ने लगती है।

कम उम्र में पीरियड्स आने की वजह क्या है?

मेयो क्लिनिक के एक शोध के अनुसार, बच्चों में समय से पहले पीरियड्स या यौवन (जवानी के लक्षण) आने के असली कारणों को समझने के लिए, यह जानना जरूरी है कि शरीर के अंदर क्या होता है। दरअसल, हमारा दिमाग GnRH नाम का एक हार्मोन बनाता है, जो इस पूरी प्रक्रिया को शुरू करता है। जब यह हार्मोन दिमाग की एक छोटी सी ग्रंथि (पिट्यूटरी ग्रंथि) तक पहुंचता है, तो यह लड़कियों के अंडाशय (Ovaries) में एस्ट्रोजन और लड़कों में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन को बढ़ा देता है। लड़कियों में एस्ट्रोजन हार्मोन की वजह से ही पीरियड्स और शरीर में दूसरे बदलाव समय से पहले दिखने लगते हैं।

बच्ची के शरीर और दिमाग पर क्या असर पड़ता है?

डॉक्टर शैलजा का कहना है कि समय से पहले पीरियड्स शुरू होने का बच्ची के शरीर और मन, दोनों पर बहुत बुरा असर पड़ता है, ऐसी बच्चियों की लंबाई शुरू में तो बहुत तेजी से बढ़ती है, लेकिन बाद में हड्डियों का विकास रुक जाता है, जिससे उनकी हाइट छोटी रह जाती है। 7-8 साल की बच्ची इतनी समझदार नहीं होती कि वह पीरियड्स के दर्द और साफ-सफाई को खुद संभाल सके। इस वजह से वह अपनी सहेलियों से खुद को अलग समझने लगती है और डर या डिप्रेशन (तनाव) में चली जाती है।

अपनी बच्ची को इस समस्या से कैसे बचाएं?

  • बच्चों को घर का बना सादा खाना, हरी सब्जियां और फल खिलाएं।
  • वजन कंट्रोल में रखें।
  • उम्र से पहले कोई बदलाव दिखे, तो डॉक्टर से सलाह लें।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

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