लखनऊ के डॉक्टरों ने 35 वर्षीय टॉन्सिल कैंसर मरीज का अत्याधुनिक ट्रांस ओरल रोबोटिक सर्जरी (TORS) के माध्यम से सफल इलाज किया। इस प्रक्रिया में बिना किसी बड़े चीरे और बिना दिखाई देने वाले निशान के कैंसरग्रस्त ट्यूमर को हटाया गया। गले में दर्द और निगलने में परेशानी से बढ़ी चिंता
बहराइच निवासी 35 वर्षीय शकील अहमद कई सप्ताह से लगातार गले में दर्द और निगलने में परेशानी से जूझ रहे थे। शुरुआत में उन्होंने इसे सामान्य संक्रमण समझकर नजरअंदाज किया, लेकिन समस्या बढ़ने पर उन्होंने मैक्स हॉस्पिटल में जांच कराई। विस्तृत परीक्षण में उन्हें स्टेज-2 टॉन्सिल कैंसर होने की पुष्टि हुई। रोबोटिक तकनीक से निकाला गया ट्यूमर
मरीज का इलाज मैक्स हॉस्पिटल के डायरेक्टर सर्जिकल ऑन्कोलॉजी डॉ.कमलेश वर्मा और उनकी टीम की देखरेख में किया गया। डॉक्टरों ने दा विंची सर्जिकल सिस्टम की मदद से ट्रांस ओरल रोबोटिक सर्जरी करने का फैसला लिया। इस दौरान टॉन्सिल के ट्यूमर को रोबोटिक तकनीक से हटाया गया, जबकि गर्दन के लिम्फ नोड्स को छोटे चीरे के जरिए निकाला गया। कीमो-रेडिएशन की जरूरत कम कर सकती है तकनीक
डॉ. कमलेश वर्मा ने बताया कि टीओआरएस हेड एंड नेक कैंसर के इलाज में महत्वपूर्ण तकनीकी प्रगति है। कुछ मरीजों में यह प्रक्रिया लंबे समय तक चलने वाली कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी की आवश्यकता को कम कर सकती है। साथ ही चेहरे या गर्दन पर बड़े निशान नहीं पड़ते और मरीज जल्दी सामान्य जीवन में लौट सकता है। चार दिन में हुई रिकवरी
मिनिमली इनवेसिव तकनीक के कारण मरीज को ऑपरेशन के बाद कम दर्द हुआ और रिकवरी भी तेज रही। सर्जरी के बाद शकील अहमद की स्थिति स्थिर रही और वे 3-4 दिनों के भीतर सामान्य रूप से भोजन करने लगे। युवाओं में भी बढ़ रहा हेड एंड नेक कैंसर
विशेषज्ञों के अनुसार टॉन्सिल कैंसर समेत हेड एंड नेक कैंसर के मामले अब कम उम्र के लोगों में भी सामने आ रहे हैं। तंबाकू, धूम्रपान, शराब का सेवन और एचपीवी संक्रमण इसके प्रमुख कारण हैं। लगातार गले में दर्द, निगलने में दिक्कत, आवाज में बदलाव या गर्दन में सूजन जैसे लक्षणों को गंभीरता से लेते हुए समय पर जांच करानी चाहिए।


