बीजेपी में ‘बूथ के भूत’ कहे जाते हैं रजनीश अग्रवाल:शादी में शामिल होने आए थे नितिन नवीन; फॉर्मूले में बाहर हुए नरोत्तम-भदौरिया, कैलाश तो लगी लॉटरी

एमपी में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए 18 जून को चुनाव होने हैं। बीजेपी ने अपने कब्जे वाली दो सीटों के लिए उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया है। पार्टी ने राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग और प्रदेश मंत्री रजनीश अग्रवाल को उम्मीदवार बनाया है। वर्तमान में मध्यप्रदेश से जॉर्ज कुरियन और डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी राज्यसभा सांसद हैं। बीजेपी में रजनीश अग्रवाल को कहा जाता है ‘बूथ का भूत’ मध्यप्रदेश से राज्यसभा प्रत्याशी बनाए गए भाजपा के प्रदेश मंत्री रजनीश अग्रवाल को पार्टी में ‘बूथ का भूत’ कहा जाता है। वे साल 2021 से प्रदेश भाजपा में बूथ प्रबंधन की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। उनके नेतृत्व में प्रदेश के 65 हजार बूथों का डिजिटाइजेशन किया गया। बूथों को A, B, C और D कैटेगराइज करने का काम भी उन्होंने कराया। इसके अलावा 30 मतदाताओं पर अर्द्धपन्ना प्रभारी नियुक्त करने की रणनीति से लेकर विधानसभा और लोकसभा चुनावों में पार्टी का वोट शेयर बढ़ाने की योजना बनाने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। बूथ प्रबंधन में उनकी दक्षता के कारण पार्टी कार्यकर्ता उन्हें ‘बूथ का भूत’ कहकर संबोधित करते हैं। एमपी से राज्यसभा में नहीं है सवर्ण सांसद
एमपी बीजेपी की ओर से सवर्ण, ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग के नेताओं के नाम राज्यसभा के लिए दिल्ली भेजे गए थे। एमपी के 11 राज्यसभा सांसदों में बीजेपी के 8 सांसद हैं। इनमें ओबीसी और एससी वर्ग के तीन-तीन सांसद हैं। एक एसटी और ईसाई यानी अल्पसंख्यक वर्ग से एक सांसद भी थे। लेकिन, सामान्य वर्ग का एमपी से एक भी सांसद राज्यसभा में नहीं था। ऐसे में केन्द्रीय नेतृत्व ने तय किया कि एमपी में सवर्ण को इस बार राज्यसभा भेजा जाएगा। एमपी बीजेपी ने सामान्य, ओबीसी, एससी और एसटी चारों वर्ग के नेताओं के नाम दिल्ली भेजे थे। एमपी बीजेपी ने इन सवर्ण नेताओं के नाम दिल्ली भेजे थे कैसे रेस से बाहर हुए दिग्गज
राज्यसभा की रेस में सबसे सीनियर लीडर और मध्यप्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का नाम शामिल था लेकिन, राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री होने के चलते वे रेस से बाहर कर दिए गए। पूर्व मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा और डॉ. अरविंद भदौरिया भी दावेदारों में थे, लेकिन दोनों ही ढाई साल पहले विधानसभा चुनाव लड़ चुके थे। इसके बाद पार्टी में यह राय बनी कि राज्यसभा का अवसर ऐसे कार्यकर्ता को दिया जाए, जिसे हाल के चुनावों में मौका नहीं मिला हो। वैश्य वर्ग से सिंधिया समर्थक पूर्व विधायक मुन्नालाल गोयल का नाम भी चर्चा में था, लेकिन वे भी चुनाव लड़कर हार चुके थे। ऐसे में पार्टी नेतृत्व ने लंबे समय से संगठन में सक्रिय और पर्दे के पीछे काम करने वाले रजनीश अग्रवाल के नाम पर मुहर लगा दी। दिव्यांग होते हुए भी फुल टाइम एक्टिव रहते हैं
सागर जिले के मंडीबामाेरा कस्बे के रहने वाले रजनीश अग्रवाल बचपन से दिव्यांग हैं। पैरों से दिव्यांग होने के बावजूद वे पार्टी में दूसरे नेताओं को काम में पीछे छोड़ देते हैं। पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद वे विद्यार्थी परिषद में लंबे समय तक काम करते हुए भाजपा में आए। वीडी ने आगे बढ़ाया नाम , शिवराज ने दी सहमति
रजनीश अग्रवाल को वीडी शर्मा के प्रदेश अध्यक्ष रहते बूथ प्रबंधन का काम सौंपा गया था। वे वीडी की टीम में प्रदेश मंत्री बने। सिंधिया के राज्यसभा से इस्तीफे के बाद खाली हुई सीट पर रजनीश को भेजने की चर्चा हुई थी। लेकिन, उस समय दिल्ली से जॉर्ज कुरियन का नाम तय हो गया था। इस बार राज्यसभा के लिए जैसे ही सवर्ण को भेजने पर केन्द्रीय नेतृत्व ने फॉर्मुला तय किया। उसके बाद वीडी शर्मा ने रजनीश अग्रवाल का नाम आगे बढ़ा दिया। उम्मीदवारों के नामों पर चर्चा के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने भी रजनीश अग्रवाल को सबसे उपयुक्त उम्मीदवार के तौर पर सहमति दी। इसके बाद रजनीश के नाम पर केन्द्रीय नेतृत्व ने हरी झंडी दे दी। रजनीश अग्रवाल बोले- संकोच में सीएम से टिकट मांगने नहीं गया
राज्यसभा प्रत्याशी घोषित होने के बाद दैनिक भास्कर से बातचीत में रजनीश अग्रवाल ने कहा- यह केवल हमारी पार्टी में ही संभव हो सकता है कि एक सामान्य से कार्यकर्ता को राज्यसभा जैसे उच्च सदन में भेजा जा सकता है। मैं तो संकोच वश मुख्यमंत्री जी से यह कहने तक नहीं जा पाया कि मेरा ध्यान रखिए। पिछले कई दिनों से प्रदेश अध्यक्ष से भेंट नहीं कर पाया। लेकिन, मुख्यमंत्री जी और प्रदेश अध्यक्ष जी, प्रदेश और केन्द्रीय नेतृत्व का मैं आभारी हूं कि उन्होंने मुझे यह अवसर दिया। शादी में शामिल होने भोपाल आए थे नितिन नवीन
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और रजनीश अग्रवाल युवा मोर्चा में साथ काम कर चुके हैं। रजनीश अग्रवाल ने बताया- नितिन नबीन 2010 में एमपी बीजेपी युवा मोर्चा के प्रदेश प्रभारी बनाए गए थे। उस दौरान जीतू जिराती प्रदेश अध्यक्ष थे। मैं उनकी टीम में प्रदेश महामंत्री था। 15 दिसंबर 2011 को मेरी शादी थी। मैंने नितिन जी को निमंत्रण दिया और मजाकिया लहजे में कहा, ‘शादी में आप ही मुझे घोड़ी चढ़ाएंगे।’ उन्होंने कहा, ‘मैं शादी में आऊंगा।’ यहां पढ़ें पूरी खबर… कुरियन का पत्ता कटा, पंजाब में संतुलन बनाने तरुण चुग जाएंगे एमपी से राज्यसभा
ज्योतिरादित्य सिंधिया के गुना से बीजेपी के टिकट पर लोकसभा सांसद बनने के बाद उन्होंने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिया था। सिंधिया वाली सीट पर केरल के ईसाई नेता जॉर्ज कुरियन को मप्र से राज्यसभा भेजा गया था। जॉर्ज कुरियन वर्तमान में केन्द्र सरकार में मत्स्य पालन, डेयरी मंत्रालय में राज्यमंत्री हैं। कुरियन हाल ही में केरल से विधानसभा चुनाव लड़े लेकिन हार गए थे। अब बीजेपी ने उन्हें राज्यसभा का उम्मीदवार नहीं बनाया है। कुरियन संगठन में, बिट्टू पंजाब से विधानसभा चुनाव लड़ सकते हैं कुरियन की जगह अब पंजाब में बीजेपी ने राजनीतिक संतुलन बनाने राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग को मप्र से राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया है। केन्द्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को भी बीजेपी ने राज्यसभा कैंडिडेट नहीं बनाया है। ऐसे में बीजेपी ने पंजाब में गैर सिख हिन्दू तरूण चुग को राज्यसभा भेज रही है। संभवत: जॉर्ज कुरियन अब बीजेपी के संगठन में काम करेंगे और रवनीत सिंह बिट्टू पंजाब में विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। कांग्रेस ने पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन को मैदान में उतारा वहीं इंडियन नेशनल कांग्रेस ने भी 5 राज्यों की 7 राज्यसभा सीटों पर कैंडिडेट्स की लिस्ट जारी कर दी है। कांग्रेस ने मंदसौर लोकसभा क्षेत्र से पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन को मैदान में उतारा है।मीनाक्षी को राहुल गांधी का करीबी माना जाता है। ये खबर भी पढ़ें.. कांग्रेस ने MP से मीनाक्षी को बनाया राज्यसभा कैंडिडेट:BJP ने तरुण चुग, रजनीश अग्रवाल को दिया टिकट मध्य प्रदेश की दो राज्यसभा सीटों के लिए भाजपा ने राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग और प्रदेश मंत्री रजनीश अग्रवाल को उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस ने मंदसौर लोकसभा क्षेत्र से पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन को मैदान में उतारा है। मीनाक्षी को राहुल गांधी का करीबी माना जाता है। पढ़िए पूरी खबर।

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