हरदोई के मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य सुविधाओं पर सवाल उठ रहे हैं। अस्पताल में चार ऑक्सीजन प्लांट होने के बावजूद मरीजों को कंसंट्रेटर और सिलिंडर के भरोसे इलाज मिल रहा है। इमरजेंसी वार्ड में ऑक्सीजन सप्लाई व्यवस्था अधूरी है। मेडिकल कॉलेज की 60 बेड क्षमता वाली इमरजेंसी में केवल रेड जोन के 10 और येलो जोन के लगभग 15 बेडों तक ही ऑक्सीजन लाइन पहुंची है। ट्राएज एरिया समेत कई अन्य बेडों पर पाइपलाइन सुविधा नहीं है। गंभीर मरीजों को तत्काल ऑक्सीजन के लिए कंसंट्रेटर और सिलिंडर का उपयोग करना पड़ता है। कोविड काल में ऑक्सीजन संकट के बाद प्रधानमंत्री केयर फंड और जनसहयोग से अस्पताल में कई ऑक्सीजन प्लांट लगाए गए थे। इमरजेंसी के लिए 500 लीटर प्रति मिनट क्षमता का एक अलग प्लांट भी स्थापित किया गया। इसके बावजूद ट्राएज एरिया तक पाइपलाइन नहीं बिछाई जा सकी है। रेड और येलो जोन में भी तकनीकी खराबी के कारण ऑक्सीजन सप्लाई बाधित होती रहती है। यह स्थिति केवल इमरजेंसी तक सीमित नहीं है। बच्चों के 42 बेड वाले पीकू वार्ड और 10 बेड की आईसीयू में पाइपलाइन होने के बावजूद नियमित सप्लाई प्रभावित रहती है। यहां भर्ती मरीजों को भी सिलिंडर और ऑक्सीजन कंसंट्रेटर पर निर्भर रहना पड़ता है। ऑक्सीजन संयंत्र चालू होने के बावजूद अस्पताल को हर दस दिन में निजी एजेंसियों से सिलिंडर रिफिल कराने पड़ते हैं। मई महीने में कुल 86 सिलिंडरों की रिफिलिंग पर लगभग 35 से 40 हजार रुपये खर्च हुए। मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. जेबी गोगोई ने बताया कि प्लांट संचालित हैं और ऑक्सीजन की सप्लाई की जा रही है। ट्राएज एरिया में पाइपलाइन विस्तार का प्रस्ताव तैयार है और इस पर जल्द काम शुरू होगा। तब तक मरीजों को वैकल्पिक व्यवस्था के तहत इलाज दिया जा रहा है।


