Sirohi Success Story: 300 घरों के देवनगर गांव का पहला सरकारी सेवक, चेतन ने पहनी फौजी वर्दी, गांव में उत्सव का माहौल

Sirohi Success Story: 300 घरों के देवनगर गांव का पहला सरकारी सेवक, चेतन ने पहनी फौजी वर्दी, गांव में उत्सव का माहौल

सिरोही। मंजिल उन्हीं को मिलती है जो कठिनाइयों से हार नहीं मानते। सिरोही जिले की शिवगंज तहसील के छोटे से गांव देवनगर के 22 वर्षीय चेतन देवासी ने अपने संघर्ष, मेहनत और दृढ़ संकल्प के दम पर भारतीय सेना में चयनित होकर यह साबित कर दिया। खास बात यह कि करीब 400 घरों वाले इस गांव में पहली बार किसी युवा का सरकारी सेवा में चयन हुआ है और वह भी देश सेवा के लिए। चेतन की यह उपलब्धि परिवार व गांव के लिए गौरव का क्षण है।

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चेतन ने वर्ष 2023 में राउमावि मनादर से 12वीं उत्तीर्ण की। इसके बाद विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाएं दी, लेकिन शुरुआती प्रयासों में असफलता का सामना करना पड़ा। सेना भर्ती की पहली शारीरिक परीक्षा में वे सफल नहीं हो सके, वहीं राजस्थान पुलिस भर्ती में भी निराशा हाथ लगी। इसके बावजूद हार नहीं मानी और अपने लक्ष्य पर अडिग रहे।

युवाओं के लिए बने प्रेरणास्रोत

चेतन के पिता मादाराम देवासी मार्बल फिटिंग का कार्य करते हैं और मां सेजू देवी गृहिणी है। तीन बहन-भाइयों में चेतन बड़ा है। चेतन ने वर्ष 2025 में सिरोही के छात्रावास में रहकर तैयारी की और भारतीय सेना की लिखित परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके बाद फिजिकल के लिए सूरतगढ़ (गंगानगर) गए, जहां तीन माह तक कठिन अभ्यास किया। उनकी मेहनत रंग लाई और फिजिकल परीक्षा में चयनित हुए। चेतन बताते हैं कि इस सफलता में माता-पिता, गुरुजनों और विद्यालय के शिक्षकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। चेतन गांव के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन गए हैं।

गांव में छाई खुशी

चेतन की उपलब्धि से पूरे गांव में खुशी का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि अब गांव के अन्य युवाओं को भी प्रतियोगी परीक्षाओं और देश सेवा के लिए नई प्रेरणा मिलेगी। चेतन की सफलता यह साबित करती है कि दृढ़ निश्चय, कठिन परिश्रम और सकारात्मक सोच से सफलता जरूर मिलती है।

इनका कहना है

चेतन देवासी की सफलता यह साबित करती है कि कठिन परिश्रम, अनुशासन और आत्मविश्वास से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। सीमित संसाधनों के बावजूद उसने हार नहीं मानी और भारतीय सेना में चयनित होकर पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है। चेतन गांव के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन गए हैं।

  • रमेश पुरोहित, समाजसेवी मनादर

चेतन ने अपने संघर्ष और लगन से यह संदेश दिया है कि असफलता के बाद सफलता जरूर मिलती है। उसकी उपलब्धि से गांव के युवाओं में नई ऊर्जा और देश सेवा का जज्बा पैदा होगा।

  • मुकेश पुरोहित, उप प्रशासक, ग्राम पंचायत मनादर

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