अंगोला में मिलीं जीवों की दर्जनों नई प्रजातियां, नीली चमक छोड़ने वाली मकड़ी भी मिली

अंगोला में मिलीं जीवों की दर्जनों नई प्रजातियां, नीली चमक छोड़ने वाली मकड़ी भी मिली

Angola New Species Discovery: दुनियाभर में जैव विविधता तेजी से घट रही है, फिर भी वैज्ञानिक पहले से कहीं अधिक तेजी से नई प्रजातियों की खोज कर रहे हैं। इसी कड़ी में अफ्रीकी देश अंगोला के एक दूरदराज इलाके में हुए वैज्ञानिकों ने दर्जनों ऐसी प्रजातियों का पता लगाया है, जो अब तक अज्ञात थीं। पूर्वी अंगोला के लिसिमा पठार में फरवरी 2026 में एक अभियान चलाया गया। यहां दलदली भूमि, आर्द्रभूमियां, घास के मैदान और वन क्षेत्र मौजूद हैं। यहां मिलीं नई प्रजातियों में सबसे आकर्षक एक ‘क्राउंड क्रैब स्पाइडर’ है, जो पराबैंगनी रोशनी में नीली चमक छोड़ती है। वैज्ञानिक अभी तक यह नहीं समझ पाए हैं कि ऐसा क्यों होता है।

103 ड्रैगनफ्लाई, पतंगों की 8 नई प्रजाति मिलीं

वैज्ञानिकों को एक ‘लेडीबर्ड ऑर्ब-वेब स्पाइडर’ भी मिली है, जो जहरीले लेडीबर्ड बीटल जैसी दिखती है। माना जाता है कि यह समानता उसे शिकारी जीवों से बचाने में मदद करती है। अभियान के दौरान दर्ज की गई 103 ड्रैगनफ्लाई और डैमसेलफ्लाई प्रजातियों में से आठ विज्ञान के लिए नई पाई गईं। इसके अलावा आठ नई पतंगा प्रजातियां और तीन नई टिड्डी, कैटिडिड और झींगुर प्रजातियां भी दर्ज की गईं। विस्तृत अध्ययन के बाद नई प्रजातियों की संख्या और बढ़ सकती है।

दुर्लभ और विचित्र जीव भी आए सामने

-इनमें गैबून एडर नामक जहरीला सांप शामिल है, जिसके दांत लगभग 5 सेंटीमीटर लंबे हैं।
-एक ‘बैट फ्लाई’ भी मिली, जो चमगादड़ों के शरीर पर रहती है, उनके फर में घूमती है और खून चूसती है।
-‘मैनी-प्लूम्ड मॉथ’ नामक पतंगा भी मिला, जिसके पंख झिल्लीदार न होकर पंखुड़ीनुमा रेशों से बने हैं।

बारिश, कीचड़ और मलेरिया के बीच हुआ शोध

अभियान के प्रमुख रॉब टेलर ने बताया कि यह सर्वेक्षण वर्षा ऋतु के चरम समय में किया गया। कई बार अभियान दल की गाड़ियां पूरे दिन कीचड़ में फंसी रहीं। टीम को इंजन संबंधी खराबियों, ब्रेक फेल होने जैसी तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ा। इसके अलावा कई सदस्य मलेरिया से भी संक्रमित हुए। जब भी अभियान रुकता वे आसपास की दलदली भूमि, जंगलों और आर्द्रभूमियों का सर्वेक्षण शुरू कर देते थे।

संरक्षण सबसे बड़ी चुनौती

विशेषज्ञों का मानना है कि लिसिमा पठार की सबसे संवेदनशील प्रजातियां वे हैं जो खास तरह के आवास पर निर्भर हैं। कुछ तितलियां केवल विशिष्ट पौधों पर ही निर्भर रहती हैं। खनन, जंगलों की कटाई, आग या झूम खेती जैसी गतिविधियां इनके अस्तित्व के लिए खतरा बन सकती हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *