दुनिया की तेल राजनीति में इस समय सबसे गजब का मोर्चा नई दिल्ली में खुलता दिखाई दे रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज के बीच हुई उच्चस्तरीय वार्ता ने साफ कर दिया है कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और सामरिक हितों के लिए नई धुरी तैयार कर रहा है। पांच दिन के भारत दौरे पर पहुंचीं रोड्रिगेज अपने साथ विदेश, अर्थव्यवस्था, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, परिवहन और सूचना मंत्रालयों के वरिष्ठ मंत्रियों का विशाल प्रतिनिधिमंडल लेकर आई हैं। यह यात्रा भारत और वेनेजुएला के बीच उभरते उस रणनीतिक गठबंधन का ऐलान बनी है जो आने वाले वर्षों में वैश्विक शक्ति संतुलन को बदल सकता है।
प्रधानमंत्री मोदी और डेल्सी रोड्रिगेज के बीच हुई वार्ता में ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, निवेश, स्वास्थ्य, परिवहन, खनिज संपदा और दीर्घकालिक आर्थिक साझेदारी पर गहन चर्चा हुई। बैठक इतनी अहम रही कि औपचारिक वार्ता कार्यकारी भोज तक चली। विदेश मंत्रालय के सचिव रुद्रेंद्र टंडन ने स्पष्ट कहा कि वेनेजुएला भारत को ऊर्जा क्षेत्र में अपना पसंदीदा साझेदार मानता है और दोनों देश तेल उत्पादन से लेकर शोधन तक हर स्तर पर सहयोग बढ़ाने को तैयार हैं।
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यह साझेदारी ऐसे समय में मजबूत हो रही है जब पश्चिम एशिया में अमेरिका, इजरायल और ईरान के टकराव ने वैश्विक तेल आपूर्ति को हिला दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट के कारण भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है क्योंकि भारत के चालीस प्रतिशत से अधिक कच्चे तेल की आपूर्ति इसी रास्ते से होती है। ऐसे में भारत ने वेनेजुएला की ओर कदम बढ़ाया है। मई महीने में भारत ने प्रतिदिन चार लाख सत्ताईस हजार बैरल वेनेजुएलाई तेल खरीदा और वह भारत का तीसरा सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बन गया। यह केवल व्यापारिक आंकड़ा नहीं, बल्कि भारत की बदलती रणनीतिक सोच का संकेत है।
कभी अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण भारत ने वेनेजुएला से तेल खरीद लगभग बंद कर दी थी। लेकिन अब नई दिल्ली ने साफ कर दिया है कि वह अपनी ऊर्जा नीति वाशिंगटन की शर्तों पर नहीं चलाएगा। अमेरिका द्वारा निकोलस मादुरो को हिरासत में लेने और वेनेजुएला में राजनीतिक उथल पुथल के बावजूद भारत ने कराकस से दूरी बनाने की बजाय संबंध और मजबूत किए हैं। यह भारत की स्वतंत्र विदेश नीति का सबसे सशक्त प्रदर्शन है।
देखा जाये तो भारत के लिए वेनेजुएला केवल तेल का स्रोत नहीं है। वहां सोना, हीरे, निकल, बाक्साइट और दुर्लभ खनिजों का विशाल भंडार मौजूद है। वार्ता में खनन सहयोग और संभावित भंडारों के संयुक्त आकलन पर भी चर्चा हुई। इसका सीधा मतलब है कि भारत अब भविष्य की रक्षा तकनीक, हरित ऊर्जा, इलेक्ट्रानिक उद्योग और विनिर्माण शक्ति के लिए जरूरी संसाधनों पर भी अपना नियंत्रण मजबूत करना चाहता है। यह कदम चीन के बढ़ते प्रभाव को चुनौती देने की दिशा में भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
डेल्सी रोड्रिगेज की भारत यात्रा का एक बेहद दिलचस्प और प्रतीकात्मक पहलू भी सामने आया है। प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात के बाद वह आंध्र प्रदेश स्थित सत्य साई बाबा के आश्रम प्रशांति निलयम भी जाएंगी। हम आपको बता दें कि रोड्रिगेज और पूर्व वेनेजुएलाई राष्ट्रपति निकोलस मादुरो लंबे समय से सत्य साई बाबा के अनुयायी रहे हैं। रोड्रिगेज इससे पहले भी दो बार आश्रम का दौरा कर चुकी हैं। उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा था कि जब भी वह संकट में रहीं, उन्हें साई बाबा का आशीर्वाद अपने परिवार और अपने देश के साथ महसूस हुआ। मादुरो ने भी सत्य साई बाबा को प्रेम, सेवा और सत्य का प्रकाश स्तंभ बताया था।
यह तथ्य केवल आध्यात्मिक जुड़ाव की कहानी नहीं है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक शक्ति का वैश्विक प्रभाव भी दिखाता है। जिस वेनेजुएला को पश्चिमी मीडिया अक्सर केवल राजनीतिक संकट और तेल संघर्ष के नजरिये से देखता है, वहां भारतीय आध्यात्मिक परंपरा की गहरी पैठ भारत की सॉफ्ट पावर का असाधारण उदाहरण बन चुकी है। बताया जाता है कि कराकस स्थित राष्ट्रपति भवन में सिमोन बोलिवार और ह्यूगो चावेज की तस्वीरों के साथ सत्य साई बाबा की बड़ी तस्वीर भी लगाई गई थी। आज वेनेजुएला में लगभग दो लाख लोग सत्य साई आंदोलन से जुड़े माने जाते हैं।
वार्ता के दौरान ब्रिक्स का मुद्दा भी उठा और वेनेजुएला ने प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता की खुलकर सराहना की। यह संकेत है कि ग्लोबल साउथ के देशों में भारत की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है। ऊर्जा, खनिज, व्यापार और कूटनीति के इस बहुस्तरीय गठजोड के जरिए भारत अब उस नई विश्व व्यवस्था की तैयारी कर रहा है जिसमें पश्चिमी शक्तियों का एकाधिकार टूटता दिखाई दे रहा है। हम आपको यह भी बता दें कि डेल्सी रोड्रिगेज ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से भी मुलाकात की। वह मुंबई, दिल्ली में व्यापारिक मुद्दों से संबंधित दौरे भी करेंगी। माना जा रहा है कि दोनों देश नॉन ऑयल सेक्टर में भी अपने संबंध मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं।
बहरहाल, नई दिल्ली ने इस पूरी कवायद से दुनिया को साफ संदेश दिया है कि भारत अब वैश्विक शक्ति संतुलन का निर्णायक केंद्र बनने की दिशा में बढ़ रहा है। वेनेजुएला के साथ यह साझेदारी आने वाले समय में भारत की ऊर्जा सुरक्षा, औद्योगिक ताकत और भू-राजनीतिक प्रभाव को नई ऊंचाई दे सकती है।


