इज़रायली सेना ने गाज़ा में अपार्टमेंट बिल्डिंग पर किया हमला, 8 लोगों की हुई मौत

इज़रायली सेना ने गाज़ा में अपार्टमेंट बिल्डिंग पर किया हमला, 8 लोगों की हुई मौत

इज़रायल (Israel) और हमास (Hamas) के बीच सिर्फ नाम मात्र का ही युद्धविराम चल रहा है, क्योंकि गाज़ा (Gaza) पर इज़रायली हमलों का सिलसिला फिर से शुरू हो चुका है। आए दिन ही इज़रायली सेना गाज़ा में कहीं न कहीं हमले कर रही हैं। देर रात इज़रायली सेना ने गाज़ा शहर में एक अपार्टमेंट बिल्डिंग को निशाना बनाया और एयरस्ट्राइक कर दी, जिससे बिल्डिंग में आग लग गई। सिर्फ इस बिल्डिंग पर ही नहीं, इज़रायली सेना ने गाज़ा शहर में एक साथ चार एयरस्ट्राइक्स की।

8 लोगों की हुई मौत

इज़रायली सेना द्वारा गाज़ा शहर में अपार्टमेंट बिल्डिंग पर की गई एयरस्ट्राइक में 8 लोगों की मौत हो गई, जिसकी जानकारी अल-शिफा अस्पताल की तरफ से दी गई। पहले मरने वालों की संख्या 6 बताई गई थी, लेकिन बाद में मृतकों का आंकड़ा बढ़कर 8 हो गया, जिसकी पुष्टि अस्पताल प्रशासन की तरफ से की गई।

कई लोग हुए घायल

इज़रायली एयरस्ट्राइक की वजह से गाज़ा शहर में अपार्टमेंट बिल्डिंग में रहने वाले कई लोग घायल हो गए। अन्य एयरस्ट्राइक्स में भी कई लोग घायल हुए। घायलों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। इनमें से कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है। ऐसे में अस्पताल प्रशासन ने मरने वालों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई है।

रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

गाज़ा शहर में इज़रायली हमलों की वजह से अपार्टमेंट बिल्डिंग में आग लग गई है, जिस पर काबू पाने की कोशिश की जा रही है। दमकल की गाड़ियाँ घटनास्थल पर मौजूद हैं और साथ ही रेस्क्यू ऑपरेशन भी जारी है। इज़रायली हमलों की वजह से कई घरों को नुकसान पहुंचा है।

गाज़ा में जान-माल का भारी नुकसान

इज़रायल-हमास युद्ध (Israel-Hamas War) की वजह से गाज़ा में तबाही मच चुकी है और जान-माल का भारी नुकसान हुआ है। मीडिया रिपोर्ट्स की वजह से इस युद्ध के कारण अब तक करीब 70,373 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, जिनमें करीब 20,179 बच्चे शामिल हैं। वहीँ करीब 171,079 लोगों के घायल होने की रिपोर्ट है। युद्धविराम के बाद के आंकड़े पर गौर किया जाए, तो इसके बाद से अब तक करीब 383 लोग मारे जा चुके हैं और करीब 1,002 लोग घायल हुए हैं। युद्ध की वजह से गाज़ा और अन्य फिलिस्तीनी इलाकों में बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचा है। लाखों लोग विस्थापित हो गए हैं। फिलिस्तीनी मुश्किल हालात में जीने के लिए मजबूर हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *